7 नवंबर 2026
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ईरान परमाणु प्रमुख इस्लामी का बड़ा बयान: अमेरिकी धमकियाँ वॉशिंगटन की बौखलाहट का प्रमाण

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ईरान परमाणु प्रमुख इस्लामी का बड़ा बयान: अमेरिकी धमकियाँ वॉशिंगटन की बौखलाहट का प्रमाण

सारांश

ईरान के परमाणु प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने अमेरिकी हमले की धमकियों को 'बौखलाहट' कहकर खारिज किया और आईएईए महानिदेशक ग्रोसी पर सीधे ईरान-विरोधियों का एजेंट बनने का आरोप लगाया। साथ ही एनपीटी से बाहर निकलने की संभावना को 'संप्रभु अधिकार' बताकर वैश्विक परमाणु कूटनीति में नया तनाव पैदा किया।

मुख्य बातें

मोहम्मद इस्लामी ने 6 नवंबर 2026 को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की कुह-ए-कोलांग पर हमले की धमकी वॉशिंगटन की बौखलाहट का प्रमाण है।
आईएईए महानिदेशक राफेल ग्रोसी पर ईरान के विरोधियों को परमाणु जानकारी देकर 'आज्ञाकारी एजेंट' की तरह काम करने का आरोप।
इस्लामी ने कहा कि आईएईए के दोहरे मापदंड संयुक्त राष्ट्र चार्टर और एनपीटी की कमज़ोरियाँ उजागर करते हैं।
एनपीटी से बाहर निकलने की संभावना को 'रणनीतिक संप्रभु निर्णय' बताया; जल्दबाज़ी से इनकार।
ईरान ने स्पष्ट किया कि सभी बड़े फैसले राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों को प्राथमिकता देकर लिए जाएंगे।

ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (एईओआई) के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने 6 नवंबर 2026 को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर बार-बार हमले की धमकी देना वॉशिंगटन की बौखलाहट का खुला प्रमाण है। उन्होंने साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी पर दोहरे मापदंड अपनाने और ईरान के विरोधियों को संवेदनशील जानकारी देने का गंभीर आरोप लगाया।

इस्लामी का बयान: धमकियों को बौखलाहट की संज्ञा

इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) के अनुसार, रूस टुडे को दिए एक साक्षात्कार में इस्लामी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का कुह-ए-कोलांग (पिकैक्स माउंटेन) पर हमले की धमकी दोहराना और अन्य परमाणु स्थलों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाने की बात करना उनकी असहायता और घबराहट को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह कोई रणनीतिक दबाव नहीं, बल्कि खीझ का प्रदर्शन है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव अपने चरम पर है और वैश्विक कूटनीतिक हलकों में ईरान के परमाणु भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है।

आईएईए प्रमुख ग्रोसी पर गंभीर आरोप

इस्लामी ने आईआरएनए के अनुसार, राफेल ग्रोसी पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी देश के विरोधियों तक पहुँचाकर उनके 'आज्ञाकारी एजेंट' की भूमिका निभा रहे हैं। उनके अनुसार, यह किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था को दी गई शक्तियों का खुला दुरुपयोग है।

इस्लामी ने कहा कि आईएईए के भीतर दोहरे मापदंड अब इतने स्पष्ट और बेबाक हो चुके हैं कि उन्हें लुकाया भी नहीं जा रहा। उनके अनुसार, इससे न केवल इस संस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) की व्यवस्था की कमज़ोरियाँ भी उजागर होती हैं।

एनपीटी से बाहर निकलने का सवाल

जब इस्लामी से पूछा गया कि क्या ईरान परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकलने पर विचार कर सकता है, तो उन्होंने इसे एक 'रणनीतिक और उच्च स्तरीय संप्रभु निर्णय' बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी कदम के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा।

