आईएईए प्रमुख का बयान: 'ईरान संघर्ष का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं'
सारांश
Key Takeaways
- अंतरराष्ट्रीय बातचीत में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
- ईरान का आर्थिक ढांचा संघर्ष से प्रभावित हुआ है।
- ईरान के न्यूक्लियर फैसिलिटी को नुकसान नहीं हुआ।
- संयुक्त राष्ट्र ने ईरान के हमलों की निंदा की।
- बातचीत का स्थान पाकिस्तान हो सकता है।
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट ने वैश्विक स्तर पर चुनौतियाँ पैदा कर दी हैं। इसी क्रम में, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत केवल परमाणु मुद्दों पर ही केंद्रित नहीं होगी, बल्कि इसमें और भी कई महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे।
राफेल ग्रॉसी ने इतालवी समाचार पत्र 'कोरिएरे डेला सेरा' के साथ बातचीत में बताया कि इस बार 'मिसाइल, मिलिशिया और सुरक्षा गारंटी' जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन हफ्तों की लड़ाई ने स्थिति को काफी बदल दिया है और बातचीत के मुद्दे में भी बदलाव आया है। संघर्ष के कारण ईरान के आर्थिक और ऊर्जा ढांचे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
ग्रॉसी ने यह अनुमान लगाया कि अमेरिका जीरो एनरिचमेंट (शून्य परमाणु संवर्धन) पर जोर देगा, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि अस्थायी निलंबन, जो संभवतः पाँच से दस साल तक चल सकता है, दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य होगा।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी न्यूक्लियर फैसिलिटी को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है और उन्होंने स्पष्ट किया, “समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं हो सकता।”
ग्रॉसी ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत इस सप्ताहांत पाकिस्तान में हो सकती है। आईएईए के प्रमुख ने कहा, "मुझे लगता है कि इस्लामाबाद में बातचीत संभव है।" उन्होंने इस बातचीत से संबंधित और जानकारी साझा नहीं की।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की निंदा की है और सभी पीड़ितों को पूरा और त्वरित “मुआवजा” देने की मांग की है।
सुरक्षा परिषद के 47 सदस्यों ने छह गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल देशों और जॉर्डन द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें तेहरान के होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के प्रयासों की निंदा की गई और ईरान से सभी प्रकार के हमले तुरंत बंद करने की अपील की गई।
इसके साथ ही, ईरानी स्कूल पर हुए हमले को भी यूएनजीसी द्वारा गलत ठहराया गया और इस मुद्दे पर गहन चर्चा का निर्णय लिया गया। शुक्रवार को एक ईरानी स्कूल पर हुए जानलेवा हमले पर दूसरी महत्वपूर्ण बहस होगी।
परिषद के अध्यक्ष सिद्धार्थो रेजा सूर्योदिपुरो ने यूनाइटेड नेशंस के शीर्ष मानवाधिकार संगठन को “अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष में बच्चों और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा” पर चर्चा की घोषणा की।