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क्या पश्चिम बंगाल में डीजीपी की नियुक्ति पर संकट है?

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क्या पश्चिम बंगाल में डीजीपी की नियुक्ति पर संकट है?

सारांश

पश्चिम बंगाल में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। यूपीएससी ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने की सलाह दी है। जानिए इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और क्या है आगे का रास्ता।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल में डीजीपी की नियुक्ति में जटिलताएं बढ़ रही हैं।
यूपीएससी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने की सलाह दी है।
राजीव कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है।
नियमों के अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई।
इस विवाद का निपटारा आवश्यक है ताकि कानून व्यवस्था में कोई बाधा न आए।

कोलकाता, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर स्थिति और भी जटिल होती जा रही है। वर्तमान डीजीपी राजीव कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने वाला है, लेकिन उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।

इस बीच, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से आवश्यक अनुमति लेने की सलाह दी है।

यूपीएससी के निदेशक नंद किशोर कुमार ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर कहा है कि राजीव कुमार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए। यूपीएससी ने राज्य सरकार द्वारा भेजी गई आईपीएस अधिकारियों की सूची भी लौटा दी है, जिनमें से किसी एक को नया डीजीपी बनाए जाने की सिफारिश की गई थी।

नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य सरकार को डीजीपी पद के लिए राज्य में कार्यरत तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजनी होती है। इसके बाद यूपीएससी इन तीन नामों में से एक को अंतिम रूप से मंजूरी देता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाई।

इस विवाद की जड़ दिसंबर 2023 में तत्कालीन डीजीपी मनोज मालवीय के सेवानिवृत्त होने से जुड़ी है। उस समय राज्य सरकार को उनके उत्तराधिकारी के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजना था, लेकिन ऐसा करने के बजाय राज्य सरकार ने राजीव कुमार को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त कर दिया। बाद में राज्य सरकार ने उनके स्थायी उत्तराधिकारी के लिए आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा, जिसे यूपीएससी ने स्वीकार नहीं किया।

यूपीएससी के निदेशक ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2018 के आदेश का हवाला दिया है। इस आदेश के अनुसार, किसी भी राज्य सरकार को मौजूदा डीजीपी के सेवानिवृत्त होने से कम से कम तीन महीने पहले नए डीजीपी के लिए आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजना अनिवार्य है।

इस आधार पर यूपीएससी का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार को सितंबर 2023 में ही पैनल भेज देना चाहिए था, क्योंकि मनोज मालवीय दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे। पत्र में यह भी बताया गया है कि इस मामले में आयोग ने भारत के अटॉर्नी जनरल से भी सलाह ली थी। अटॉर्नी जनरल ने भी यही राय दी है कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेकर ही राजीव कुमार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति करनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह सुरक्षा के मुद्दों पर भी गहरा असर डाल सकता है। यह आवश्यक है कि राज्य सरकार सही प्रक्रिया का पालन करे ताकि कानून व्यवस्था में कोई बाधा न आए।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है?
डीजीपी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजनी होती है, जिसके बाद यूपीएससी एक नाम को मंजूरी देता है।
यूपीएससी ने राज्य सरकार को क्या सलाह दी है?
यूपीएससी ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से आवश्यक अनुमति लेने की सलाह दी है ताकि राजीव कुमार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति की जा सके।
कब तक डीजीपी का कार्यकाल है?
मौजूदा डीजीपी राजीव कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने वाला है।
इस विवाद की जड़ क्या है?
इस विवाद की जड़ दिसंबर 2023 में मनोज मालवीय के सेवानिवृत्त होने से जुड़ी है, जिसके बाद उत्तराधिकारी की नियुक्ति में देरी हुई।
राष्ट्र प्रेस
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