पश्चिम बंगाल चुनावों में बढ़ती हिंसा: चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मनोज झा
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल चुनाव में स्थिति बेहद हिंसक हो गई है।
- चुनाव आयोग की गिरती गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं।
- असम में राजनीतिक आरोप और भाषाई गिरावट पर चिंता व्यक्त की गई।
- अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा को महत्वपूर्ण माना गया।
- स्थायी शांति की उम्मीद जताई गई है।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आरजेडी सांसद मनोज झा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि पश्चिम बंगाल के चुनावों की स्थिति बेहद हिंसक होती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, तो वह चुनाव आयोग है। झा ने आयोग के इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि सुकुमार सेन के दौर से लेकर अब तक आयोग में लगातार गिरावट देखी गई है, और यह स्थिति आगामी चुनावों में भी दिखाई देगी।
मनोज झा ने टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के बयान का भी उल्लेख किया और कहा कि यह बैठक बिल्कुल भी सौहार्दपूर्ण नहीं थी। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को 'हियरिंग' और 'लिसनिंग' के बीच का अंतर समझ में नहीं आ रहा है। उनकी आदतों में केवल 'हियरिंग' है, जबकि 'लिसनिंग' का अभाव है।
असम में राजनीतिक आरोपों और भाषा की गिरावट पर झा ने कहा कि पिछले 12-13 वर्षों में भाषा और शालीनता का स्तर बहुत नीचे गिर चुका है। यदि लोकतंत्र में भाषा और भावनाओं की गिरावट यूं ही जारी रही, तो इसे सुधारना मुश्किल होगा, और यह सभी के लिए परेशानी का कारण बनेगी। उन्होंने सोशल मीडिया और इसके एल्गोरिदम को भी इसका जिम्मेदार ठहराया और कहा कि लोग केवल अस्थायी आकर्षण के लिए इसे बढ़ावा देते हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा कराई गई एफआईआर के अगले दिन दिल्ली में असम पुलिस की कार्रवाई पर झा ने कहा कि यह उचित नहीं है। चुनिंदा आक्रोश लोकतंत्र के लिए खतरनाक है, और कानून के शासन में ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप निराधार हैं, तो उन्हें जांच एजेंसियों द्वारा सही तरीके से निपटाया जाना चाहिए।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा पर उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा क्षण है जिसका पूरा विश्व इंतजार कर रहा था। इस युद्ध में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले की घटनाएं हुई हैं, जहां हमने बच्चियों के स्कूलों पर बमबारी देखी। लगभग दो सौ बच्चियां जिन्हें स्कूल से घर लौटना था, अब कब्रों में पहुंच गईं। युद्ध का थमना उसी दिन तय हो गया था।
झा ने कहा कि यह अमेरिका के लिए केवल एक ओपन एंड शट केस नहीं है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति का हालिया बयान कि एक पूरी सभ्यता को समाप्त कर देना, यह दर्शाता है कि सभ्यताएं यूं ही समाप्त नहीं होतीं, खासकर जिस सभ्यता का वे उल्लेख कर रहे थे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह अस्थायी युद्धविराम स्थायी शांति में बदल जाए, और इस दुनिया में अमन और स्थिरता का दौर शुरू हो।