अमित शाह का आश्वासन: चीनी MSP में बढ़ोतरी और प्याज की सीधी खरीद, फडणवीस ने दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र के गन्ना और प्याज किसानों की दीर्घकालीन माँगों पर शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। नई दिल्ली में 27 मई 2026 को हुई बैठक के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पत्रकारों को बताया कि केंद्र सरकार जल्द ही चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में वृद्धि, इथेनॉल कोटे का विस्तार, सहकारी ऋणों का पुनर्गठन और किसानों से सीधे प्याज खरीद जैसे ठोस नीतिगत निर्णय लेगी।
बैठक में क्या हुआ
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने राज्य के इस आकलन से पूर्णतः सहमति जताई कि सहकारी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए चीनी के MSP में तत्काल वृद्धि अनिवार्य है। केंद्र ने राज्य सरकार से औपचारिक नियामक मूल्य प्रस्ताव माँगा है, जिसका मसौदा तैयार हो चुका है और इसे शीघ्र प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके साथ ही केंद्र ने राज्य के इथेनॉल खरीद कोटे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी पर भी सहमति दी है। अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में औपचारिक नीतिगत निर्णय अगले दो महीनों के भीतर आने की उम्मीद है।
सहकारी ऋण पुनर्गठन और सब्सिडी
केंद्र सरकार ने संकटग्रस्त चीनी कारखानों के पुराने ऋणों के पुनर्गठन के लिए राज्य प्रशासन के साथ मिलकर एक तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई है। फडणवीस ने बताया कि नकदी संकट को तत्काल कम करने के उद्देश्य से केंद्र ने लंबित ब्याज सब्सिडी निधि को शीघ्र जारी करने की भी मंजूरी दे दी है।
प्याज बाज़ार में स्थिरता के उपाय
प्याज बाज़ारों में लगातार बनी अस्थिरता को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने नाफेड और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (NCCF) जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा संचालित खरीद कार्यक्रमों में संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की। यह कदम किसानों को बिचौलियों के बिना सीधे सरकारी एजेंसियों को प्याज बेचने का अवसर देगा।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है और यहाँ के किसान वर्षों से मूल्य अस्थिरता की मार झेल रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में ग्रामीण संकट और किसानों की आय को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार औपचारिक मूल्य प्रस्ताव केंद्र को तुरंत सौंपेगी। इथेनॉल कोटे और ऋण पुनर्गठन पर नीतिगत अधिसूचनाएँ दो महीने के भीतर अपेक्षित हैं। विश्लेषकों के अनुसार, इन उपायों के क्रियान्वयन की गति ही यह तय करेगी कि महाराष्ट्र के लाखों गन्ना और प्याज किसानों को वास्तविक राहत मिल पाती है या नहीं।