26 अगस्त 2026
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असम के सहकारिता मंत्री कौशिक राय ने गांधीनगर में जीतू वघानी से सीखा गुजरात का चीनी सहकारिता मॉडल

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असम के सहकारिता मंत्री कौशिक राय ने गांधीनगर में जीतू वघानी से सीखा गुजरात का चीनी सहकारिता मॉडल

सारांश

असम के सहकारिता मंत्री कौशिक राय ने गांधीनगर में जीतू वघानी से मुलाकात कर गुजरात के उस सहकारी चीनी मॉडल को समझा, जो 1955 से किसानों को एफआरपी से अधिक मूल्य दे रहा है। 17 मिलें, 2 लाख किसान परिवार और ₹3,070 करोड़ का भुगतान — असम इसी राह पर चलने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

असम के सहकारिता मंत्री कौशिक राय ने 25 अगस्त 2026 को गांधीनगर में गुजरात के सहकारी चीनी मॉडल का अध्ययन किया।
गुजरात में वर्तमान में 17 चीनी मिलें संचालित हैं — 12 सहकारी , 3 लीज पर और 2 निजी ।
वर्ष 2025-26 में 72.06 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई से 7.66 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन; किसानों को ₹3,070 करोड़ का भुगतान।
सहकारी सोसायटियों ने केंद्र की ₹3,550 प्रति मीट्रिक टन एफआरपी के मुकाबले ₹3,900–₹4,500 तक दाम दिए।
गन्ना पेराई क्षमता 73,800 टन प्रतिदिन ; इथेनॉल उत्पादन क्षमता 390 किलोलीटर प्रतिदिन ।
मंत्री राय ने कहा कि गुजरात के अनुभव का उपयोग कर असम में सहकारी क्षेत्र को मजबूत किया जाएगा।

असम के सहकारिता मंत्री कौशिक राय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 25 अगस्त 2026 को गांधीनगर में गुजरात के सहकारिता मंत्री जीतूभाई वघानी से भेंट की और राज्य के सहकारी चीनी उद्योग की कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन किया। यह दौरा असम में सहकारी क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद

इस बैठक में गुजरात के राज्य मंत्री ईश्वर सिंह पटेल और सहकारिता राज्य मंत्री रमेशभाई कटारा भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान राज्य के शुगर कंट्रोलर ने गुजरात के सहकारी चीनी क्षेत्र की मौजूदा क्षमता, प्रगति और नई पहलों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।

गुजरात के सहकारी चीनी मॉडल की मुख्य विशेषताएँ

सहकारिता मंत्री जीतू वघानी ने बताया कि गुजरात में सहकारी चीनी आंदोलन की नींव 1955 में बारडोली से रखी गई थी, और आज यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीनी मिलों को केवल औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि इथेनॉल उत्पादन, ग्रीन एनर्जी और डिजिटलीकरण से जोड़कर लाभदायक बनाया जा रहा है।

वर्तमान में गुजरात में कुल 17 चीनी मिलें संचालित हैं — जिनमें 12 सहकारी चीनी सोसायटी, इंडियन पोटाश लिमिटेड द्वारा लीज पर ली गई 3 सोसायटी और 2 निजी चीनी मिलें शामिल हैं। राज्य की कुल गन्ना पेराई क्षमता 73,800 टन प्रतिदिन और इथेनॉल उत्पादन क्षमता 390 किलोलीटर प्रतिदिन है।

किसानों को मिल रहा एफआरपी से अधिक मूल्य

गुजरात में लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है, जिससे 2 लाख से अधिक किसान परिवार सीधे जुड़े हैं। वर्ष 2025-26 में 72.06 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई कर 7.66 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन किया गया। इसके एवज में गन्ना किसानों को ₹3,070 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है और राज्य का औसत रिकवरी रेट 10.64 प्रतिशत रहा।

वघानी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा गन्ने के लिए ₹3,550 प्रति मीट्रिक टन एफआरपी घोषित किया गया है, लेकिन गुजरात की सहकारी सोसायटियों ने किसानों को ₹3,900 से ₹4,500 प्रति मीट्रिक टन तक अधिक मूल्य दिया है — जो राष्ट्रीय न्यूनतम से काफी ऊपर है।

सरकारी सहायता योजनाएँ

प्रतिनिधिमंडल को राज्य सरकार द्वारा सहकारी चीनी मिलों को लाभदायक बनाने के लिए लागू की गई साकार योजना, बायो प्रमोशन और कैपिटल सब्सिडी जैसी विशेष सहायता योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। ये योजनाएँ किसानों की आय बढ़ाने और मिलों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं।

असम में लागू होगा गुजरात मॉडल

असम के सहकारिता मंत्री कौशिक राय ने गुजरात के सहकारी मॉडल, पारदर्शी प्रशासन और किसानों को अधिकतम मूल्य दिलाने की प्रणाली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गुजरात का किसान-केंद्रित दृष्टिकोण बेहद प्रभावशाली है और असम में भी इस अनुभव का उपयोग कर सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ किया जाएगा। यह दौरा संकेत देता है कि असम आने वाले समय में अपनी सहकारी चीनी नीति में व्यापक सुधार की ओर कदम बढ़ा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जलवायु और कृषि संरचना गुजरात से मौलिक रूप से भिन्न है — जहाँ गन्ना उत्पादन सीमित और बिखरा हुआ है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या राय का प्रतिनिधिमंडल सिर्फ 'अध्ययन दौरे' की औपचारिकता निभाता है या असम की ज़मीनी वास्तविकताओं के अनुरूप एक अनुकूलित नीति ढाँचा लेकर लौटता है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम के प्रतिनिधिमंडल ने गांधीनगर में क्या सीखा?
असम के सहकारिता मंत्री कौशिक राय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात के सहकारी चीनी उद्योग की कार्यप्रणाली, किसानों को दिए जाने वाले मूल्य, इथेनॉल उत्पादन और सरकारी सहायता योजनाओं का अध्ययन किया। बैठक में शुगर कंट्रोलर ने विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।
गुजरात में कितनी सहकारी चीनी मिलें हैं और उनकी क्षमता क्या है?
गुजरात में कुल 17 चीनी मिलें हैं — 12 सहकारी, 3 इंडियन पोटाश लिमिटेड द्वारा लीज पर और 2 निजी। राज्य की कुल गन्ना पेराई क्षमता 73,800 टन प्रतिदिन और इथेनॉल उत्पादन क्षमता 390 किलोलीटर प्रतिदिन है।
गुजरात में गन्ना किसानों को कितना मूल्य मिलता है?
केंद्र सरकार द्वारा घोषित ₹3,550 प्रति मीट्रिक टन एफआरपी के मुकाबले गुजरात की सहकारी सोसायटियों ने किसानों को ₹3,900 से ₹4,500 प्रति मीट्रिक टन तक का भुगतान किया है। 2025-26 में किसानों को कुल ₹3,070 करोड़ का भुगतान हो चुका है।
गुजरात के सहकारी चीनी आंदोलन की शुरुआत कब और कहाँ हुई?
गुजरात में सहकारी चीनी आंदोलन की शुरुआत 1955 में बारडोली से हुई थी। सात दशकों में यह आंदोलन राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गया है और अब 2 लाख से अधिक किसान परिवारों को सीधे जोड़ता है।
असम में गुजरात मॉडल कब और कैसे लागू होगा?
मंत्री कौशिक राय ने कहा है कि गुजरात के अनुभव का उपयोग कर असम में सहकारी क्षेत्र को मजबूत किया जाएगा, हालाँकि अभी कोई निश्चित समयसीमा या विस्तृत रोडमैप सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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