जमुई पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले 120 सोशल मीडिया अकाउंट पर बिहार सरकार की कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार ने जमुई छेड़छाड़ मामले में पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाले 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की है। जनता दल (युनाइटेड) [JDU] के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने 23 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी, और स्पष्ट किया कि वीडियो बनाने वालों, उसे प्रसारित करने वालों और प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित करने वालों — सभी के खिलाफ गहन जाँच जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
रंजन ने बताया कि जमुई में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और शेष 2 आरोपियों को भी जल्द हिरासत में लिए जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस ने यह साबित कर दिया है कि अपराधियों को कड़े नतीजों का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'अपराधी की कोई जाति नहीं होती।' रंजन ने इस पर कहा कि आँकड़ों के आधार पर जाँच की जाए तो आपराधिक मामलों में गिरफ्तारियों का जाति या धर्म से कोई संबंध नहीं है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि किसी अपराधी को उसकी जाति से नहीं आँका जा सकता। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की सराहना करते हुए बताया कि मुठभेड़ के दौरान 2 पुलिसकर्मी घायल भी हुए। शाहदेव ने यह भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है और आयोग की एक टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो चुकी है।
शाहदेव ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि सभी आरोपियों को त्वरित अदालत के माध्यम से सज़ा दिलाई जाएगी। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी इस मामले में जातिवाद का सहारा लेकर राज्य को शर्मिंदा कर रही है।
विपक्ष की आलोचना
कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने कार्रवाई की समयसीमा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुठभेड़ तभी होती है जब मीडिया का दबाव पड़ता है और मामला सार्वजनिक हो जाता है — अपराध से पहले की सतर्कता का अभाव मूल समस्या है। दत्त ने पूछा, 'बाकी 365 दिनों में क्या होता है?'
उन्होंने कहा कि यदि साल भर अपराध की रोकथाम को प्राथमिकता दी जाए और सांप्रदायिक विभाजन से ऊपर उठकर सभी अपराधियों के खिलाफ एकसमान कार्रवाई हो, तो इस तरह के जघन्य अपराध रुक सकते हैं।
आम जनता पर असर
यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत अपराध बल्कि डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग का भी उदाहरण है — पीड़िता की पहचान ऑनलाइन उजागर करना कानूनन दंडनीय है और बिहार पुलिस की यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नाबालिग पीड़ितों की पहचान सोशल मीडिया पर लीक करने के मामले बढ़ रहे हैं।
गौरतलब है कि पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। इस मामले में की जा रही डिजिटल कार्रवाई भविष्य में इसी तरह के मामलों में एक मिसाल बन सकती है।
क्या होगा आगे
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने त्वरित अदालत के ज़रिए सुनवाई का आश्वासन दिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम की घटनास्थल पर मौजूदगी से जाँच को और गति मिलने की उम्मीद है। शेष 2 फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कार्रवाई की अगली रिपोर्ट जल्द सामने आने की संभावना है।