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ओडिशा विधानसभा में विरोध प्रदर्शन, अध्यक्ष ने सभी दलों की बैठक बुलाई

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ओडिशा विधानसभा में विरोध प्रदर्शन, अध्यक्ष ने सभी दलों की बैठक बुलाई

सारांश

ओडिशा विधानसभा में गतिरोध का मामला बढ़ता जा रहा है। बीजद और कांग्रेस के सदस्यों के अराजकता के विरोध के बीच, सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है। जानिए इस राजनीतिक संकट की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

ओडिशा विधानसभा में गतिरोध जारी है।
बीजद और कांग्रेस के सदस्यों का विरोध प्रदर्शन।
सरकार पर किसानों के साथ विश्वासघात का आरोप।
अध्यक्ष ने सभी दलों की बैठक बुलाई।
किसानों के मुद्दों को लेकर बढ़ता हंगामा।

भुवनेश्वर, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा विधानसभा में गतिरोध का सिलसिला जारी है, जहाँ विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के सदस्यों ने मंडियों में हुई अराजकता और एपस्टीन फाइल्स के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया।

सोमवार को सुबह 10:30 बजे प्रश्नकाल की आरंभ होते ही बीजद के सदस्य विधानसभा के वेल में पहुँच गए। उनके हाथों में पोस्टर थे और उन्होंने अध्यक्ष की कुर्सी के सामने पहुँचकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी। उन्होंने राज्यभर की मंडियों में धान की खरीद में भारी गड़बड़ी के आरोप लगाए।

उनका दावा है कि भाजपा की नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात किया है, जो धान की खरीद न होने और न्यूनतम समर्थन मूल्य न मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कांग्रेस के सदस्यों ने भी सदन में हंगामा करते हुए एपस्टीन फाइल्स पर चर्चा की मांग की।

सदन के अध्यक्ष ने बार-बार विपक्षी सदस्यों से अपील की कि वे अपनी सीटों पर लौटें और सदन को कार्य करने दें, लेकिन सदस्यों ने उनकी बात नहीं मानी और विरोध जारी रहा।

इस हंगामे के कारण ओडिशा विधानसभा के अध्यक्ष को सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा और अंततः कार्यवाही को शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए, वरिष्ठ बीजेडी नेता दिव्या शंकर मिश्रा ने ओडिशा सरकार की विधानसभा में गतिरोध के लिए कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बीजेडी किसानों के मुद्दों पर अपनी आवाज तेज करेगी और मंगलवार को भुवनेश्वर में बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन करेगी। उन्होंने कहा, "वर्तमान स्थिति देखकर मुझे शर्मिंदगी हो रही है। लोकतंत्र में शासन का उद्देश्य सबसे गरीब, किसान, पिछड़े वर्ग और वंचित समुदायों की भलाई होना चाहिए। दुर्भाग्यवश, यह सरकार कल्याण के वास्तविक अर्थ को समझने में विफल रही है।"

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बढ़ती कृषि लागत के बावजूद सरकार ने किसानों को नजरअंदाज किया है। किसानों के लिए 100 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा पूरा नहीं किया गया और सरकार ने एमएसपी बढ़ाने की बात की, लेकिन किसानों को लाभ नहीं मिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बीज, उर्वरक और अन्य कृषि इनपुट की लागत में काफी वृद्धि हुई है, फिर भी किसानों को पर्याप्त सहायता नहीं मिल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लोकतंत्र में संवाद और सहमति की आवश्यकता को दर्शाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा विधानसभा में हालात क्या हैं?
ओडिशा विधानसभा में बीजद और कांग्रेस के सदस्यों के बीच हंगामा जारी है, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित हो चुकी है।
किस मुद्दे पर विरोध किया जा रहा है?
विरोध का मुख्य कारण मंडियों में धान खरीद में गड़बड़ी और एपस्टीन फाइल्स की चर्चा है।
बीजद का क्या कहना है?
बीजद नेता दिव्या शंकर मिश्रा ने सरकार पर किसानों से विश्वासघात का आरोप लगाया है।
किसान समस्याओं पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?
सरकार ने किसानों के लिए विभिन्न योजनाएं घोषित की हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन प्रभावी नहीं हो पाया है।
क्या आगे कोई विरोध प्रदर्शन होगा?
हाँ, बीजद ने मंगलवार को भुवनेश्वर में बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने का निर्णय लिया है।
राष्ट्र प्रेस
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