22 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जमुई और दिल्ली गैंगरेप पर कांग्रेस सांसद मनोज कुमार का हमला: 'अपराधियों में कानून का खौफ नहीं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जमुई और दिल्ली गैंगरेप पर कांग्रेस सांसद मनोज कुमार का हमला: 'अपराधियों में कानून का खौफ नहीं'

सारांश

जमुई में नाबालिग छात्रा से दुर्व्यवहार और दिल्ली में गैंगरेप — कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने सीधे BJP शासित राज्यों को घेरा। उनका कहना है: सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं, राजनीतिक संरक्षण मिला तो अपराधियों का हौसला और बढ़ेगा।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने 22 सितंबर 2026 को जमुई और दिल्ली की घटनाओं पर सरकार को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने कहा कि अपराधियों में कानून का पर्याप्त भय नहीं है और केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं — निष्पक्ष जाँच ज़रूरी है।
आशंका जताई कि आरोपियों को जमानत मिल सकती है; राजनीतिक संरक्षण मिलने पर अपराधियों का मनोबल बढ़ने की चेतावनी दी।
उत्तर प्रदेश , दिल्ली और बिहार में BJP सरकारों पर कानून-व्यवस्था फेल होने का आरोप लगाया।
नाबालिग बच्चियों के खिलाफ अपराधों पर राजनीति से ऊपर उठकर, POCSO के तहत त्वरित कार्रवाई की माँग की।

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने 22 सितंबर 2026 को बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ दुर्व्यवहार और दिल्ली में नाबालिग से गैंगरेप की घटनाओं को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अपराधियों में कानून का पर्याप्त भय नहीं है और ऐसे मामलों में सख्त, निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है।

मनोज कुमार की मुख्य प्रतिक्रिया

मनोज कुमार ने जमुई की घटना को 'मानवता को शर्मसार करने वाला' बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की जितनी निंदा की जाए, कम है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पीड़ित बच्ची किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज और देश की बच्ची है — और इसी नज़रिए से इन मामलों को देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई नेता इस तरह की घटना को 'छोटी-मोटी' घटना बताता है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

सांसद ने कहा कि समाज और राजनीति में ज़िम्मेदारी का दावा करने वाले लोगों को ऐसी घटनाओं पर संवेदनशील भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए, और राजनीतिक पद पर बैठे लोगों की यह नैतिक जवाबदेही है।

बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल

मनोज कुमार ने बिहार के शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सीधे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है — मामले में निष्पक्ष जाँच और कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने आशंका जताई कि गिरफ्तार आरोपियों को बाद में जमानत मिल सकती है, और यदि ऐसे आरोपियों का सार्वजनिक रूप से स्वागत या राजनीतिक संरक्षण होता है, तो इससे अपराधियों का मनोबल और बढ़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून का शासन तभी मज़बूत होगा जब अपराधियों को यह संदेश मिले कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अवश्य होगी।

दिल्ली गैंगरेप पर प्रशासन को घेरा

दिल्ली में नाबालिग से गैंगरेप की घटना पर भी मनोज कुमार ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजधानी में नाबालिगों के खिलाफ हो रही ऐसी घटनाएँ गंभीर चिंता का विषय हैं और प्रशासन को अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है, वहाँ कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है। यह राजनीतिक बयान विपक्षी पार्टी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें महिला सुरक्षा को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है।

आम जनता और बच्चियों की सुरक्षा पर ज़ोर

मनोज कुमार ने स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्चियों के खिलाफ अपराधों पर राजनीति से ऊपर उठकर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से माँग की कि बच्चियों को सुरक्षित माहौल मिले और वे बिना भय के पढ़ाई कर सकें।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में बाल यौन अपराधों के मामलों को लेकर सामाजिक आक्रोश तेज़ है। गौरतलब है कि POCSO अधिनियम के तहत मामलों में त्वरित सुनवाई और फास्ट-ट्रैक अदालतों की माँग लंबे समय से उठती रही है। मनोज कुमार ने अंत में कहा कि अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई से ही जनता में सुरक्षा का भरोसा मज़बूत होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संरचनात्मक समाधान से ध्यान भटकाने का जोखिम भी रखता है। असली सवाल यह है कि POCSO फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना, जिसका वादा वर्षों से होता आया है, अभी तक पूरी तरह क्यों नहीं हो पाई — और यह विफलता केवल एक पार्टी की नहीं है। जमानत और राजनीतिक संरक्षण की जो आशंका उन्होंने जताई, वह दस्तावेज़ी साक्ष्य माँगती है; बयानबाज़ी से जवाबदेही नहीं बनती। बच्चियों की सुरक्षा तब सुनिश्चित होगी जब दल-निरपेक्ष जाँच, त्वरित सुनवाई और राजनीतिक पुनर्वास की रोक — तीनों एक साथ लागू हों।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने जमुई घटना पर क्या कहा?
मनोज कुमार ने जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ दुर्व्यवहार की घटना को 'मानवता को शर्मसार करने वाला' बताया और कहा कि ऐसी घटनाओं की जितनी निंदा की जाए, कम है। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष जाँच और कड़ी कार्रवाई की माँग की।
मनोज कुमार ने BJP शासित राज्यों पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार — जहाँ BJP की सरकार है — वहाँ कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है। उनके अनुसार, अपराधियों में कानून का पर्याप्त भय न होना इन राज्यों में शासन की विफलता को दर्शाता है।
मनोज कुमार ने जमानत और राजनीतिक संरक्षण पर क्या चेतावनी दी?
उन्होंने आशंका जताई कि गिरफ्तार आरोपियों को बाद में जमानत मिल सकती है। उनका कहना था कि यदि ऐसे आरोपियों को सार्वजनिक रूप से स्वागत या राजनीतिक संरक्षण मिले, तो इससे अपराधियों का मनोबल और बढ़ेगा।
नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर क्या कानूनी प्रावधान हैं?
भारत में POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों में त्वरित सुनवाई और कड़ी सज़ा का प्रावधान है। फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई है, हालाँकि इनकी पर्याप्त संख्या और कार्यप्रणाली पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
इस मामले में कांग्रेस की माँग क्या है?
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने केंद्र और राज्य सरकारों से माँग की है कि नाबालिग बच्चियों के खिलाफ अपराधों पर राजनीति से ऊपर उठकर कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि बच्चियों को सुरक्षित माहौल मिले और वे बिना भय के पढ़ाई कर सकें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. 3 घंटे पहले
  4. 4 घंटे पहले
  5. कल
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले