जमुई कांड: NDA ने CM सम्राट चौधरी के बयान का किया समर्थन, कांग्रेस बोली — मीडिया दबाव के बाद जागी सरकार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से हुई छेड़छाड़ और अश्लील वीडियो वायरल करने की घटना अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 23 सितंबर 2026 को कहा कि अपराधियों की कोई जाति या धर्म नहीं होती। उनके इस बयान पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने एकजुट होकर समर्थन जताया, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) ने सरकार की कार्रवाई की समय और मंशा पर गंभीर सवाल उठाए।
NDA नेताओं ने किया CM का बचाव
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने मुख्यमंत्री के बयान को पूरी तरह उचित ठहराया। उन्होंने कहा, 'सीएम सम्राट चौधरी के दावे को आंकड़ों के नजरिए से देखें तो यह साफ है कि आपराधिक मामलों में गिरफ्तारियों का जाति या धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। अगर आपने अपराध किया है तो पुलिस आपको बख्शेगी नहीं।'
राजीव रंजन ने आगे कहा कि जमुई की घटना के संदर्भ में 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स के विरुद्ध कार्रवाई तय की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें वे सभी लोग शामिल हैं जिन्होंने वीडियो बनाया, फैलाया, अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाया और जिन्होंने नाबालिग लड़की के साथ बदसलूकी की।
भाजपा प्रवक्ता ने भी सरकार का पक्ष लिया
रांची से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने बिहार पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा, 'उस लड़की के साथ जो हुआ, वह बहुत शर्मनाक और दिल दहला देने वाली घटना थी। बिहार पुलिस ने तुरंत सख्त कार्रवाई की है।' उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है और आयोग की एक टीम घटनास्थल पर पहुंच रही है।
शाहदेव ने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि सभी आरोपियों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष इस मामले में भी जाति की तलाश कर रहा है।
कांग्रेस का पलटवार — 'मीडिया दबाव के बाद जागती है सरकार'
नई दिल्ली में कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की। उनका आरोप है कि सरकारें मीडिया और सोशल मीडिया के दबाव के बाद ही कार्रवाई करती हैं। उन्होंने कहा, 'एनकाउंटर रेप होने के बाद, एनकाउंटर मर्डर होने के बाद, एनकाउंटर अपराध होने के बाद किए जाते हैं — लेकिन उससे पहले अपराधियों को कौन बचाता है।'
अभिषेक दत्त ने आगे कहा, 'जब मीडिया का प्रेशर बनता है, सोशल मीडिया का भी प्रेशर बनता है, तो इनको अपराधी मिल भी जाता है, उसकी जेब से कट्टे भी निकल जाते हैं, उसका एनकाउंटर भी हो जाता है — लेकिन बाकी 365 दिन क्या होता है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि रोज़ाना अपराध के विरुद्ध सख्ती बरती जाए और अपराधियों को राजनीतिक शरण न दी जाए, तो किसी की हिम्मत नहीं होगी कि वह खुलेआम अपराध करे।
घटना की पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में महिला सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही को लेकर बहस तेज है। गौरतलब है कि जमुई की यह घटना अकेली नहीं है — राजीव रंजन ने खुद स्वीकार किया कि 'कई राज्यों में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।' बिहार सरकार का 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स के विरुद्ध कार्रवाई का निर्णय डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।
राष्ट्रीय महिला आयोग का हस्तक्षेप और फास्ट-ट्रैक कोर्ट का आश्वासन सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन विपक्ष का सवाल यह है कि क्या यह प्रतिक्रिया संस्थागत है या केवल दबाव-जनित। आगे यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि 120 खातों के विरुद्ध कार्रवाई कितनी तेज़ी से पूरी होती है और पीड़िता को न्याय कब तक मिलता है।