अपान वायु मुद्रा: पीरियड्स के दर्द, ऐंठन और थकान से पाएं प्राकृतिक राहत
सारांश
Key Takeaways
- अपान वायु मुद्रा एक प्राचीन योग हस्त मुद्रा है जो पीरियड्स के दर्द और ऐंठन में प्राकृतिक राहत देती है।
- इस मुद्रा में तर्जनी, अनामिका, मध्यमा और अंगूठे को एक विशेष क्रम में जोड़ा जाता है, जबकि कनिष्ठा (छोटी उंगली) सीधी रखी जाती है।
- यह मुद्रा रक्त संचार को बेहतर बनाकर मांसपेशियों का तनाव कम करती है और मानसिक शांति भी प्रदान करती है।
- इसका अभ्यास खाने के तुरंत बाद नहीं करना चाहिए और शुरुआत में केवल ५ से १० मिनट तक सीमित रखें।
- गैस, अपच और पेट की भारीपन जैसी समस्याओं में भी यह मुद्रा फायदेमंद है।
- किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सक की सलाह के बिना इसका अभ्यास न करें।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अपान वायु मुद्रा एक प्राचीन योग हस्त मुद्रा है जो मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान होने वाले पेट दर्द, ऐंठन और थकान से प्राकृतिक राहत दिलाने में सहायक मानी जाती है। यह मुद्रा शरीर की आंतरिक ऊर्जा को संतुलित करती है और बिना दवाइयों के महिलाओं को मासिक धर्म की तकलीफ से निजात दिला सकती है।
पीरियड्स में क्यों होती है इतनी तकलीफ?
अधिकांश महिलाओं के लिए मासिक धर्म का समय शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण होता है। इस दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द, कमर में भारीपन, मांसपेशियों में खिंचाव और अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं सामान्य हैं।
कई बार यह तकलीफ इतनी बढ़ जाती है कि महिलाएं अपनी दैनिक दिनचर्या भी सुचारु रूप से नहीं निभा पातीं। बार-बार दर्दनिवारक दवाइयों का सेवन दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं माना जाता।
अपान वायु मुद्रा क्या है और यह कैसे काम करती है?
अपान वायु मुद्रा को 'हृदय मुद्रा' भी कहा जाता है। योग शास्त्र के अनुसार, यह मुद्रा शरीर में वायु तत्व और अपान ऊर्जा को नियंत्रित करती है, जो पेट के निचले हिस्से की गतिविधियों को संचालित करती है।
जब उंगलियों को एक विशेष क्रम में जोड़कर यह मुद्रा की जाती है, तो रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) बेहतर होता है। इससे गर्भाशय की मांसपेशियों का तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और दर्द व ऐंठन में राहत मिलती है।
अपान वायु मुद्रा करने का सही तरीका
इस मुद्रा का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले सुखासन (आरामदायक बैठने की मुद्रा) में बैठ जाएं। दोनों हाथों को सीधा करके घुटनों पर रखें, हथेलियां आकाश की दिशा में होनी चाहिए।
अब तर्जनी उंगली (Index Finger) को मोड़कर अंगूठे की जड़ से सटाएं। इसके बाद अनामिका (Ring Finger) और मध्यमा (Middle Finger) को मोड़कर अंगूठे की नोक से दबाएं। कनिष्ठा (छोटी उंगली) बाहर की ओर सीधी रहे।
दोनों आंखें बंद रखें और गहरी, शांत सांसें लेते हुए १५ से २० मिनट तक इस मुद्रा में बैठें। कुछ देर बाद धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में वापस आ जाएं।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर
मासिक धर्म के दौरान कई महिलाओं को चिड़चिड़ापन, बेचैनी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। अपान वायु मुद्रा का नियमित अभ्यास मन को शांत करने और मूड को बेहतर बनाने में भी सहायक है।
इसके अतिरिक्त यह मुद्रा गैस, अपच और पेट की भारीपन जैसी पाचन संबंधी समस्याओं में भी राहत देती है। शरीर में ऊर्जा का स्तर संतुलित रहने से दिनभर की थकान भी कम महसूस होती है।
सावधानियां और जरूरी बातें
इस मुद्रा का अभ्यास खाना खाने के तुरंत बाद नहीं करना चाहिए। शुरुआत में केवल ५ से १० मिनट के लिए अभ्यास करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
यदि शरीर में कोई गंभीर बीमारी, हृदय संबंधी समस्या या अन्य स्वास्थ्य समस्या हो, तो बिना चिकित्सक की सलाह के इसका अभ्यास न करें। योग विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित और सही तरीके से किया गया अभ्यास ही अधिकतम लाभ देता है।
जैसे-जैसे महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रही हैं, योग और प्राकृतिक उपचारों की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में इस तरह की पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान के साथ जोड़कर और अधिक शोध किए जाने की उम्मीद है।