22 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईएईए बोर्ड बैठक में ईरान का विरोध: परमाणु ठिकानों पर 17 हमले, बुशेहर रिएक्टर से 350 मीटर दूर तक पहुँचा खतरा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईएईए बोर्ड बैठक में ईरान का विरोध: परमाणु ठिकानों पर 17 हमले, बुशेहर रिएक्टर से 350 मीटर दूर तक पहुँचा खतरा

सारांश

आईएईए की विशेष बैठक में ईरान ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल ने उसके परमाणु ठिकानों पर 17 बार हमले किए — जिनमें बुशेहर रिएक्टर से महज 350 मीटर दूर तक का हमला शामिल है। ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए 'जीरो टॉलरेंस' की नीति की माँग की।

मुख्य बातें

ईरान ने आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की विशेष बैठक में 7 जून 2026 को अमेरिका और इजरायल पर परमाणु ठिकानों पर 17 कथित हमलों का आरोप लगाया।
बुशेहर परमाणु बिजली संयंत्र के रिएक्टर से मात्र 350 मीटर दूर हमला हुआ; इसमें जनहानि भी बताई गई।
ईरान ने इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर , एनपीटी और आईएईए नियमों का उल्लंघन करार दिया।
आईएईए महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने पहले चेताया था कि बुशेहर पर सीधे हमले से रेडियोधर्मी पदार्थ वातावरण में फैल सकते थे।
ईरान ने सदस्य देशों से 'जीरो टॉलरेंस' नीति और नए अंतरराष्ट्रीय नियमों की माँग की।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने 1981 में इराक के परमाणु केंद्रों पर इजरायली हमले की आईएईए-निंदा का भी हवाला दिया।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की विशेष बैठक में ईरान ने 7 जून 2026 को अमेरिका और इजरायल पर आईएईए की सुरक्षा निगरानी के तहत आने वाले परमाणु ठिकानों पर कथित हमले करने का गंभीर आरोप लगाया। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का सीधा उल्लंघन बताते हुए वैश्विक समुदाय से कड़ी प्रतिक्रिया की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

ईरानी प्रतिनिधियों ने बैठक में दावा किया कि 12-दिवसीय युद्ध और रमजान युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल ने आईएईए की निगरानी में आने वाले परमाणु ठिकानों पर कुल 17 बार हमले किए। उनके अनुसार, आईएईए की स्थापना के बाद से यह परमाणु प्रतिष्ठानों पर अब तक का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व हमला है।

सबसे गंभीर घटना के रूप में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बुशेहर परमाणु बिजली संयंत्र के निकट हुए हमले का उल्लेख किया, जो रिएक्टर से मात्र 350 मीटर की दूरी पर हुआ। इस हमले में जनहानि भी हुई बताई गई है।

अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने याद दिलाया कि 1981 में इजरायल द्वारा इराक के परमाणु केंद्रों पर किए गए हमले की भी आईएईए ने निंदा की थी। उन्होंने तर्क दिया कि आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स और जनरल कॉन्फ्रेंस ने विभिन्न प्रस्तावों में यह स्पष्ट किया है कि सुरक्षा निगरानी के तहत आने वाले परमाणु ठिकानों पर हमला करना या ऐसी धमकी देना संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था पहले से ही दबाव में है और एनपीटी की समीक्षा प्रक्रिया अनिश्चितता के दौर से गुज़र रही है।

रेडियोधर्मी खतरे की चेतावनी

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने आईएईए महानिदेशक राफेल ग्रॉसी की उस चेतावनी का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि बुशेहर परमाणु संयंत्र पर सीधा हमला होता, तो इसके अत्यंत गंभीर परिणाम हो सकते थे। ईरान के अनुसार, ऐसी स्थिति में बड़ी मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ वातावरण में फैल सकते थे, जो क्षेत्रीय पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए विनाशकारी होता।

ईरान की माँगें

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने आईएईए सदस्य देशों से 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने और राजनीतिक पक्षपात व दोहरे मानदंडों से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर ऐसे नए अंतरराष्ट्रीय नियम बनाए जाने चाहिए जो सुरक्षा निगरानी के तहत आने वाले परमाणु ठिकानों पर किसी भी प्रकार के हमले या धमकी को पूरी तरह प्रतिबंधित करें।

गौरतलब है कि ईरान का यह कदम वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था और आईएईए की निगरानी प्रणाली की विश्वसनीयता पर व्यापक बहस को फिर से केंद्र में ले आया है। आने वाले हफ्तों में आईएईए बोर्ड की प्रतिक्रिया और सदस्य देशों का रुख इस मुद्दे की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक परमाणु व्यवस्था की बुनियाद पर एक तीखा सवाल है — क्या आईएईए की निगरानी में आने वाले ठिकाने वास्तव में सुरक्षित हैं? बुशेहर पर 350 मीटर की दूरी तक पहुँचा हमला और महानिदेशक ग्रॉसी की खुद की चेतावनी यह संकेत देती है कि यह खतरा काल्पनिक नहीं था। विरोधाभास यह है कि जो देश परमाणु अप्रसार के सबसे मुखर समर्थक हैं, वही इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। 1981 के इराक हमले की आईएईए-निंदा का हवाला देकर ईरान ने दोहरे मानदंडों को उजागर किया है — और यदि बोर्ड इस बार मौन रहा, तो यह परमाणु निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए दीर्घकालिक क्षति होगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएईए बोर्ड बैठक में ईरान ने क्या आरोप लगाए?
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल ने आईएईए की सुरक्षा निगरानी के तहत आने वाले परमाणु ठिकानों पर कुल 17 बार हमले किए। ईरान ने इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और एनपीटी का उल्लंघन बताया।
बुशेहर परमाणु संयंत्र पर क्या खतरा था?
ईरान के अनुसार बुशेहर परमाणु बिजली संयंत्र के रिएक्टर से मात्र 350 मीटर की दूरी पर हमला हुआ और इसमें जनहानि भी हुई। आईएईए महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने स्वयं चेताया था कि सीधे हमले की स्थिति में बड़ी मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ वातावरण में फैल सकते थे।
ईरान ने आईएईए से क्या माँग की है?
ईरान ने सदस्य देशों से परमाणु ठिकानों पर हमलों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने और नए अंतरराष्ट्रीय नियम बनाने की माँग की। साथ ही उसने राजनीतिक पक्षपात और दोहरे मानदंडों से बचने की अपील की।
1981 के इराक हमले का संदर्भ क्यों दिया गया?
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने 1981 में इजरायल द्वारा इराक के परमाणु केंद्रों पर किए गए हमले का उल्लेख किया, जिसकी आईएईए ने तब निंदा की थी। यह हवाला देकर ईरान ने यह तर्क दिया कि वर्तमान हमलों पर भी समान मानदंड लागू होने चाहिए।
इन हमलों का वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
ईरान का कहना है कि परमाणु ठिकानों पर हमलों को सामान्य मान लेना परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और आईएईए की निगरानी प्रणाली की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से कमज़ोर करेगा। यदि ऐसे हमलों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आती, तो भविष्य में अन्य देशों के परमाणु प्रतिष्ठान भी असुरक्षित हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले