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क्या सेहत की अनदेखी से पेट और सांस की समस्याएं बढ़ रही हैं? अपान वायु मुद्रा से मिलेगी राहत

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क्या सेहत की अनदेखी से पेट और सांस की समस्याएं बढ़ रही हैं? अपान वायु मुद्रा से मिलेगी राहत

सारांश

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सेहत की अनदेखी से पेट और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अपान वायु मुद्रा अपनाने से इन समस्याओं में राहत मिल सकती है। जानिए कैसे यह मुद्रा आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

अपान वायु मुद्रा पाचन समस्याओं को दूर करने में सहायक है।
यह हिचकी को रोकने में मदद करती है।
इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से गैस और कब्ज़ में राहत मिलती है।
यह मानसिक तनाव को कम करती है।
सही तरीके से सांस लेने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है।

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में स्वास्थ्य एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है। गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी का सीधा असर हमारे पाचन और सांस संबंधी समस्याओं पर पड़ता है। गैस, अपच, पेट फूलना और बार-बार हिचकी आना अब आम समस्या बन गई है।

हिचकी आना हमारे शरीर की एक स्वाभाविक क्रिया है, लेकिन जब यह बार-बार या लंबे समय तक होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, हिचकी तब आती है जब डायफ्राम अचानक सिकुड़ जाता है और सांस लेने की प्रक्रिया में रुकावट पैदा होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह पाचन तंत्र का ठीक से काम न करना है। बहुत ज्यादा खाना, जल्दी-जल्दी भोजन करना, तला-भुना या भारी भोजन, शराब का अधिक सेवन, तनाव, घबराहट और कभी-कभी ज्यादा उत्साह भी हिचकी को बढ़ा देता है।

योग शास्त्रों में शरीर के अंदर पांच प्रकार की वायु का वर्णन किया गया है, जिनमें अपान वायु का संबंध पेट के निचले हिस्से से होता है। यह वायु मल-मूत्र त्याग, गैस निकालने और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने का काम करती है। जब अपान वायु असंतुलित हो जाती है, तो गैस, कब्ज़, अपच और हिचकी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। अपान वायु मुद्रा इसी वायु को संतुलित करने के लिए बनाई गई है। यह मुद्रा शरीर की अंदरूनी ऊर्जा को सही दिशा देती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है।

अपान वायु मुद्रा को करना बेहद सरल है। इसे जमीन पर आसन लगाकर या कुर्सी पर सीधे बैठकर किया जा सकता है। सबसे पहले रीढ़ की हड्डी को सीधा रखा जाता है ताकि शरीर में ऊर्जा का प्रवाह ठीक से हो सके। आंखें बंद कर कुछ देर गहरी और धीमी सांस ली जाती है। इसके बाद हाथों की उंगलियों से मुद्रा बनाई जाती है। तर्जनी उंगली को मोड़ लिया जाता है, मध्य और अनामिका उंगली को अंगूठे से मिलाया जाता है और छोटी उंगली को सीधा रखा जाता है। इस स्थिति में शांत मन से सांस पर ध्यान दिया जाता है।

छोटी-सी दिखने वाली हिचकी जब रुकने का नाम नहीं लेती, तो यह व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर देती है। ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए योग और आयुर्वेद सबसे सुरक्षित तरीका हैं। आयुष मंत्रालय के मुताबिक, अपान वायु मुद्रा हिचकी और पाचन से जुड़ी दिक्कतों में बेहद लाभकारी है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, जब यह मुद्रा की जाती है, तो हाथों की उंगलियों के जरिए शरीर के विशेष ऊर्जा बिंदु सक्रिय होते हैं। इससे पेट और छाती के बीच संतुलन बनता है और डायफ्राम रिलेक्स होने लगता है। यही कारण है कि हिचकी धीरे-धीरे अपने आप रुक जाती है। यह मुद्रा पेट में फंसी गैस को बाहर निकालने में मदद करती है और पाचन क्रिया को सुधारती है।

अपान वायु मुद्रा के फायदे केवल हिचकी तक सीमित नहीं हैं। नियमित अभ्यास से पेट संबंधी रोगों में राहत मिलती है, जैसे गैस, एसिडिटी और कब्ज। यह मुद्रा हृदय के लिए भी लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि इससे रक्त संचार बेहतर होता है। मानसिक तनाव कम होता है और मन शांत रहता है। सही तरीके से सांस लेते हुए यह मुद्रा करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और शरीर खुद को बीमारियों से बचाने में सक्षम बनता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, छोटी-छोटी समस्याएं जैसे गैस और हिचकी को नजरअंदाज करना सही नहीं है। योग और आयुर्वेद का सही उपयोग कर हम अपने स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अपान वायु मुद्रा क्या है?
अपान वायु मुद्रा एक योग मुद्रा है जो पेट की समस्याओं को संतुलित करने में मदद करती है।
इस मुद्रा का अभ्यास कैसे करें?
इसे जमीन पर बैठकर या कुर्सी पर बैठकर किया जा सकता है।
क्या अपान वायु मुद्रा हिचकी को रोक सकती है?
हां, यह मुद्रा हिचकी को रोकने और पाचन को सुधारने में सहायक है।
क्या इस मुद्रा के अन्य लाभ हैं?
यह मुद्रा पेट की गैस, कब्ज और मानसिक तनाव को कम करने में भी मदद करती है।
क्या कोई विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?
मुद्रा करते समय अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और शांत मन से ध्यान केंद्रित करें।
राष्ट्र प्रेस
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