आईएईए बोर्ड बैठक में ईरान का विरोध: परमाणु ठिकानों पर 17 हमले, बुशेहर रिएक्टर से 350 मीटर दूर तक पहुँचा खतरा
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की विशेष बैठक में ईरान ने 7 जून 2026 को अमेरिका और इजरायल पर आईएईए की सुरक्षा निगरानी के तहत आने वाले परमाणु ठिकानों पर कथित हमले करने का गंभीर आरोप लगाया। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का सीधा उल्लंघन बताते हुए वैश्विक समुदाय से कड़ी प्रतिक्रिया की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
ईरानी प्रतिनिधियों ने बैठक में दावा किया कि 12-दिवसीय युद्ध और रमजान युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल ने आईएईए की निगरानी में आने वाले परमाणु ठिकानों पर कुल 17 बार हमले किए। उनके अनुसार, आईएईए की स्थापना के बाद से यह परमाणु प्रतिष्ठानों पर अब तक का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व हमला है।
सबसे गंभीर घटना के रूप में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बुशेहर परमाणु बिजली संयंत्र के निकट हुए हमले का उल्लेख किया, जो रिएक्टर से मात्र 350 मीटर की दूरी पर हुआ। इस हमले में जनहानि भी हुई बताई गई है।
अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने याद दिलाया कि 1981 में इजरायल द्वारा इराक के परमाणु केंद्रों पर किए गए हमले की भी आईएईए ने निंदा की थी। उन्होंने तर्क दिया कि आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स और जनरल कॉन्फ्रेंस ने विभिन्न प्रस्तावों में यह स्पष्ट किया है कि सुरक्षा निगरानी के तहत आने वाले परमाणु ठिकानों पर हमला करना या ऐसी धमकी देना संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था पहले से ही दबाव में है और एनपीटी की समीक्षा प्रक्रिया अनिश्चितता के दौर से गुज़र रही है।
रेडियोधर्मी खतरे की चेतावनी
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने आईएईए महानिदेशक राफेल ग्रॉसी की उस चेतावनी का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि बुशेहर परमाणु संयंत्र पर सीधा हमला होता, तो इसके अत्यंत गंभीर परिणाम हो सकते थे। ईरान के अनुसार, ऐसी स्थिति में बड़ी मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ वातावरण में फैल सकते थे, जो क्षेत्रीय पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए विनाशकारी होता।
ईरान की माँगें
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने आईएईए सदस्य देशों से 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने और राजनीतिक पक्षपात व दोहरे मानदंडों से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर ऐसे नए अंतरराष्ट्रीय नियम बनाए जाने चाहिए जो सुरक्षा निगरानी के तहत आने वाले परमाणु ठिकानों पर किसी भी प्रकार के हमले या धमकी को पूरी तरह प्रतिबंधित करें।
गौरतलब है कि ईरान का यह कदम वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था और आईएईए की निगरानी प्रणाली की विश्वसनीयता पर व्यापक बहस को फिर से केंद्र में ले आया है। आने वाले हफ्तों में आईएईए बोर्ड की प्रतिक्रिया और सदस्य देशों का रुख इस मुद्दे की दिशा तय करेगा।