12 जुलाई 2026
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गुजरात: सहकारी चीनी मिलों को ₹1,500 करोड़ की राहत, गन्ना भुगतान को सरकारी मंजूरी

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गुजरात: सहकारी चीनी मिलों को ₹1,500 करोड़ की राहत, गन्ना भुगतान को सरकारी मंजूरी

सारांश

गुजरात सरकार ने एक साथ दो बड़े कदम उठाए — सहकारी चीनी मिलों पर लटकी ₹1,500 करोड़ की कर देनदारी खत्म करने के लिए 2007-15 के गन्ना भुगतान को मंजूरी दी और MSP पर मूंग बेचने के लिए किसानों का पंजीकरण 27 मई से शुरू किया। दो लाख से अधिक किसान और सहकारी संस्थाएँ लाभान्वित होंगी।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने 2007-08 से 2014-15 की अवधि में सहकारी चीनी मिलों द्वारा किसानों को किए गए गन्ना भुगतान को आधिकारिक मंजूरी दी।
इस निर्णय से सहकारी चीनी मिलों पर लंबित ₹1,500 करोड़ की संभावित कर देनदारी समाप्त होगी।
दो लाख से अधिक किसानों और सहकारी संस्थाओं को राहत मिलने की उम्मीद।
2023 में आयकर अधिनियम में हुए संशोधन और उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश के बाद यह निर्णय लिया गया।
MSP पर ग्रीष्मकालीन मूंग खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 27 मई से 10 जून 2026 तक ई-ग्राम केंद्रों पर होगा।
पंजीकरण के लिए बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट या चेहरे के प्रमाणीकरण से पहचान सत्यापन अनिवार्य।

गुजरात सरकार ने 27 मई 2026 को सहकारी चीनी क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वित्तीय निर्णय लेते हुए 2007-08 से 2014-15 की अवधि में किसानों को किए गए गन्ने के भुगतान को आधिकारिक मंजूरी दे दी। इस कदम से राज्य की सहकारी चीनी मिलों पर लंबे समय से लटकी ₹1,500 करोड़ की संभावित कर देनदारी प्रभावी रूप से समाप्त हो जाएगी। साथ ही, राज्य भर में दो लाख से अधिक किसानों और सहकारी संस्थाओं को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्य निर्णय: क्या है मंजूरी का अर्थ

कृषि और सहकारिता मंत्री जीतू वाघानी ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने उस अवधि के दौरान सहकारी चीनी मिलों द्वारा किसानों को किए गए गन्ने के मूल्य भुगतान को औपचारिक मान्यता दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मंजूरी सहकारी मॉडल में प्रचलित राजस्व-साझाकरण प्रथाओं के तहत किए गए भुगतानों को वैधानिक आधार देती है।

गौरतलब है कि यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब आयकर विभाग ने केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) से अधिक किए गए भुगतानों को 'लाभ' मानकर कई सहकारी चीनी मिलों को कर मांग नोटिस जारी किए थे। इससे क्षेत्र पर लगभग ₹1,500 करोड़ की देनदारी का बोझ पड़ गया था।

गुजरात मॉडल: उप-उत्पादों से किसानों को अतिरिक्त लाभ

मंत्री वाघानी ने बताया कि गुजरात की चीनी सहकारी समितियों ने गुड़, इथेनॉल और सह-उत्पादित बिजली जैसे उप-उत्पादों से अर्जित आय को लगातार किसानों में वितरित किया है। उनके अनुसार, इस व्यवस्था के कारण अनेक अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात के गन्ना उत्पादकों को बेहतर लाभ प्राप्त होता रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सहकारी क्षेत्र के पुनरुद्धार पर नीतिगत जोर बढ़ा है। केंद्र में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर कई विधायी और नीतिगत बदलाव हुए हैं।

केंद्रीय विधायी बदलाव और उच्च स्तरीय समिति की भूमिका

अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 2023 में आयकर अधिनियम में संशोधन किए गए। इन संशोधनों के तहत राज्य द्वारा अनुमोदित गन्ना मूल्य निर्धारण संरचनाओं को कर उद्देश्यों के लिए मान्यता देने का प्रावधान किया गया।

