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किसानों का ₹632 करोड़ लंबित भुगतान: UP मंत्री डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय ने केंद्र से की शीघ्र राहत की मांग

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किसानों का ₹632 करोड़ लंबित भुगतान: UP मंत्री डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय ने केंद्र से की शीघ्र राहत की मांग

सारांश

उत्तर प्रदेश के खाद्य मंत्री डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय ने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी से मिलकर ₹632 करोड़ के लंबित भुगतान और ₹118 करोड़ के सब्सिडी दावों के निस्तारण की माँग की। 9 जिलों में FCI भंडारण क्षमता की कमी और मक्का खरीद लक्ष्य बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया गया।

मुख्य बातें

UP के खाद्य मंत्री डॉ.
मनोज कुमार पाण्डेय ने 24 जून 2025 को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात की।
केंद्र के पास NFSA और PMGKAY के तहत राज्य का ₹632 करोड़ से अधिक का भुगतान लंबित है।
मक्का और बाजरा खरीद के लिए ₹118 करोड़ के सब्सिडी दावों के शीघ्र निस्तारण की माँग की गई।
इस वर्ष खरीदे गए गेहूं का 72% FCI को हस्तांतरित; CMR निस्तारण में 99% लक्ष्य हासिल।
प्रयागराज, अयोध्या, झाँसी सहित 9 जिलों में FCI भंडारण क्षमता अपर्याप्त बताई गई।
मक्का खरीद का मौजूदा लक्ष्य 25 हजार मीट्रिक टन ; ज़रूरत पड़ने पर बढ़ाने का अनुरोध किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय ने 24 जून 2025 को केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात कर किसानों के हितों से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। इस बैठक में उन्होंने ₹632 करोड़ से अधिक के लंबित भुगतान, ₹118 करोड़ के सब्सिडी दावों के निस्तारण और कई जिलों में भारतीय खाद्य निगम (FCI) की भंडारण क्षमता बढ़ाने की माँग रखी।

मुख्य माँगें और लंबित भुगतान

डॉ. पाण्डेय ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि पिछले वर्षों के खाद्यान्न खरीद प्रस्तावों से संबंधित कई स्वीकृतियाँ अभी तक लंबित हैं, जिससे मंडी समितियों और अन्य संस्थाओं के भुगतान प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मक्का और बाजरा खरीद के लिए राज्य सरकार द्वारा भेजे गए लगभग ₹118 करोड़ के सब्सिडी दावों के शीघ्र निस्तारण की माँग की।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत परिवहन, हैंडलिंग और अन्य व्यवस्थाओं पर राज्य द्वारा किए गए व्यय के बदले केंद्र के पास ₹632 करोड़ से अधिक का भुगतान बकाया है। मंत्री के अनुसार इससे खरीद और वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ रहा है।

गेहूं खरीद अभियान की उपलब्धि

बैठक में डॉ. पाण्डेय ने प्रदेश में चल रहे गेहूं खरीद अभियान की सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष खरीदे गए कुल गेहूं का लगभग 72 प्रतिशत भारतीय खाद्य निगम (FCI) को हस्तांतरित किया जा चुका है। शेष स्टॉक के सुरक्षित भंडारण और समयबद्ध उठान के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाओं की आवश्यकता जताई गई।

धान खरीद के बाद कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के निस्तारण में उत्तर प्रदेश ने लगभग 99 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिसे मंत्री ने खाद्यान्न प्रबंधन के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि बताया।

भंडारण क्षमता की कमी वाले जिले

मंत्री ने केंद्र का ध्यान उन जिलों की ओर दिलाया जहाँ मौजूदा भंडारण क्षमता पर्याप्त नहीं है। इनमें प्रयागराज, अयोध्या, झाँसी, जालौन, ललितपुर, चित्रकूट, उन्नाव, चंदौली और बहराइच शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन जिलों में अतिरिक्त गोदामों की व्यवस्था नहीं हुई तो भविष्य के खरीद अभियानों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

मक्का खरीद लक्ष्य और किसान हित

मक्का खरीद के संबंध में डॉ. पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश में खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और केंद्र सरकार ने 25 हजार मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसानों की उपज अधिक मात्रा में खरीद केंद्रों पर आती है, तो राज्य सरकार लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध करेगी — ताकि कोई भी किसान अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने को विवश न हो।

डॉ. पाण्डेय ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार इन माँगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी और किसानों, सहकारी संस्थाओं तथा खाद्यान्न खरीद एवं वितरण प्रणाली को आवश्यक राहत मिलेगी। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब खरीफ सीजन की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और भंडारण तथा भुगतान की समस्याएँ किसानों की चिंता का केंद्र बनी हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रतिपूर्ति महीनों तक अटकी रहती है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्य में जब मंडी समितियों के भुगतान रुकते हैं, तो असर सीधे किसान की जेब पर पड़ता है। 9 जिलों में भंडारण क्षमता की कमी यह भी दर्शाती है कि खरीद के लक्ष्य तय करना और उनके लिए बुनियादी ढाँचा तैयार रखना — दोनों अलग-अलग गतियों पर चल रहे हैं। जब तक केंद्र-राज्य प्रतिपूर्ति चक्र तेज़ और पारदर्शी नहीं होता, किसानों को 'पूरा मूल्य' देने के वादे कागज़ों तक सीमित रहने का जोखिम बना रहेगा।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय ने केंद्र से क्या-क्या माँगें रखीं?
उन्होंने ₹632 करोड़ से अधिक के लंबित भुगतान, ₹118 करोड़ के सब्सिडी दावों के शीघ्र निस्तारण, 9 जिलों में FCI भंडारण क्षमता विस्तार और मक्का खरीद लक्ष्य बढ़ाने की माँग रखी। ये सभी माँगें 24 जून 2025 को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के साथ हुई बैठक में उठाई गईं।
उत्तर प्रदेश का केंद्र के पास कितना भुगतान लंबित है?
NFSA और PMGKAY के तहत परिवहन, हैंडलिंग व अन्य व्यवस्थाओं पर राज्य द्वारा किए गए व्यय के बदले केंद्र के पास ₹632 करोड़ से अधिक का भुगतान लंबित है। इसके अलावा मक्का और बाजरा खरीद के लिए ₹118 करोड़ के सब्सिडी दावे भी अनिस्तारित हैं।
किन जिलों में FCI भंडारण क्षमता की कमी है?
प्रयागराज, अयोध्या, झाँसी, जालौन, ललितपुर, चित्रकूट, उन्नाव, चंदौली और बहराइच में मौजूदा भंडारण क्षमता अपर्याप्त बताई गई है। मंत्री ने इन जिलों में अतिरिक्त गोदामों की व्यवस्था किए जाने की माँग की है।
उत्तर प्रदेश में मक्का खरीद का लक्ष्य क्या है?
केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए 25 हजार मीट्रिक टन मक्का खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। यदि किसानों की उपज अधिक मात्रा में खरीद केंद्रों पर आती है, तो राज्य सरकार इस लक्ष्य को बढ़ाने का अनुरोध करेगी।
इस वर्ष UP में गेहूं खरीद अभियान का क्या हाल रहा?
इस वर्ष खरीदे गए कुल गेहूं का लगभग 72 प्रतिशत FCI को हस्तांतरित किया जा चुका है। धान खरीद के बाद CMR निस्तारण में राज्य ने लगभग 99 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है, जिसे खाद्यान्न प्रबंधन में उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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