जमुई कांड: 'छिटपुट घटना' वाले बयान पर कांग्रेस का हमला, मंत्री श्रवण कुमार पर उठे गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के जमुई में एक नाबालिग लड़की के साथ हुई बदसलूकी का वीडियो 22 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे देश में तीव्र आक्रोश फैल गया। विवाद तब और गहरा गया जब बिहार के मंत्री श्रवण कुमार ने इस घटना को 'छिटपुट घटना' करार दिया — एक बयान जिसने सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को आलोचना के लिए एकजुट कर दिया।
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद करमवीर सिंह बौद्ध ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा, 'यह घटना बेहद निंदनीय है। जमुई की इस घटना के बाद करोड़ों बच्चियाँ जो स्कूल-कॉलेज जाती हैं, उनके मन में डर बैठ गया है।' मंत्री के बयान पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उनका नाम तो ऐतिहासिक पात्र श्रवण जैसा रखा गया है, लेकिन वे उसके लायक नहीं हैं। करमवीर सिंह ने तंज कसते हुए जोड़ा कि जो मंत्री इस जघन्य घटना को 'छोटी-मोटी' कहे, उनका मेडिकल परीक्षण होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा, 'हमारा सांसद बनना भी सुखदायक नहीं है, अगर देश में सुरक्षा महसूस नहीं हो सके। आज भी लड़कियों के प्रति वही मानसिकता बनी हुई है।' उन्होंने माँग की कि ऐसी वारदात को अंजाम देने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय विधायक की माँग — न्याय सुनिश्चित होगा
सासाराम विधायक स्नेहलता कुशवाहा ने भी इस घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि वे पीड़ित परिवार से मिलें और उनके साथ हुए दुर्व्यवहार को ऊपर तक पहुँचाएँ। उन्होंने आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को न्याय अवश्य मिलेगा और सरकार अपराधियों को दंड देने में पूरी तत्परता दिखाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
भाजपा नेताओं ने भी जताई चिंता
मुंबई में शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने वीडियो देखने के बाद कहा, 'यह कलयुग है। एक नाबालिग लड़की छोड़ने की गुहार लगा रही है और हमारे समाज में ऐसे बेरहम लोग हैं। यह पुरुष-प्रधान सोच को दिखाता है।' उन्होंने माँग की कि दोषियों को सबके सामने मृत्युदंड दिया जाए।
रांची में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने भी कहा कि वीडियो बेहद परेशान करने वाला है और इस बर्बर छेड़छाड़ को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। वहीं, BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और सरकार इस पर सर्वाधिक सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस घटना ने सबको 'अंदर तक झकझोर दिया है' और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता बताया।
मंत्री के बयान ने क्यों बढ़ाई मुश्किल
गौरतलब है कि किसी भी संवेदनशील अपराध पर सत्तापक्ष के एक मंत्री का 'छिटपुट घटना' जैसा बयान न केवल पीड़ित परिवार के लिए अपमानजनक होता है, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक भी बनता है। यह ऐसे समय में आया है जब महिला सुरक्षा पहले से ही राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बनी हुई है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान अपराधियों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करते हैं और न्याय की माँग करने वाले परिवारों का मनोबल तोड़ते हैं।
आगे की राह
फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अन्य फरार आरोपियों पर शिकंजा कसने की कार्रवाई जारी बताई जा रही है। विपक्षी दल पीड़ित परिवार से मिलकर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। मंत्री श्रवण कुमार के बयान पर माफी या स्पष्टीकरण की माँग भी उठ रही है। यह मामला बिहार में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही दोनों की कसौटी बनता जा रहा है।