2 अगस्त 2026
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राजस्थान में 'स्टॉप डायरिया अभियान' शुरू: बच्चों को मिलेंगे ओआरएस पैकेट और जिंक टैबलेट, 31 जुलाई तक चलेगा

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राजस्थान में 'स्टॉप डायरिया अभियान' शुरू: बच्चों को मिलेंगे ओआरएस पैकेट और जिंक टैबलेट, 31 जुलाई तक चलेगा

सारांश

राजस्थान सरकार ने 16 जून से 31 जुलाई तक 'स्टॉप डायरिया अभियान' शुरू किया है। आशा कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी केंद्रों के ज़रिये बच्चों को ओआरएस और जिंक टैबलेट दी जाएंगी। राज्य में डायरिया से बाल मृत्यु दर 6.1% से घटकर 5.8% पर आई, जो राष्ट्रीय औसत 8% से कम है।

मुख्य बातें

राजस्थान सरकार ने 16 जून 2026 से 'स्टॉप डायरिया अभियान' शुरू किया, जो 31 जुलाई 2026 तक चलेगा।
प्रत्येक पात्र बच्चे को ओआरएस के 2 पैकेट और लगभग 15 दिनों की जिंक टैबलेट निःशुल्क दी जाएंगी।
वितरण आशा कार्यकर्ताओं , नर्सों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों के माध्यम से होगा।
राजस्थान में डायरिया से बाल मृत्यु दर 6.1% से घटकर 5.8% हुई; राष्ट्रीय औसत 8% है।
कोटा और बीकानेर में मातृ मृत्यु मामलों की जाँच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित; रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।

राजस्थान सरकार ने 16 जून 2026 से राज्यव्यापी 'स्टॉप डायरिया अभियान' की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य गर्मी और मानसून के मौसम में बच्चों को डायरिया से होने वाले खतरे को कम करना है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह के अनुसार यह अभियान 31 जुलाई 2026 तक चलेगा और इसके तहत बच्चों को ओआरएस के पैकेट तथा जिंक टैबलेट निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।

अभियान में क्या शामिल है

आशा कार्यकर्ताओं, नर्सों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से प्रत्येक पात्र बच्चे को ओआरएस के दो पैकेट और लगभग 15 दिनों की जिंक टैबलेट पहुँचाई जाएंगी। इसके साथ-साथ अभिभावकों को ओआरएस के सही उपयोग और डिहाइड्रेशन की पहचान के बारे में जागरूक किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा, 'यह हमारे बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण अभियान है। मई-जून की गर्मी और मानसून के दौरान डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ओआरएस और जिंक की दवाएं बच्चों के लिए जीवनरक्षक साबित होती हैं।'

डायरिया फैलने के कारण और स्वच्छता पर जोर

मंत्री ने बताया कि गर्मी और मानसून के मौसम में दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान कई वायरस और संक्रामक रोगों के वाहक बन जाते हैं। उन्होंने खुले में शौच को भी संक्रमण फैलने का एक प्रमुख कारण बताया और बच्चों में स्वच्छता की आदतें विकसित करने पर विशेष बल दिया।

गौरतलब है कि राजस्थान जैसे गर्म और शुष्क प्रदेश में गर्मियों के बाद मानसून की शुरुआत के साथ जल-जनित बीमारियों का प्रकोप हर वर्ष बढ़ता है। यह अभियान उसी मौसमी जोखिम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

राजस्थान में बाल मृत्यु दर में सुधार

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार राजस्थान में डायरिया से प्रभावित बच्चों की मृत्यु दर 6.1 प्रतिशत से घटकर 5.8 प्रतिशत पर आ गई है, जबकि इस मामले में राष्ट्रीय औसत लगभग 8 प्रतिशत है। उन्होंने इसे अभियान की सफलता का संकेत बताया।

कोटा-बीकानेर में मातृ मृत्यु मामलों पर सरकार की प्रतिक्रिया

कोटा और बीकानेर में सामने आए मातृ मृत्यु के मामलों पर गजेंद्र सिंह ने कहा कि इन मामलों की जाँच के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने कहा, 'किसी भी मरीज की मृत्यु गंभीर विषय है। विशेषज्ञों की राय और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर ही हम अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचेंगे और जनता के सामने वास्तविक कारणों को रखेंगे।'

उन्होंने बताया कि मौतों के पीछे एक से अधिक कारण हो सकते हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के वरिष्ठ चिकित्सकों को सभी मेडिकल रिपोर्ट, आँकड़ों और तथ्यों का अध्ययन करने के लिए बुलाया गया है।

राजनीतिक विवाद: राहुल गांधी के कोटा दौरे पर प्रतिक्रिया

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रस्तावित कोटा दौरे पर पूछे गए सवाल के जवाब में गजेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह छोटे मामलों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि मातृ मृत्यु जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक दलों को सहयोगात्मक रुख अपनाना चाहिए। राज्य सरकार का कहना है कि जाँच प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीनी वितरण की होगी — विशेषकर उन दूरदराज़ के इलाकों में जहाँ आशा कार्यकर्ताओं की पहुँच सीमित है। राज्य की मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है, पर 5.8% का आँकड़ा अभी भी हर सौ में छह बच्चों की जान जाने का संकेत देता है — जो संतोष का नहीं, तत्परता का विषय है। कोटा-बीकानेर के मातृ मृत्यु मामलों पर सरकार की 'विशेषज्ञ समिति' वाली प्रतिक्रिया प्रक्रियागत तो है, लेकिन जनता को समयबद्ध और सार्वजनिक जवाबदेही की ज़रूरत है, न केवल आश्वासन की।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान का 'स्टॉप डायरिया अभियान' क्या है?
यह राजस्थान सरकार द्वारा 16 जून 2026 से शुरू किया गया राज्यव्यापी स्वास्थ्य अभियान है, जो 31 जुलाई 2026 तक चलेगा। इसके तहत बच्चों को ओआरएस के पैकेट और जिंक टैबलेट निःशुल्क दी जाएंगी ताकि डायरिया और डिहाइड्रेशन से होने वाली मौतों को रोका जा सके।
अभियान के तहत बच्चों को क्या-क्या मिलेगा?
प्रत्येक पात्र बच्चे को ओआरएस के दो पैकेट और लगभग 15 दिनों की जिंक टैबलेट दी जाएंगी। आशा कार्यकर्ताओं, नर्सों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों के माध्यम से यह सामग्री घर-घर पहुँचाई जाएगी।
राजस्थान में डायरिया से बाल मृत्यु दर कितनी है?
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह के अनुसार राजस्थान में यह दर 6.1% से घटकर 5.8% हो गई है। यह राष्ट्रीय औसत लगभग 8% से बेहतर है, हालाँकि सुधार की और गुंजाइश बनी हुई है।
कोटा और बीकानेर में मातृ मृत्यु मामलों पर सरकार क्या कर रही है?
सरकार ने इन मामलों की जाँच के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा सभी मेडिकल रिपोर्ट और तथ्यों का अध्ययन किया जाएगा और रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
डायरिया का खतरा गर्मी और मानसून में क्यों बढ़ जाता है?
इस मौसम में दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान कई वायरस और संक्रामक रोगों के वाहक बन जाते हैं। खुले में शौच भी संक्रमण फैलने का एक प्रमुख कारण है, जिस पर अभियान में विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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