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गांधीनगर पल्स पोलियो अभियान 28 जून: 1,58,721 बच्चों को टीका, 746 बूथ और 3,167 स्वास्थ्यकर्मी तैनात

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गांधीनगर पल्स पोलियो अभियान 28 जून: 1,58,721 बच्चों को टीका, 746 बूथ और 3,167 स्वास्थ्यकर्मी तैनात

सारांश

गांधीनगर में 28 जून को राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत 1,58,721 बच्चों को टीका लगाया जाएगा। 746 बूथ, 103 मोबाइल टीमें और 427 घर-घर सर्वेक्षण दल — यह जिले का अब तक का सबसे व्यापक टीकाकरण तंत्र है।

मुख्य बातें

28 जून 2026 को गांधीनगर जिले में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा।
0 से 5 वर्ष आयु के 1,58,721 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की दो बूंदें पिलाने का लक्ष्य।
जिले में 746 टीकाकरण बूथ स्थापित किए गए हैं; 3,167 स्वास्थ्यकर्मी तैनात।
ईंट भट्टों व निर्माण स्थलों पर 103 मोबाइल टीमें और सार्वजनिक स्थानों पर 5 ट्रांजिट टीमें सक्रिय रहेंगी।
अभियान के दूसरे व तीसरे दिन 427 टीमें घर-घर सर्वेक्षण कर छूटे बच्चों को टीका लगाएंगी।

राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान के तहत गांधीनगर जिले में 28 जून 2026 को 0 से 5 वर्ष की आयु के 1,58,721 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की दो बूंदें पिलाई जाएंगी। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने के लिए 746 टीकाकरण बूथ, 103 मोबाइल टीमें और 3,167 स्वास्थ्यकर्मी तैनात किए हैं।

अभियान की रूपरेखा

गांधीनगर जिले में स्थापित 746 बूथों पर अभिभावक 28 जून को अपने बच्चों को पोलियो की बूंदें पिलवा सकेंगे। यह अभियान 'दो बूंद जिंदगी की' के राष्ट्रीय नारे के अनुरूप है, जो भारत को पोलियो-मुक्त बनाए रखने के दीर्घकालिक प्रयास का हिस्सा है।

गौरतलब है कि भारत को 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था, और तब से इस दर्जे को बनाए रखने के लिए नियमित टीकाकरण अभियान जारी हैं।

दूरदराज क्षेत्रों तक पहुँच

जिले के ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों और अन्य वंचित क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक पहुँचने के लिए 103 मोबाइल टीमें तैनात की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 5 ट्रांजिट टीमें यात्रा कर रहे बच्चों को टीका लगाने के लिए सक्रिय रहेंगी।

यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि प्रवासी मज़दूरों के बच्चे और घुमंतू परिवारों के बच्चे भी इस अभियान से वंचित न रहें — जो अक्सर सबसे कठिन-से-पहुँचने वाली आबादी होती है।

घर-घर सर्वेक्षण की व्यवस्था

अभियान के दूसरे और तीसरे दिन, 427 समर्पित टीमें जिले भर में घर-घर जाकर उन बच्चों की पहचान करेंगी जो बूथ-आधारित कार्यक्रम से छूट गए हों। यह फॉलो-अप तंत्र सुनिश्चित करता है कि कोई भी पात्र बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।

अभिभावकों से अपील

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे 28 जून को अपने 0 से 5 वर्ष के सभी बच्चों को निकटतम पोलियो बूथ पर अवश्य ले जाएं। अधिकारियों के अनुसार, पोलियो के विरुद्ध सुरक्षा के लिए नियमित टीकाकरण अनिवार्य है, विशेषकर छोटे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए।

आने वाले दिनों में घर-घर सर्वेक्षण के ज़रिए छूटे हुए बच्चों तक पहुँचने की कोशिश की जाएगी, जिससे गांधीनगर जिले में पूर्ण कवरेज का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

103 मोबाइल टीमें, 427 घर-घर सर्वेक्षण दल — लेकिन असली कसौटी कवरेज की गुणवत्ता है, न सिर्फ मात्रा। भारत 2014 से पोलियो-मुक्त है, और यह दर्जा बनाए रखने के लिए प्रवासी मज़दूरों व निर्माण स्थलों के बच्चों तक पहुँचना सबसे बड़ी चुनौती रहती है — जिसे मोबाइल टीमों के ज़रिए संबोधित करने की कोशिश की गई है। यह देखना ज़रूरी होगा कि अभियान के बाद प्रशासन कितने बच्चों तक वास्तव में पहुँचा, यह पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक किया जाए।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गांधीनगर पल्स पोलियो अभियान 2026 कब और कहाँ होगा?
यह अभियान 28 जून 2026 को गांधीनगर जिले में चलाया जाएगा। जिले भर में 746 टीकाकरण बूथ स्थापित किए गए हैं जहाँ अभिभावक अपने बच्चों को पोलियो की बूंदें पिलवा सकते हैं।
इस अभियान में कितने बच्चों को टीका लगाया जाएगा?
गांधीनगर जिले में 0 से 5 वर्ष की आयु के 1,58,721 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की दो बूंदें पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जो बच्चे 28 जून को बूथ पर नहीं पहुँच पाएंगे, उनके लिए क्या व्यवस्था है?
अभियान के दूसरे और तीसरे दिन 427 समर्पित टीमें घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगी और छूटे हुए बच्चों की पहचान कर उन्हें टीका लगाएंगी। इससे पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी।
दूरदराज और वंचित क्षेत्रों में बच्चों तक कैसे पहुँचा जाएगा?
ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों और अन्य वंचित स्थानों पर 103 मोबाइल टीमें तैनात की जाएंगी। इसके अलावा बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर 5 ट्रांजिट टीमें यात्रा कर रहे बच्चों को टीका लगाएंगी।
पल्स पोलियो अभियान क्यों ज़रूरी है?
भारत को 2014 में WHO द्वारा पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था। यह दर्जा बनाए रखने के लिए नियमित टीकाकरण अभियान आवश्यक हैं, क्योंकि पोलियो वायरस का खतरा पड़ोसी देशों में अभी भी बना हुआ है और छोटे बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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