11 अगस्त 2026
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सेबी के सुधारों से एफएंडओ में रिटेल निवेशकों का नुकसान वित्त वर्ष 26 में 18% घटकर ₹91,685 करोड़

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सेबी के सुधारों से एफएंडओ में रिटेल निवेशकों का नुकसान वित्त वर्ष 26 में 18% घटकर ₹91,685 करोड़

सारांश

सेबी के नवंबर 2024 से लागू नियामक सुधारों ने एफएंडओ बाज़ार की तस्वीर बदली — कुल नुकसान 18% घटा, निवेशक 20% कम हुए। लेकिन प्रति निवेशक औसत नुकसान बढ़ा, जो बताता है कि जोखिम पूरी तरह टला नहीं है।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 26 में रिटेल निवेशकों का एफएंडओ नुकसान 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 25 में ₹1,11,788 करोड़ था।
यूनिक रिटेल निवेशकों की संख्या 98.1 लाख से 20% घटकर 78.6 लाख हुई।
प्रति निवेशक औसत नुकसान ₹1,13,913 से बढ़कर ₹1,16,654 हो गया।
इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर ₹213 लाख करोड़ से घटकर ₹202 लाख करोड़ रहा।
एफएंडओ पर एसटीटी राजस्व ₹7,893 करोड़ से उछलकर ₹27,695 करोड़ पहुँचा।
यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 11 अगस्त 2026 को राज्यसभा में दी।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में लागू किए गए नियामक सुधारों के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2025-26 में रिटेल निवेशकों का कुल नुकसान 18 प्रतिशत घटकर ₹91,685 करोड़ रह गया, जो वित्त वर्ष 25 में ₹1,11,788 करोड़ था। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 11 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में संसद को दी।

मुख्य घटनाक्रम

नवंबर 2024 से लागू किए गए रेगुलेटरी बदलावों के बाद सेबी ने फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस (एफएंडओ) सेगमेंट में भाग लेने वाले यूनिक रिटेल निवेशकों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की। वित्त वर्ष 25 में यह संख्या 98.1 लाख थी, जो वित्त वर्ष 26 में लगभग 20 प्रतिशत घटकर 78.6 लाख रह गई। इसके साथ ही इक्विटी डेरिवेटिव्स में कुल टर्नओवर भी वित्त वर्ष 25 के ₹213 लाख करोड़ से घटकर वित्त वर्ष 26 में ₹202 लाख करोड़ हो गया।

सेबी ने कौन-से उपाय अपनाए

सेबी के सुधारात्मक कदमों में साप्ताहिक और मासिक इंडेक्स डेरिवेटिव्स उत्पादों का पुनर्गठन, इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट साइज़ की अनिवार्यता, ऑप्शंस की एक्सपायरी के दिनों में अधिक टेल-रिस्क कवरेज, खरीदारों से ऑप्शन प्रीमियम की अग्रिम वसूली, एक्सपायरी के दिनों में कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट की समाप्ति और पोज़ीशन लिमिट की इंट्राडे निगरानी शामिल थी। इसके अतिरिक्त, मई 2025 में बाज़ार नियामक ने एक्सचेंजों पर एक्सपायरी के दिनों को सुव्यवस्थित करने और एफएंडओ सेगमेंट में जोखिम निगरानी तथा प्रकटीकरण को और मज़बूत बनाने के लिए अतिरिक्त उपाय भी लागू किए।

प्रति निवेशक नुकसान में विरोधाभासी तस्वीर

गौरतलब है कि कुल नुकसान में कमी के बावजूद प्रति निवेशक औसत नुकसान में वृद्धि दर्ज हुई। वित्त वर्ष 25 में प्रति निवेशक औसत नुकसान ₹1,13,913 था, जो वित्त वर्ष 26 में बढ़कर ₹1,16,654 हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब सेबी के उपायों ने बाज़ार से कम अनुभवी या छोटे निवेशकों को बाहर किया, लेकिन जो बचे वे अपेक्षाकृत अधिक जोखिम उठाते रहे।

