वर्ल्ड हैंड हाइजीन डे 2025: 'सुमंक' विधि से करें हाथ धोना, NHM का 6-स्टेप फॉर्मूला संक्रमण से बचाएगा
सारांश
मुख्य बातें
वर्ल्ड हैंड हाइजीन डे (5 मई) के अवसर पर नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने 'सुमंक' विधि को अपनाने की अपील की है — यह हाथ धोने की एक 6-स्टेप प्रक्रिया है जो बैक्टीरिया, वायरस और अन्य रोगजनकों को प्रभावी ढंग से हटाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सही तरीके से हाथ धोने की यह आदत फ्लू, कोविड-19, डायरिया और पेट के संक्रमण जैसी बीमारियों से बचाव का सबसे सस्ता और असरदार उपाय है।
क्या है 'सुमंक' विधि
NHM के 'स्वच्छ हाथ, सुरक्षित जीवन' अभियान के अंतर्गत प्रचारित 'सुमंक' दरअसल अंग्रेज़ी के SUMANK अक्षरों से बना एक संक्षिप्त नाम है, जो हाथ धोने के 6 चरणों को याद रखने में मदद करता है। यह विधि खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी बताई गई है।
सुमंक के 6 चरण
एस (सीधा): सबसे पहले दोनों हथेलियों पर साबुन लगाकर उन्हें सीधे रखते हुए अच्छी तरह रगड़ें।
यू (उल्टा): हाथों को पलटकर दोनों तरफ से भी भलीभाँति रगड़ें।
एम (मुट्ठी): मुट्ठी बंद करके हाथों को साबुन से अच्छी तरह घिसें।
ए (अंगूठा): अंगूठों को मुट्ठी में लेकर दोनों तरफ से रगड़ें।
एन (नाखून): नाखूनों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें, क्योंकि यहाँ सबसे अधिक गंदगी और बैक्टीरिया छिपे रहते हैं।
के (कलाई): अंत में दोनों कलाइयों को भी रगड़कर साफ करें।
कितने समय तक धोएँ हाथ
यूनिसेफ के अनुसार, इन 6 चरणों को पूरा करने में कम से कम 40 सेकंड तक साबुन से हाथ धोने चाहिए। इसके बाद साफ बहते पानी से हाथ धोकर किसी स्वच्छ तौलिए या एयर ड्रायर से सुखा लेना चाहिए। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के बाद से पर्सनल हाइजीन को लेकर जागरूकता बढ़ी है, फिर भी संक्रमण से फैलने वाली बीमारियाँ लगातार चुनौती बनी हुई हैं।
किन परिस्थितियों में धोएँ हाथ
विशेषज्ञों का सुझाव है कि खाना बनाने से पहले और बाद में, खाना खाने से पहले, बाथरूम इस्तेमाल करने के बाद, बाहर से घर लौटने पर और छोटे बच्चे को छूने से पहले व बाद में सुमंक विधि अवश्य अपनाएँ। बढ़ता प्रदूषण और मौसम में बदलाव इन अवसरों पर हाथ धोने की आदत को और भी ज़रूरी बना देते हैं।
किसे होगा सबसे अधिक फायदा
NHM के अनुसार, सुमंक विधि खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमज़ोर स्वास्थ्य वाले लोगों के लिए सर्वाधिक उपयोगी है। इसके अलावा, अस्पतालों में संक्रमण कम करने और रक्त प्रवाह सुधारने में भी यह विधि मददगार साबित होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह छोटी-सी आदत पूरे परिवार की सेहत की रक्षा करने में सक्षम है।