वायु प्रदूषण से सांस की सेहत को खतरा: आयुष मंत्रालय ने बताए बचाव के आसान उपाय
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने 19 अगस्त 2026 को चेताया कि हवा में बढ़ता धूल, धुआं और पार्टिकुलेट प्रदूषण सांस की गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है — खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा जैसी पूर्व-मौजूद बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए। मंत्रालय के अनुसार, कुछ सरल दैनिक आदतें और पारंपरिक आयुर्वेदिक उपाय इस मौसम में श्वसन स्वास्थ्य की रक्षा में सहायक हो सकते हैं।
प्रदूषित हवा से क्या-क्या खतरे हैं
आयुष मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि हवा में मौजूद बारीक कण सांस के साथ शरीर के भीतर पहुँच सकते हैं। इससे खांसी, गले में खराश, नाक बंद होना, सांस लेने में कठिनाई और घरघराहट जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं। मंत्रालय के अनुसार, ENSO से जुड़ी सूखे की परिस्थितियाँ कुछ क्षेत्रों में जंगल की आग और धूल भरी आँधियों का जोखिम भी बढ़ा सकती हैं, जिससे वायु गुणवत्ता और बिगड़ सकती है।
जलयोजन और पारंपरिक घरेलू उपाय
मंत्रालय ने सलाह दी है कि सांस और गले को राहत देने के लिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना ज़रूरी है। बहुत ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी या हर्बल इन्फ्यूजन अधिक लाभकारी हो सकता है, क्योंकि इससे गले की सूखापन और खराश में राहत मिलती है।
हल्की खांसी या जुकाम में सोंठ (सूखी अदरक) को गुड़ के साथ, हल्दी वाला दूध और तुलसी के रस में शहद मिलाकर लेना जैसे पारंपरिक उपाय आज़माए जा सकते हैं। हालाँकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये उपाय केवल लक्षणों में राहत के लिए हैं — किसी गंभीर बीमारी का विकल्प नहीं।
भाप और गरारे से मिल सकती है राहत
नाक बंद होने या गले में खराश की स्थिति में भाप लेना कुछ लोगों को आराम दे सकता है। इसी तरह गुनगुने नमक या हल्दी वाले पानी से गरारे करने से गले की परेशानी कम हो सकती है। मंत्रालय ने विशेष रूप से सावधान किया कि बच्चों के मामले में बहुत गर्म पानी से जलने का खतरा रहता है, इसलिए सतर्कता ज़रूरी है।
योग और प्राणायाम की भूमिका
श्वसन तंत्र को सक्रिय और स्वस्थ रखने के लिए भुजंगासन और गोमुखासन जैसे योगासन अपनाए जा सकते हैं। इनके साथ नाड़ी शोधन और भ्रामरी प्राणायाम का नियमित अभ्यास भी श्वसन क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। यह ऐसे समय में अहम है जब शहरी वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार चिंताजनक स्तर पर बना हुआ है।
डॉक्टर से कब लें सलाह
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यदि सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, लगातार खांसी, सीने में दर्द, तेज घरघराहट या सांस फूलने जैसे गंभीर लक्षण दिखें, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें — तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। गौरतलब है कि प्रदूषण से जुड़ी श्वसन बीमारियाँ भारत में हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं, और समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप जटिलताओं को रोक सकता है।