मानसून में संक्रमण से बचाव: आयुष मंत्रालय की एडवाइजरी में बताई ये 6 ज़रूरी आदतें
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने 27 जुलाई 2026 को मानसून के दौरान मौसमी संक्रमणों से बचाव के लिए एक विशेष स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की, जिसमें रोज़मर्रा की स्वच्छता आदतों को सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बताया गया। नई दिल्ली से जारी इस एडवाइजरी में मंत्रालय ने कहा कि उमस और नमी भरे इस मौसम में छोटी-छोटी सावधानियाँ बड़े संक्रमणों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
मंत्रालय की एडवाइजरी: मुख्य बातें
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'स्वस्थ मानसून (बरसात) की शुरुआत अच्छी स्वच्छता की आदतों से होती है। रोज़मर्रा की छोटी-छोटी सावधानियाँ आपको मौसम में होने वाले संक्रमणों से बचाने और आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में बड़ी मदद कर सकती हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय है और अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के मरीज़ों की संख्या बढ़ रही है।
सही तरीके से हाथ धोना — 'सुमन-के' विधि
एडवाइजरी में सबसे पहले नियमित और सही तरीके से हाथ धोने पर ज़ोर दिया गया। मंत्रालय ने 'सुमन-के' विधि का उल्लेख किया, जिसमें छह चरण शामिल हैं — एस (सीधा), यू (उल्टा), एम (मुट्ठी), ए (अंगूठा), एन (नाखून) और के (कलाई)। इस पद्धति से हाथ धोने पर कीटाणु पूरी तरह नष्ट होते हैं और संक्रमण का जोखिम काफी कम हो जाता है।
गीले कपड़े और फंगल संक्रमण से बचाव
बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदल लेना ज़रूरी है। मंत्रालय के अनुसार, त्वचा पर लंबे समय तक नमी बने रहने से खुजली, रैशेज़ और फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह, गीले जूते और मोज़े लंबे समय तक पहने रहने से पैरों में फंगल संक्रमण हो सकता है — इसलिए प्रतिदिन साफ और सूखे मोज़े पहनने की सलाह दी गई है।
आसपास की सफ़ाई और मच्छरों पर नियंत्रण
मंत्रालय ने घर और आसपास के परिवेश में पानी जमा न होने देने की सख्त हिदायत दी है, क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का मुख्य स्रोत बनता है। साथ ही, कमरों में पर्याप्त हवा के आवागमन को बनाए रखने पर भी बल दिया गया ताकि नमी और उमस से उत्पन्न होने वाले संक्रमणों को रोका जा सके। गौरतलब है कि डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छर-जनित बीमारियाँ मानसून में सबसे अधिक फैलती हैं।
डॉक्टर की सलाह कब लें
एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि यदि बारिश के मौसम में स्किन इन्फेक्शन, उल्टी या तेज़ बुखार जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। स्व-चिकित्सा (Self-medication) से सख्त परहेज़ करने की सलाह दी गई है, क्योंकि बिना जाँच के ली गई दवाएँ स्थिति को और जटिल बना सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में सही समय पर चिकित्सीय सहायता लेना गंभीर बीमारियों को शुरुआत में ही रोक सकता है।