इसके बाद गुजरात सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जिसने जाँच के बाद उक्त अवधि के भुगतानों को औपचारिक रूप से मंजूरी देने की सिफारिश की। राज्य सरकार ने इस सिफारिश को स्वीकार कर निर्णय को अंतिम रूप दिया।

एमएसपी पर ग्रीष्मकालीन मूंग खरीद: पंजीकरण शुरू

इसी निर्णय के साथ कृषि विभाग ने 2025-26 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना के तहत ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। पंजीकरण 27 मई से शुरू होकर 10 जून तक चलेगा।

यह प्रक्रिया गुजरात भर के ई-ग्राम केंद्रों पर संपन्न होगी। किसानों को पंजीकरण के लिए बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट या चेहरे के प्रमाणीकरण से अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी।

आगे की राह

इस दोहरे निर्णय — गन्ना भुगतान की कर मान्यता और MSP पर मूंग पंजीकरण — से गुजरात के कृषि और सहकारी क्षेत्र में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाया जाए, तो सहकारी चीनी उद्योग पर बकाया कर विवादों का राष्ट्रीय स्तर पर समाधान संभव हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कर कानून उसी अतिरिक्त भुगतान को 'लाभ' मानकर दंडित करता था। 2023 के आयकर संशोधन और अब राज्य की मंजूरी मिलकर इस विरोधाभास को दूर करती है — यह स्वागत योग्य है। परंतु असली सवाल यह है कि क्या यह राहत केवल पिछले बकाये तक सीमित रहेगी या भविष्य में भी सहकारी मूल्य-साझाकरण को स्थायी कानूनी सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, MSP पंजीकरण की समयसीमा मात्र 14 दिन रखना उन किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो दूरदराज के क्षेत्रों में हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात सरकार ने गन्ना भुगतान को मंजूरी क्यों दी?
आयकर विभाग ने 2007-08 से 2014-15 के बीच FRP से अधिक किए गए गन्ना भुगतानों को 'लाभ' मानकर सहकारी चीनी मिलों को कर नोटिस जारी किए थे, जिससे ₹1,500 करोड़ की देनदारी बन गई थी। राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश पर इन भुगतानों को औपचारिक मान्यता देकर यह कर बोझ समाप्त किया।
इस निर्णय से कितने किसानों को फायदा होगा?
इस निर्णय से गुजरात भर में दो लाख से अधिक किसानों और सहकारी संस्थाओं को संयुक्त रूप से राहत मिलने की उम्मीद है। सहकारी चीनी मिलों पर लटकी ₹1,500 करोड़ की कर देनदारी समाप्त होने से मिलों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी, जिसका सीधा असर किसानों के भुगतान पर पड़ेगा।
MSP पर ग्रीष्मकालीन मूंग बेचने के लिए पंजीकरण कैसे करें?
किसान 27 मई से 10 जून 2026 तक गुजरात के ई-ग्राम केंद्रों पर ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के लिए बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट या चेहरे के प्रमाणीकरण से पहचान सत्यापन अनिवार्य है।
आयकर अधिनियम में 2023 में क्या बदलाव हुआ था?
2023 में आयकर अधिनियम में संशोधन कर राज्य द्वारा अनुमोदित गन्ना मूल्य निर्धारण संरचनाओं को कर उद्देश्यों के लिए मान्यता देने का प्रावधान किया गया। इस संशोधन ने गुजरात सरकार को उच्च स्तरीय समिति बनाकर पुराने भुगतानों को औपचारिक मंजूरी देने का कानूनी आधार प्रदान किया।
गुजरात की सहकारी चीनी मिलें अन्य राज्यों से कैसे अलग हैं?
गुजरात की चीनी सहकारी समितियाँ गुड़, इथेनॉल और सह-उत्पादित बिजली जैसे उप-उत्पादों से होने वाली आय को किसानों में वितरित करती हैं। इस राजस्व-साझाकरण मॉडल के कारण अनेक अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात के गन्ना उत्पादकों को बेहतर लाभ मिलता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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