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गुजरात सरकार के 850 गन्ना किसानों को दिवाली से पहले ₹7.14 करोड़ का बकाया भुगतान

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गुजरात सरकार के 850 गन्ना किसानों को दिवाली से पहले ₹7.14 करोड़ का बकाया भुगतान

सारांश

गुजरात के आदिवासी क्षेत्र के 850 से अधिक गन्ना किसानों को दिवाली से पहले ₹7.14 करोड़ का बकाया मिलेगा। व्यारा शुगर सहकारी मिल के भुगतान संकट में राज्य सरकार ने सीधे हस्तक्षेप किया — मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की निगरानी में।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने 6 नवंबर 2026 को घोषणा की कि व्यारा शुगर के 850 से अधिक गन्ना किसानों को ₹7.14 करोड़ का बकाया भुगतान किया जाएगा।
राशि दिवाली 2026 से पहले सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की निगरानी में सरकार ने हस्तक्षेप का निर्णय लिया।
आदिवासी विकास मंत्री नरेश पटेल , राज्य मंत्री जयराम गामित और पूर्व मंत्री गणपत वसावा ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
सहकारी चीनी मिल द्वारा समय पर भुगतान न होने से किसान लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे थे।

गुजरात सरकार ने 6 नवंबर 2026 को घोषणा की कि आदिवासी क्षेत्र स्थित व्यारा शुगर (श्री उकाई प्रदेश शुगर इंडस्ट्री को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड) से जुड़े 850 से अधिक गन्ना किसानों को ₹7.14 करोड़ का बकाया भुगतान दिवाली से पहले सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा। सहकारी चीनी मिल द्वारा समय पर भुगतान न होने के कारण इन किसानों को लंबे समय से गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा था।

मुख्य घोषणा और पृष्ठभूमि

सरकार के प्रवक्ता एवं मंत्री जीतू वाघाणी ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की निगरानी में राज्य सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया। वाघाणी ने कहा, 'राज्य सरकार ने 850 से अधिक किसानों के बकाया गन्ना भुगतान के लिए करीब ₹7.14 करोड़ सीधे उनके बैंक खातों में जमा कराने की व्यवस्था की है। यह राशि दिवाली से पहले किसानों को मिल जाएगी।'

गौरतलब है कि व्यारा शुगर गुजरात के आदिवासी बहुल क्षेत्र में संचालित एक सहकारी चीनी मिल है, जो वहाँ के किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है। मिल द्वारा समय पर भुगतान न होने से त्योहारी सीज़न में इन परिवारों की आर्थिक कठिनाइयाँ और बढ़ गई थीं।

आदिवासी नेताओं की भूमिका

वाघाणी ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए आदिवासी विकास मंत्री नरेश पटेल, राज्य मंत्री जयराम गामित, पूर्व मंत्री गणपत वसावा और क्षेत्र के अन्य आदिवासी नेताओं ने लगातार प्रयास किए। इन नेताओं की सक्रियता के फलस्वरूप ही राज्य स्तर पर हस्तक्षेप संभव हो पाया।

यह ऐसे समय में आया है जब आदिवासी क्षेत्रों में कृषि आधारित सहकारी संस्थाओं की वित्तीय सेहत एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। गुजरात में सहकारी चीनी मिलें बाज़ार की प्रतिस्पर्धा और प्रबंधकीय कमज़ोरियों के चलते बार-बार भुगतान संकट में फँसती रही हैं।

आम जनता पर असर

वाघाणी के अनुसार, बकाया राशि मिलने से किसान परिवार त्योहार के दौरान अपनी आर्थिक ज़रूरतें पूरी कर सकेंगे और बिना किसी वित्तीय चिंता के दिवाली मना सकेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उन्हें उनकी उपज का उचित भुगतान समय पर मिले।

इस भुगतान से सीधे तौर पर 850 से अधिक किसान परिवार लाभान्वित होंगे, जिनमें अधिकांश गुजरात के तापी ज़िले और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों से हैं। प्रति किसान औसत बकाया राशि लगभग ₹84,000 के करीब बनती है।

क्या होगा आगे

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि यह राशि दिवाली 2026 से पहले सभी पात्र किसानों के बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित कर दी जाएगी। आगे व्यारा शुगर सहकारी मिल की वित्तीय स्थिति और प्रबंधन को लेकर भी समीक्षा किए जाने की उम्मीद है, ताकि भविष्य में इस तरह के भुगतान संकट दोबारा न उत्पन्न हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि व्यारा जैसी सहकारी चीनी मिलें बार-बार भुगतान संकट में क्यों फँसती हैं। गुजरात में सहकारी क्षेत्र का प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता लंबे समय से चिंता का विषय रही है। सरकारी हस्तक्षेप तात्कालिक राहत देता है, लेकिन जब तक सहकारी मिलों के ढाँचागत सुधार नहीं होते, यह चक्र दोहराता रहेगा। आदिवासी किसानों की निर्भरता इन मिलों पर बनी रहती है और उनके पास विकल्प भी सीमित हैं — इसलिए संरचनात्मक सुधार की माँग राजनीतिक घोषणाओं से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात सरकार गन्ना किसानों को कितनी राशि और कब देगी?
गुजरात सरकार व्यारा शुगर से जुड़े 850 से अधिक गन्ना किसानों को ₹7.14 करोड़ का बकाया भुगतान दिवाली 2026 से पहले करेगी। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
व्यारा शुगर क्या है और किसानों को भुगतान क्यों नहीं हुआ?
व्यारा शुगर यानी श्री उकाई प्रदेश शुगर इंडस्ट्री को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड गुजरात के आदिवासी क्षेत्र में स्थित एक सहकारी चीनी मिल है। मिल की वित्तीय कठिनाइयों के कारण किसानों को लंबे समय से उनकी गन्ना आपूर्ति का भुगतान नहीं मिल पाया था।
इस बकाया भुगतान की घोषणा किसने और कब की?
सरकार के प्रवक्ता एवं मंत्री जीतू वाघाणी ने 6 नवंबर 2026 को इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की निगरानी में राज्य सरकार ने किसानों की समस्या के समाधान के लिए हस्तक्षेप किया।
इस मुद्दे को सुलझाने में किन नेताओं ने भूमिका निभाई?
आदिवासी विकास मंत्री नरेश पटेल, राज्य मंत्री जयराम गामित, पूर्व मंत्री गणपत वसावा और क्षेत्र के अन्य आदिवासी नेताओं ने इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए। उनकी सक्रियता के बाद राज्य स्तर पर हस्तक्षेप संभव हो पाया।
इस भुगतान से कितने किसान परिवारों को फायदा होगा?
इस बकाया भुगतान से 850 से अधिक गन्ना किसान परिवार सीधे लाभान्वित होंगे, जो मुख्यतः गुजरात के आदिवासी क्षेत्र से हैं। दिवाली से पहले यह राशि मिलने से त्योहार के दौरान उनकी आर्थिक परेशानियाँ कम होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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