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मिशन स्नेहजोरी: ₹400 करोड़ से असम के मूगा रेशम उद्योग को मिलेगी नई उड़ान, बोले CM हिमंत

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मिशन स्नेहजोरी: ₹400 करोड़ से असम के मूगा रेशम उद्योग को मिलेगी नई उड़ान, बोले CM हिमंत

सारांश

असम का मूगा रेशम — दुनिया में सिर्फ यहीं उत्पादित — अब ₹400 करोड़ के ‘मिशन स्नेहजोरी’ का केंद्र है। 1,180 किसान हित समूह, 30 FPO, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और GI सुरक्षा के साथ CM हिमंत बिस्वा सरमा का दांव खाड़ी, जापान जैसे बाज़ारों तक पहुँच का है।

मुख्य बातें

CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 2 जून को ‘मिशन स्नेहजोरी’ को मूगा रेशम उद्योग के लिए ‘गेम-चेंजर’ बताया।
परियोजना की लागत ₹400 करोड़ से अधिक; केंद्र-राज्य की संयुक्त पहल।
राज्यभर में 1,180 किसान हित समूह (FIG) और 30 किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनेंगे।
डिजिटल ट्रेसबिलिटी और कड़े GI प्रमाणीकरण से वैश्विक खरीदार प्रामाणिकता सत्यापित कर सकेंगे।
लक्ष्य बाज़ार: खाड़ी देश , जापान और अन्य अंतरराष्ट्रीय हब।
घोषणा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात के बाद हुई।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 2 जून को कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल ‘मिशन स्नेहजोरी’ राज्य के विश्वप्रसिद्ध मूगा रेशम उद्योग को नई मजबूती देगी और इससे जुड़े किसानों, बुनकरों तथा कारीगरों की आजीविका में बड़ा सुधार लाएगी। ₹400 करोड़ से अधिक लागत वाली यह परियोजना सदियों पुरानी इस पारंपरिक शिल्प-कला के संरक्षण और वैश्विक विस्तार पर केंद्रित है।

मुख्य घटनाक्रम

केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने एक्स पर साझा की गई पोस्ट में बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) क्षेत्र के लोगों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। मिशन स्नेहजोरी इसी कड़ी की प्रमुख पहल है।

योजना का खाका

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य मूगा रेशम के उत्पादन और विपणन के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा करना है। परियोजना के अंतर्गत राज्यभर में 1,180 किसान हित समूह (FIG) और 30 किसान उत्पादक संगठन (FPO) गठित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से कारीगरों और किसानों को संगठित ढाँचे में जोड़ा जाएगा।

डिजिटल ट्रेसबिलिटी और GI सुरक्षा

सरमा ने बताया कि मिशन के तहत डिजिटल ट्रेसबिलिटी सिस्टम और कड़े भौगोलिक संकेतक (GI) प्रमाणीकरण उपाय लागू किए जाएंगे। इससे वैश्विक खरीदारों को असम के मूगा रेशम और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रामाणिकता सत्यापित करने में आसानी होगी — एक ऐसा कदम जो नक़ल-उत्पादों की समस्या से जूझ रहे पारंपरिक शिल्प क्षेत्र के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

वैश्विक बाज़ार पर निगाह

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य असम की पारंपरिक पहचान और स्वदेशी शिल्पकला को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाना है। इसके तहत खाड़ी देशों, जापान और अन्य वैश्विक बाज़ारों में मूगा रेशम उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना है। गौरतलब है कि मूगा रेशम — जो केवल असम में उत्पादित होता है — को पहले से ही GI टैग प्राप्त है।

राजनीतिक संदर्भ

सरमा ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली ‘डबल इंजन सरकार’ की सोच का परिणाम बताया, जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर विकास को गति दे रहे हैं। उन्होंने सिंधिया के पूर्वोत्तर के लिए निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहलें असम की विरासत से जुड़े उद्योगों को संरक्षित करने के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के नए अवसर भी पैदा करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिखरे आपूर्ति-तंत्र और सीमित निर्यात-पहुँच से जूझता रहा है। ₹400 करोड़ की प्रतिबद्धता और 1,180 FIG-30 FPO का संरचनात्मक ढाँचा कागज़ पर ठोस दिखता है, परंतु असली परीक्षा डिजिटल ट्रेसबिलिटी के क्रियान्वयन और बुनकरों तक प्रत्यक्ष आय-लाभ पहुँचाने में होगी। बिना उसके यह योजना भी पूर्वोत्तर की कई पुरानी हस्तशिल्प पहलों की तरह घोषणाओं तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘मिशन स्नेहजोरी’ क्या है?
यह ₹400 करोड़ से अधिक लागत वाली केंद्र-राज्य की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य असम के मूगा रेशम उद्योग का संरक्षण और संवर्धन है। इसमें किसानों, बुनकरों और कारीगरों को संगठित समूहों में जोड़कर उत्पादन और विपणन का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा किया जाएगा।
मिशन स्नेहजोरी के तहत कितने FIG और FPO बनाए जाएँगे?
परियोजना के अंतर्गत असम भर में 1,180 किसान हित समूह (FIG) और 30 किसान उत्पादक संगठन (FPO) गठित किए जाएँगे। इनके माध्यम से कारीगरों और किसानों को सामूहिक सौदेबाज़ी और बाज़ार-पहुँच का लाभ मिलेगा।
मूगा रेशम उत्पादों की प्रामाणिकता कैसे सुनिश्चित होगी?
मिशन के तहत डिजिटल ट्रेसबिलिटी सिस्टम और कड़े भौगोलिक संकेतक (GI) प्रमाणीकरण उपाय लागू किए जाएँगे। इससे वैश्विक खरीदार असम के मूगा रेशम और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रामाणिकता आसानी से सत्यापित कर सकेंगे।
इस योजना से किन बाज़ारों को लक्ष्य बनाया गया है?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, सरकार खाड़ी देशों, जापान और अन्य वैश्विक बाज़ारों में मूगा रेशम उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। उद्देश्य असम की स्वदेशी शिल्पकला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है।
यह पहल कब और किसकी मुलाकात के बाद घोषित हुई?
CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 2 जून को केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात के बाद इसकी जानकारी एक्स पर साझा की। यह पहल पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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