पवन कल्याण ने फडणवीस से की मुलाकात, पूर्वी घाट में बाघ संरक्षण के लिए महाराष्ट्र देगा दो मादा बाघ
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं वन मंत्री पवन कल्याण ने 30 जून 2026 को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास पर उनसे मुलाकात की। इस बैठक में पूर्वी घाट में बाघ संरक्षण और दो मादा बाघों के स्थानांतरण पर केंद्रित सकारात्मक चर्चा हुई।
बैठक का मुख्य एजेंडा
उपमुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच पूर्वी घाट क्षेत्र में बाघों की घटती आबादी और उससे उत्पन्न आनुवंशिक संकट को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। महाराष्ट्र सरकार ने आंध्र प्रदेश को दो मादा बाघ उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है, जो इस क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
पवन कल्याण ने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस और महाराष्ट्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'मादा बाघों को लाने से आनुवंशिक समस्याओं (इनब्रीडिंग) को कम करने में मदद मिलेगी। इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ेगी, बाघों की आबादी लंबे समय तक टिकाऊ बनेगी और एक स्वस्थ तथा आत्मनिर्भर बाघ आवास विकसित होगा।'
आनुवंशिक संकट की पृष्ठभूमि
पवन कल्याण ने बताया कि आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाट क्षेत्र में मादा बाघों की संख्या में भारी गिरावट के कारण इनब्रीडिंग की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई थी। इसी संकट से निपटने और बाघों की आबादी को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार से सहयोग माँगा गया था।
उन्होंने कहा, 'इस समस्या को दूर करने और बाघों की आबादी को फिर से बढ़ाने के लिए हमने महाराष्ट्र सरकार से सहयोग माँगा था। महाराष्ट्र ने आंध्र प्रदेश को दो मादा बाघ उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है और इसके लिए हम उनका हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।' गौरतलब है कि पूर्वी घाट का वन क्षेत्र आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र दोनों राज्यों में फैला है, जो इस अंतर-राज्यीय सहयोग को और अधिक प्रासंगिक बनाता है।
केंद्र सरकार की भूमिका
जनसेना प्रमुख पवन कल्याण ने इस पहल को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन देने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव का भी धन्यवाद किया। बाघ स्थानांतरण जैसी प्रक्रियाओं के लिए केंद्रीय वन्यजीव बोर्ड और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की स्वीकृति आवश्यक होती है, जो इस प्रक्रिया की संस्थागत जटिलता को रेखांकित करती है।
साझा संरक्षण प्रतिबद्धता
पवन कल्याण ने कहा कि यह संयुक्त संरक्षण प्रयास विज्ञान-आधारित और टिकाऊ वन्यजीव प्रबंधन के ज़रिए जैव विविधता की रक्षा के प्रति दोनों राज्यों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने भरोसा जताया कि आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच यह साझेदारी पूर्वी घाट में बाघों के दीर्घकालिक संरक्षण में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
उन्होंने आगे कहा, 'वन्यजीव और जैव विविधता संरक्षण के अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हम महाराष्ट्र सरकार, केंद्र सरकार और अन्य सहयोगी संगठनों के साथ और अधिक समन्वय के साथ आगे बढ़ते रहेंगे।'
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में बाघों की कुल आबादी में वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन पूर्वी घाट जैसे कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में मादा बाघों की कमी एक अलग चुनौती बनी हुई है। दोनों राज्यों के बीच यह अंतर-राज्यीय समझौता भविष्य में अन्य वन्यजीव गलियारों के लिए एक मॉडल के रूप में उभर सकता है।