एसटीटी राजस्व में तीव्र उछाल

एफएंडओ ट्रेड्स पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) से सरकार की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। वित्त मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, एसटीटी से राजस्व एक साल पहले के ₹7,893 करोड़ से बढ़कर ₹27,695 करोड़ हो गया — यानी लगभग साढ़े तीन गुना की वृद्धि।

आगे क्या होगा

सेबी के इन सुधारों का दीर्घकालिक प्रभाव आने वाले वित्त वर्षों में स्पष्ट होगा। नियामक का ध्यान अब एफएंडओ बाज़ार में केवल जागरूक और सक्षम निवेशकों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रति निवेशक नुकसान में वृद्धि यह संकेत देती है कि बाज़ार में अभी भी संरचनात्मक जोखिम बने हुए हैं, जिन पर नज़र रखना ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि बाज़ार के मूल जोखिम को कम किया। एसटीटी राजस्व का साढ़े तीन गुना उछलना एक और सवाल खड़ा करता है: क्या सरकार की कमाई और निवेशक सुरक्षा के लक्ष्य एक-दूसरे से टकरा रहे हैं? सेबी के उपाय दिशा में सही हैं, लेकिन जब तक प्रति निवेशक नुकसान नहीं घटता, तब तक असली सुरक्षा का दावा अधूरा है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी के सुधारों के बाद वित्त वर्ष 26 में एफएंडओ नुकसान कितना कम हुआ?
वित्त वर्ष 26 में रिटेल निवेशकों का एफएंडओ नुकसान 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रह गया, जो वित्त वर्ष 25 में ₹1,11,788 करोड़ था। यह कमी नवंबर 2024 से लागू सेबी के नियामक बदलावों का परिणाम बताई गई है।
सेबी ने एफएंडओ में रिटेल निवेशकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए?
सेबी ने साप्ताहिक और मासिक इंडेक्स डेरिवेटिव्स का पुनर्गठन, बड़े कॉन्ट्रैक्ट साइज़, एक्सपायरी पर अधिक टेल-रिस्क कवरेज, ऑप्शन प्रीमियम की अग्रिम वसूली और पोज़ीशन लिमिट की इंट्राडे निगरानी जैसे उपाय लागू किए। मई 2025 में एक्सपायरी के दिनों को सुव्यवस्थित करने और जोखिम प्रकटीकरण को मज़बूत करने के लिए अतिरिक्त कदम भी उठाए गए।
क्या एफएंडओ में प्रति निवेशक नुकसान भी कम हुआ?
नहीं, कुल नुकसान घटने के बावजूद प्रति निवेशक औसत नुकसान वित्त वर्ष 25 के ₹1,13,913 से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में ₹1,16,654 हो गया। इसका कारण यह है कि सुधारों के बाद बाज़ार में भाग लेने वाले निवेशकों की संख्या घटी, लेकिन जो बचे उनका औसत नुकसान अधिक रहा।
एफएंडओ पर एसटीटी से सरकार की कमाई कितनी बढ़ी?
एफएंडओ ट्रेड्स पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) से राजस्व वित्त वर्ष 25 के ₹7,893 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में ₹27,695 करोड़ हो गया — यानी लगभग साढ़े तीन गुना की वृद्धि।
एफएंडओ में यूनिक रिटेल निवेशकों की संख्या में कितनी गिरावट आई?
वित्त वर्ष 25 में एफएंडओ सेगमेंट में यूनिक रिटेल निवेशकों की संख्या 98.1 लाख थी, जो वित्त वर्ष 26 में लगभग 20% घटकर 78.6 लाख रह गई। यह गिरावट सेबी के नियामक सुधारों के बाद ट्रेडिंग गतिविधि में आई समग्र कमी का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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