डायरिया से बचाव: रोज़मर्रा की ये 5 आदतें बच्चों और परिवार को रखेंगी सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
डायरिया (दस्त) भले ही एक सामान्य बीमारी लगे, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार समय पर ध्यान न देने पर यह छोटे बच्चों के लिए गंभीर और जानलेवा स्थिति में बदल सकती है। अच्छी बात यह है कि रोज़मर्रा की कुछ सरल स्वच्छता आदतें अपनाकर पूरे परिवार को इस संक्रमण से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
हाथों की सफाई — सबसे पहली और ज़रूरी आदत
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि गंदे हाथ डायरिया फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम हैं। खाना खाने या बच्चों को खिलाने से पहले, और शौचालय के उपयोग के बाद, साबुन और साफ पानी से हाथ धोना अनिवार्य है। हाथों पर मौजूद कीटाणु सीधे भोजन और पानी तक पहुँचकर संक्रमण का कारण बनते हैं। यह ऐसे समय में और भी ज़रूरी हो जाता है जब मानसून के मौसम में जलजनित बीमारियाँ तेज़ी से फैलती हैं।
सुरक्षित पेयजल — संक्रमण रोकने की दूसरी कड़ी
घर में पीने का पानी हमेशा साफ और ढके हुए बर्तन में रखें। खुले बर्तन में रखा पानी धूल, मक्खियों और अन्य कीटाणुओं के संपर्क में आ जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बच्चों को केवल शुद्ध और सुरक्षित पानी ही पिलाएँ — उबला हुआ या फ़िल्टर किया हुआ पानी सबसे उपयुक्त विकल्प है।
स्तनपान और पूरक आहार — बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता की नींव
जन्म के बाद पहले 6 महीने तक शिशु को केवल माँ का दूध देना चाहिए। माँ के दूध में प्राकृतिक एंटीबॉडी होती हैं जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाती हैं और डायरिया सहित कई संक्रमणों से सुरक्षा देती हैं। 6 महीने के बाद उम्र के अनुसार पौष्टिक पूरक आहार शुरू करना चाहिए। गौरतलब है कि कुपोषित बच्चों में डायरिया से गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक होता है।
घर और आसपास की स्वच्छता — बीमारी की जड़ काटें
शौच के लिए हमेशा शौचालय का उपयोग करें और बच्चों में भी यह आदत विकसित करें। घर के आसपास नालियों और जमा गंदगी की नियमित सफाई करें। गंदा वातावरण न केवल डायरिया, बल्कि टाइफाइड और हेपेटाइटिस-A जैसी अन्य बीमारियों को भी न्योता देता है।
डायरिया हो जाए तो क्या करें
यदि बच्चे या परिवार के किसी सदस्य को डायरिया हो जाए, तो सबसे पहले शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) न होने दें। इसके लिए ओआरएस (ORS) और जिंक दिया जा सकता है। स्थिति में सुधार न होने पर तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र या आयुष्मान आरोग्य मंदिर में ले जाएँ। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती 24-48 घंटों में सही देखभाल गंभीर जटिलताओं को रोक सकती है।