ईरान ने आईएईए पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए किया रेडिएशन लीक की चेतावनी का खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- ईरान ने आईएईए पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है।
- रेडिएशन लीक का खतरा बढ़ गया है।
- बुशहर प्लांट पर चार बार हमले हुए हैं।
- अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो रहा है।
- आईएईए को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
तेहरान, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए रेडिएशन लीक की चेतावनी दी है। ईरान के परमाणु प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने इस संदर्भ में आईएईए के निदेशक रफेल ग्रॉसी को एक पत्र लिखा है, जिसमें ईरान के एकमात्र चालू संयंत्र पर चार बार हमले की निंदा की गई है।
तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस्लामी ने कहा कि एजेंसी की निष्क्रियता के कारण उनके न्यूक्लियर प्लांट्स पर हमले बढ़ रहे हैं।
उन्होंने आईएईए की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसकी चुप्पी हमलावरों को बढ़ावा दे रही है। बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट को अब तक चार बार निशाना बनाया जा चुका है। हाल के हमले में सुरक्षा स्टाफ का एक सदस्य मारा गया और अन्य घायल हुए।
इस्लामी ने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों से रेडियोधर्मी पदार्थ के रिसाव का खतरा बढ़ता है, जिससे इंसानों, पर्यावरण और पड़ोसी देशों को गंभीर नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में होने वाली क्षति की भरपाई मुश्किल होगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विचाराधीन सैन्य अभियान जिनेवा कन्वेंशन और उससे जुड़े प्रोटोकॉल, आईएईए के विधान, एनपीटी (परमाणु अप्रसार संधि), ईरान के व्यापक सुरक्षा समझौते (आईएनएफसीआईआरसी/214), और आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा पारित प्रस्तावों और एजेंसी के सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हैं।
ईरान ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कहा कि केवल चिंता जताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एजेंसी को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "केवल चिंता व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इससे आक्रमण करने वालों के हौसले बुलंद होते हैं।"
रविवार को बुशहर प्लांट पर हमले की आलोचना विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने भी की थी। उन्होंने कहा, "यह हमला हमें कुछ याद दिलाता है और सचेत रहने की सलाह देता है: एक हमला न्यूक्लियर हादसे को ट्रिगर कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर पड़ा असर पीढ़ियों को तबाह कर सकता है। इस बढ़ते संघर्ष के हर गुजरते दिन के साथ, खतरा बढ़ता जा रहा है।”