असम के सहकारिता मंत्री कौशिक राय ने गांधीनगर में जीतू वघानी से सीखा गुजरात का चीनी सहकारिता मॉडल
सारांश
मुख्य बातें
असम के सहकारिता मंत्री कौशिक राय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 25 अगस्त 2026 को गांधीनगर में गुजरात के सहकारिता मंत्री जीतूभाई वघानी से भेंट की और राज्य के सहकारी चीनी उद्योग की कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन किया। यह दौरा असम में सहकारी क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद
इस बैठक में गुजरात के राज्य मंत्री ईश्वर सिंह पटेल और सहकारिता राज्य मंत्री रमेशभाई कटारा भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान राज्य के शुगर कंट्रोलर ने गुजरात के सहकारी चीनी क्षेत्र की मौजूदा क्षमता, प्रगति और नई पहलों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।
गुजरात के सहकारी चीनी मॉडल की मुख्य विशेषताएँ
सहकारिता मंत्री जीतू वघानी ने बताया कि गुजरात में सहकारी चीनी आंदोलन की नींव 1955 में बारडोली से रखी गई थी, और आज यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीनी मिलों को केवल औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि इथेनॉल उत्पादन, ग्रीन एनर्जी और डिजिटलीकरण से जोड़कर लाभदायक बनाया जा रहा है।
वर्तमान में गुजरात में कुल 17 चीनी मिलें संचालित हैं — जिनमें 12 सहकारी चीनी सोसायटी, इंडियन पोटाश लिमिटेड द्वारा लीज पर ली गई 3 सोसायटी और 2 निजी चीनी मिलें शामिल हैं। राज्य की कुल गन्ना पेराई क्षमता 73,800 टन प्रतिदिन और इथेनॉल उत्पादन क्षमता 390 किलोलीटर प्रतिदिन है।
किसानों को मिल रहा एफआरपी से अधिक मूल्य
गुजरात में लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है, जिससे 2 लाख से अधिक किसान परिवार सीधे जुड़े हैं। वर्ष 2025-26 में 72.06 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई कर 7.66 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन किया गया। इसके एवज में गन्ना किसानों को ₹3,070 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है और राज्य का औसत रिकवरी रेट 10.64 प्रतिशत रहा।
वघानी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा गन्ने के लिए ₹3,550 प्रति मीट्रिक टन एफआरपी घोषित किया गया है, लेकिन गुजरात की सहकारी सोसायटियों ने किसानों को ₹3,900 से ₹4,500 प्रति मीट्रिक टन तक अधिक मूल्य दिया है — जो राष्ट्रीय न्यूनतम से काफी ऊपर है।
सरकारी सहायता योजनाएँ
प्रतिनिधिमंडल को राज्य सरकार द्वारा सहकारी चीनी मिलों को लाभदायक बनाने के लिए लागू की गई साकार योजना, बायो प्रमोशन और कैपिटल सब्सिडी जैसी विशेष सहायता योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। ये योजनाएँ किसानों की आय बढ़ाने और मिलों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं।
असम में लागू होगा गुजरात मॉडल
असम के सहकारिता मंत्री कौशिक राय ने गुजरात के सहकारी मॉडल, पारदर्शी प्रशासन और किसानों को अधिकतम मूल्य दिलाने की प्रणाली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गुजरात का किसान-केंद्रित दृष्टिकोण बेहद प्रभावशाली है और असम में भी इस अनुभव का उपयोग कर सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ किया जाएगा। यह दौरा संकेत देता है कि असम आने वाले समय में अपनी सहकारी चीनी नीति में व्यापक सुधार की ओर कदम बढ़ा सकता है।