आईआरएनए के अनुसार, इस्लामी ने यह भी कहा कि ईरान ऐसे किसी बड़े फैसले को जल्दबाज़ी में नहीं लेगा — बल्कि एक व्यापक रणनीतिक ढाँचे के तहत, राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए, सुचिंतित तरीके से निर्णय किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल

इस्लामी के बयान का व्यापक निहितार्थ यह है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी ढाँचे को तटस्थ नहीं मानता। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है कि तेहरान ने आईएईए पर पक्षपात का आरोप लगाया हो — लेकिन इस बार आरोप सीधे महानिदेशक पर और इतने स्पष्ट शब्दों में लगाए गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की यह आक्रामक कूटनीतिक भाषा घरेलू दबावों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच सरकार की रणनीतिक स्थिति को मज़बूत दिखाने का प्रयास भी हो सकती है। आने वाले हफ्तों में आईएईए बोर्ड की बैठक में ईरान के रवैये पर सभी की नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ईरान की उस रणनीतिक भाषा का हिस्सा है जो घरेलू दर्शकों को दृढ़ता का संदेश देती है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर वैधता की लड़ाई लड़ती है। आईएईए पर सीधे आरोप लगाना असाधारण है — यह संकेत देता है कि तेहरान अब वैश्विक परमाणु निगरानी ढाँचे को ही विवादित बनाना चाहता है। एनपीटी से बाहर निकलने की संभावना को 'संप्रभु अधिकार' बताना एक सुचिंतित कूटनीतिक दाँव है — न कि आसन्न कदम — जिसका उद्देश्य पश्चिमी देशों पर दबाव बनाना है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक सकती है वह यह है कि यह बयान किसी ठोस नीति बदलाव से नहीं, बल्कि अमेरिका के साथ संभावित वार्ता में सौदेबाज़ी की स्थिति मज़बूत करने की कोशिश से जुड़ा हो सकता है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान के परमाणु प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने अमेरिकी धमकियों पर क्या कहा?
इस्लामी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा कुह-ए-कोलांग और अन्य परमाणु ठिकानों पर हमले की बार-बार धमकी देना वॉशिंगटन की बौखलाहट और असहायता का स्पष्ट संकेत है। यह बयान उन्होंने रूस टुडे को दिए साक्षात्कार में दिया।
इस्लामी ने आईएईए प्रमुख राफेल ग्रोसी पर क्या आरोप लगाए?
इस्लामी ने आरोप लगाया कि ग्रोसी ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी संवेदनशील जानकारी देश के विरोधियों को देकर उनके 'आज्ञाकारी एजेंट' की तरह काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को दी गई शक्तियों का दुरुपयोग है और आईएईए के दोहरे मापदंड अब खुलेआम दिखने लगे हैं।
क्या ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकल सकता है?
इस्लामी ने एनपीटी से बाहर निकलने की संभावना को 'रणनीतिक और उच्च स्तरीय संप्रभु निर्णय' बताया, लेकिन स्पष्ट किया कि ईरान ऐसा कोई कदम जल्दबाज़ी में नहीं उठाएगा। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर एक व्यापक रणनीतिक ढाँचे के तहत लिया जाएगा।
इस्लामी के बयान से संयुक्त राष्ट्र चार्टर और एनपीटी पर क्या असर पड़ता है?
इस्लामी के अनुसार, आईएईए के दोहरे मापदंड और पक्षपातपूर्ण रवैया संयुक्त राष्ट्र चार्टर और परमाणु अप्रसार संधि की कमज़ोरियाँ उजागर करते हैं। उनका तर्क है कि इससे इन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
अमेरिका-ईरान परमाणु तनाव की मौजूदा स्थिति क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति कथित तौर पर ईरान के परमाणु ठिकानों, विशेष रूप से कुह-ए-कोलांग, पर हमले की धमकियाँ दोहराते रहे हैं। ईरान ने इन धमकियों को खारिज करते हुए अपने परमाणु कार्यक्रम को राष्ट्रीय संप्रभुता का विषय बताया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव अपने उच्च स्तर पर बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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