गुजरात डीवर्मिंग अभियान: 1.84 करोड़ बच्चों को दवा देने का लक्ष्य, गांधीनगर में राज्य-स्तरीय कार्यक्रम
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने राष्ट्रीय डीवर्मिंग दिवस के अवसर पर 10 अगस्त 2026 को राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की, जिसके तहत 1 से 19 वर्ष की आयु के 1.84 करोड़ से अधिक बच्चों और किशोरों को डीवर्मिंग की दवा दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पेट के कीड़ों (सॉइल-ट्रांसमिटेड हेल्मिंथ्स) से होने वाले एनीमिया यानी खून की कमी को रोकना है।
राज्य-स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन
अभियान का राज्य-स्तरीय शुभारंभ गांधीनगर के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में हुआ। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर स्कूली बच्चों को डीवर्मिंग की गोलियाँ वितरित कीं। कार्यक्रम में गांधीनगर की मेयर मीरा पटेल, चिल्ड्रन्स यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जोशी, स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. नयन जानी और सूचना विभाग के उपनिदेशक डॉ. शैलेश परमार भी उपस्थित रहे।
मंत्री का संदेश और बच्चों से संवाद
मंत्री पानशेरिया ने उपस्थित छात्रों से सीधा संवाद किया और उन्हें दैनिक जीवन में स्वच्छता बनाए रखने, अच्छी आदतें अपनाने तथा माता-पिता का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्कूल परिसर में एक पौधा भी लगाया, जो पर्यावरण जागरूकता का प्रतीक रहा।
स्वास्थ्य विभाग की रणनीति
स्वास्थ्य आयुक्त (ग्रामीण) डॉ. रतनकंवर गढ़वी चरण ने बताया कि यह अभियान 1 से 19 वर्ष की आयु के बच्चों में पेट के कीड़ों से उत्पन्न एनीमिया को रोकने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समन्वित प्रयासों से यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि राज्य का कोई भी बच्चा इस दवा से वंचित न रह जाए।
पृष्ठभूमि: सूरत डॉक्टर मामले की जाँच
यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ जब मंत्री पानशेरिया ने एक दिन पहले, 9 अगस्त को, सूरत न्यू सिविल हॉस्पिटल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश दिए थे। अधिकारियों को रैगिंग, मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न अथवा लापरवाही की संभावना की जाँच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। गांधीनगर में चिकित्सा शिक्षा के अतिरिक्त निदेशक की सीधी निगरानी में सिविल हॉस्पिटल के डीन और सुपरिटेंडेंट संयुक्त रूप से जाँच कर रहे हैं और साथी छात्रों व रेजिडेंट डॉक्टरों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया था कि दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
आगे की राह
गौरतलब है कि राष्ट्रीय डीवर्मिंग दिवस भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एक केंद्रीय पहल है, जो हर वर्ष राज्यों के सहयोग से लागू की जाती है। गुजरात में इस बार के अभियान का व्यापक लक्ष्य — 1.84 करोड़ से अधिक लाभार्थी — यह दर्शाता है कि राज्य बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, डीवर्मिंग से बच्चों की पोषण-अवशोषण क्षमता बेहतर होती है और स्कूल में उपस्थिति व एकाग्रता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।