यूएन न्यूक्लियर प्रमुख ने युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की सख्त जांच की अपील की

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यूएन न्यूक्लियर प्रमुख ने युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की सख्त जांच की अपील की

सारांश

ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता में नए मोड़, संयुक्त राष्ट्र के परमाणु प्रमुख ने ईरान की गतिविधियों की सख्त निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया है। क्या यह समझौता संभव होगा?

Key Takeaways

  • ईरान की परमाणु गतिविधियों की सख्त निगरानी जरूरी है।
  • दूसरे राउंड की वार्ता का संभावित स्थान पाकिस्तान हो सकता है।
  • संघर्ष समाप्त करने के लिए ठोस प्रावधान आवश्यक हैं।
  • अमेरिका की नौसेना का ब्लॉकेड जारी है।
  • ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए पूर्ण वेरिफिकेशन सिस्टम की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान और अमेरिका के बीच पहले दौर की वार्ता असफल होने के बाद दूसरे राउंड की बैठक पर चर्चा तेज हो गई है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा है कि मध्य पूर्व में संघर्ष समाप्त करने के लिए होने वाले अमेरिका-ईरान समझौते में ईरान की परमाणु गतिविधियों की सख्त और विस्तृत निगरानी सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रावधानों का समावेश होना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निदेशक जनरल ग्रॉसी ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए पूर्ण वेरिफिकेशन सिस्टम की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस दौरान, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि अगले दो दिनों में ईरान के साथ बातचीत का दूसरा राउंड हो सकता है।

ग्रॉसी ने सियोल में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “ईरान का विशाल न्यूक्लियर प्रोग्राम है, इसलिए इन सबके लिए IAEA इंस्पेक्टर्स की मौजूदगी आवश्यक होगी। अन्यथा, आपका कोई समझौता नहीं होगा। आपको समझौते का भ्रम होगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि न्यूक्लियर तकनीक पर किसी भी समझौते के लिए विस्तृत वेरिफिकेशन मैकेनिज्म की आवश्यकता होती है। फरवरी में सदस्य देशों को भेजी गई IAEA की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस एजेंसी को अपनी न्यूक्लियर फैसिलिटी तक पहुँचने की अनुमति नहीं दी है। पिछले साल जून में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे, जो लगभग 12 दिनों तक चले, जिसमें कई ईरानी न्यूक्लियर वैज्ञानिक मारे गए।

ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ सीधी बातचीत का दूसरा राउंड “अगले दो दिनों में” हो सकता है। यह एक संभावित डिप्लोमैटिक शुरुआत का संकेत है, जबकि अमेरिका ईरान से जुड़े शिपिंग को टारगेट करते हुए अमेरिकी नौसेना के ब्लॉकेड को आगे बढ़ा रहा है।

न्यूयॉर्क पोस्ट के साथ एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि बातचीत जल्द ही हो सकती है और पाकिस्तान को एक संभावित स्थान बताया। उन्होंने कहा, “अगले दो दिनों में कुछ हो सकता है, और हम वहां जाने के लिए अधिकतम तैयार हैं।”

यह ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले राउंड की वार्ता घंटों तक चली, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कई सहमतियाँ नहीं बनीं। ट्रंप ने कहा कि प्रारंभिक योजना यूरोप की ओर इशारा कर रही थी, फिर पाकिस्तान की ओर शिफ्ट हो गई।

यह डिप्लोमैटिक प्रयास खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच हो रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि पहले 24 घंटों में ईरानी पोर्ट से कोई भी जहाज उसके ब्लॉकेड से नहीं गुजरा। छह मर्चेंट जहाजों ने अमेरिका के निर्देशों का पालन किया और ओमान की खाड़ी में ईरानी पोर्ट की ओर वापस मुड़ गए।

Point of View

और इसके परिणाम वैश्विक शांति को प्रभावित कर सकते हैं।
NationPress
15/04/2026

Frequently Asked Questions

ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता क्यों महत्वपूर्ण है?
यह वार्ता मध्य पूर्व में स्थिरता और शांति के लिए आवश्यक है, और इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका क्या है?
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी ईरान की परमाणु गतिविधियों की निगरानी कर रही है, ताकि समझौते की शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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