मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया, 64 मैचों में 229 विकेट का शानदार सफर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने 6 नवंबर 2026 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी। 36 वर्षीय इस दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा कर यह फैसला सुनाया। शमी ने 64 टेस्ट मैचों में 229 विकेट झटककर भारतीय तेज गेंदबाजी की विरासत को नई ऊँचाई दी।
भावुक विदाई संदेश
शमी ने एक्स पर लिखा, 'मैं सफेद जर्सी तो छोड़ रहा हूँ, लेकिन उससे जुड़ी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी। जब मैंने पहली बार भारत की टेस्ट जर्सी पहनी थी, तब मेरा बस एक ही सपना था, अपने देश के लिए कुछ कर दिखाना... तब से लेकर अब तक, हर विकेट, हर संघर्ष, हर चोट और हर वापसी ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मेरे लिए टेस्ट क्रिकेट सिर्फ एक फॉर्मेट नहीं रहा, बल्कि यह मेरी जिंदगी का एक बेहद खास हिस्सा रहा है। आज, भारी मन और अनगिनत खूबसूरत यादों के साथ, मैं टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला कर रहा हूँ।'
करियर के आँकड़े और उपलब्धियाँ
नवंबर 2013 में टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले शमी ने 64 टेस्ट मैचों में 27.71 की औसत से 229 विकेट हासिल किए। इस दौरान उन्होंने 6 बार किसी एक पारी में 5 या उससे अधिक विकेट चटकाने का कारनामा किया। बल्ले से भी उन्होंने 750 रन बनाए, जिनमें 2 अर्धशतक शामिल रहे।
सीमित ओवरों के प्रारूप में भी शमी का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने 108 वनडे मैचों में 206 विकेट और 25 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 27 विकेट अपने नाम किए।
आखिरी टेस्ट और टीम से दूरी
शमी ने आखिरी बार जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच खेला था। किसी भी प्रारूप में उनकी अंतिम अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति मार्च 2025 में दर्ज हुई थी। गौरतलब है कि लंबी चोट और फिर टीम चयन में जगह न मिलने के कारण शमी करीब तीन वर्षों से टेस्ट मैदान से दूर थे।
आभार और विदाई
शमी ने अपने संदेश में बीसीसीआई और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (कैब) का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, 'आपका समर्थन और भरोसा मेरे लिए हमेशा खास रहेगा। भले ही मैदान पर मेरी आखिरी टेस्ट गेंद फेंकी जा चुकी हो, लेकिन भारत के लिए खेलने का गर्व हमेशा मेरे दिल में जिंदा रहेगा।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय तेज गेंदबाजी इकाई नई पीढ़ी के साथ संक्रमण दौर से गुजर रही है। शमी की यह विदाई उस स्वर्णिम अध्याय का पटाक्षेप करती है जिसने भारतीय पेस अटैक को विश्व क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ में से एक बनाया।