गुजरात: सहकारी चीनी मिलों को ₹1,500 करोड़ की राहत, गन्ना भुगतान को सरकारी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 27 मई 2026 को सहकारी चीनी क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वित्तीय निर्णय लेते हुए 2007-08 से 2014-15 की अवधि में किसानों को किए गए गन्ने के भुगतान को आधिकारिक मंजूरी दे दी। इस कदम से राज्य की सहकारी चीनी मिलों पर लंबे समय से लटकी ₹1,500 करोड़ की संभावित कर देनदारी प्रभावी रूप से समाप्त हो जाएगी। साथ ही, राज्य भर में दो लाख से अधिक किसानों और सहकारी संस्थाओं को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्य निर्णय: क्या है मंजूरी का अर्थ
कृषि और सहकारिता मंत्री जीतू वाघानी ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने उस अवधि के दौरान सहकारी चीनी मिलों द्वारा किसानों को किए गए गन्ने के मूल्य भुगतान को औपचारिक मान्यता दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मंजूरी सहकारी मॉडल में प्रचलित राजस्व-साझाकरण प्रथाओं के तहत किए गए भुगतानों को वैधानिक आधार देती है।
गौरतलब है कि यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब आयकर विभाग ने केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) से अधिक किए गए भुगतानों को 'लाभ' मानकर कई सहकारी चीनी मिलों को कर मांग नोटिस जारी किए थे। इससे क्षेत्र पर लगभग ₹1,500 करोड़ की देनदारी का बोझ पड़ गया था।
गुजरात मॉडल: उप-उत्पादों से किसानों को अतिरिक्त लाभ
मंत्री वाघानी ने बताया कि गुजरात की चीनी सहकारी समितियों ने गुड़, इथेनॉल और सह-उत्पादित बिजली जैसे उप-उत्पादों से अर्जित आय को लगातार किसानों में वितरित किया है। उनके अनुसार, इस व्यवस्था के कारण अनेक अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात के गन्ना उत्पादकों को बेहतर लाभ प्राप्त होता रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सहकारी क्षेत्र के पुनरुद्धार पर नीतिगत जोर बढ़ा है। केंद्र में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर कई विधायी और नीतिगत बदलाव हुए हैं।
केंद्रीय विधायी बदलाव और उच्च स्तरीय समिति की भूमिका
अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 2023 में आयकर अधिनियम में संशोधन किए गए। इन संशोधनों के तहत राज्य द्वारा अनुमोदित गन्ना मूल्य निर्धारण संरचनाओं को कर उद्देश्यों के लिए मान्यता देने का प्रावधान किया गया।
इसके बाद गुजरात सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जिसने जाँच के बाद उक्त अवधि के भुगतानों को औपचारिक रूप से मंजूरी देने की सिफारिश की। राज्य सरकार ने इस सिफारिश को स्वीकार कर निर्णय को अंतिम रूप दिया।
एमएसपी पर ग्रीष्मकालीन मूंग खरीद: पंजीकरण शुरू
इसी निर्णय के साथ कृषि विभाग ने 2025-26 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना के तहत ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। पंजीकरण 27 मई से शुरू होकर 10 जून तक चलेगा।
यह प्रक्रिया गुजरात भर के ई-ग्राम केंद्रों पर संपन्न होगी। किसानों को पंजीकरण के लिए बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट या चेहरे के प्रमाणीकरण से अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी।
आगे की राह
इस दोहरे निर्णय — गन्ना भुगतान की कर मान्यता और MSP पर मूंग पंजीकरण — से गुजरात के कृषि और सहकारी क्षेत्र में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाया जाए, तो सहकारी चीनी उद्योग पर बकाया कर विवादों का राष्ट्रीय स्तर पर समाधान संभव हो सकता है।