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सिंधिया ने लॉन्च किया ₹411 करोड़ का 'मिशन स्नेह जोरी', असम के 2.6 लाख मूगा रेशम बुनकरों को लाभ

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सिंधिया ने लॉन्च किया ₹411 करोड़ का 'मिशन स्नेह जोरी', असम के 2.6 लाख मूगा रेशम बुनकरों को लाभ

सारांश

असम के मूगा रेशम उद्योग को वैश्विक मंच पर ले जाने की तैयारी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुवाहाटी से ₹411 करोड़ का 'मिशन स्नेह जोरी' लॉन्च किया, जिसका लक्ष्य 2.6 लाख बुनकरों की आय को ₹21,000 से बढ़ाकर ₹50,000 प्रति किलोग्राम तक पहुँचाना और पूर्वोत्तर को आर्थिक महाशक्ति बनाना है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2 जून को गुवाहाटी में ₹411 करोड़ के 'मिशन स्नेह जोरी' का शुभारंभ किया।
योजना से असम के लगभग 2,60,000 बुनकरों और रेशम कीट पालकों को सीधा लाभ मिलेगा।
मिशन का लक्ष्य रेशम पालकों की आय ₹18,000–₹21,000 से बढ़ाकर ₹50,000 प्रति किलोग्राम तक ले जाना है।
योजना में स्पिनिंग मिल का पुनरुद्धार, चार कॉमन फैसिलिटी सेंटर , डिजिटल टेस्टिंग लैब, इनोवेशन लैब और टूरिज्म पार्क शामिल हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कपड़ा राज्य मंत्री के साथ संयुक्त शुभारंभ हुआ।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2 जून को गुवाहाटी में ₹411 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना 'मिशन स्नेह जोरी' का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य असम के विश्व-प्रसिद्ध मूगा रेशम उद्योग को नई दिशा देना है। इस पहल से राज्य के लगभग 2,60,000 बुनकरों और रेशम कीट पालकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मिशन का संयुक्त शुभारंभ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कपड़ा मंत्रालय के राज्य मंत्री के साथ किया गया।

मिशन की मुख्य विशेषताएँ

सिंधिया ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में असम के मूगा रेशम उद्योग के लिए एक नए युग की शुरुआत हुई है। यह मिशन हमारे बुनकरों और रेशम पालकों के लिए प्रगति और विकास के नए रास्ते खोलेगा।” उन्होंने बताया कि योजना में छह प्रमुख घटक शामिल हैं, जो पूरी वैल्यू चेन को नई गति देंगे।

बुनियादी ढाँचे का विस्तार

मिशन के अंतर्गत एक स्पिनिंग मिल को पुनः चालू करने की प्रक्रिया जारी है। रेशम पालन और कोकून उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नए रास्ते खोले जा रहे हैं। इसके अलावा चार कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जाएँगे, जो केंद्रीय प्रसंस्करण की सुविधा देंगे। साथ ही एक आधुनिक डिजिटल टेस्टिंग लैब, इनोवेशन लैब और एक टूरिज्म पार्क भी विकसित किया जाएगा।

आय में संभावित वृद्धि

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, वर्तमान में रेशम पालकों को अपनी उपज पर प्रति किलोग्राम ₹18,000 से ₹21,000 तक की आय होती है। मिशन का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस आय को बढ़ाकर ₹50,000 प्रति किलोग्राम तक पहुँचाया जाए। सिंधिया ने कहा कि पूरी टीम इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध है।

पूर्वोत्तर के लिए दृष्टिकोण

इस अवसर को असम के लिए ऐतिहासिक बताते हुए सिंधिया ने कहा, “प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पूर्वोत्तर के राज्य आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरेंगे। हम आर्थिक क्षमताओं को समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर आगे बढ़ेंगे।” उन्होंने मूगा रेशम की अनुपम चमक, मजबूती और पर्यावरण-अनुकूल गुणों का उल्लेख करते हुए इसे विश्व-प्रसिद्ध बताया।

आगे की राह

मंत्री के अनुसार, यह पहल असम की पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रयास है, जिससे बुनकर समुदाय की आय बढ़ने के साथ-साथ युवाओं को उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे। गौरतलब है कि मूगा रेशम — जो केवल असम में उत्पादित होता है — को 2007 में भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिल चुका है, और इसकी वैश्विक माँग लगातार बढ़ रही है। यह मिशन सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' विजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। पिछले दशकों में रेशम क्षेत्र की कई योजनाएँ कोकून उत्पादन तक सीमित रहीं और निर्यात-मूल्य श्रृंखला तक नहीं पहुँच सकीं। यदि मिशन प्रति किलोग्राम आय को सच में ₹50,000 तक ले जाता है, तो यह पूर्वोत्तर के ग्रामीण आर्थिक मॉडल को बदल सकता है। हालाँकि, GI-टैग वाले उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग, नकली रेशम पर अंकुश और बुनकरों तक प्रोत्साहन का सीधा पहुँचना — ये तीन कसौटियाँ ही तय करेंगी कि यह घोषणा 'मेक इन नॉर्थईस्ट' की दिशा में निर्णायक मोड़ बनती है या एक और सुर्खी।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिशन स्नेह जोरी क्या है?
यह केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय की ₹411 करोड़ की योजना है, जिसका शुभारंभ 2 जून को गुवाहाटी में हुआ। इसका उद्देश्य असम के मूगा रेशम उद्योग की पूरी वैल्यू चेन — रेशम पालन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन — को मजबूत करना है।
मिशन से कितने लोगों को लाभ मिलेगा?
योजना से असम के लगभग 2,60,000 बुनकरों और रेशम कीट पालकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही युवाओं के लिए उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा होंगे।
रेशम पालकों की आय कितनी बढ़ने का लक्ष्य है?
वर्तमान में रेशम पालकों को प्रति किलोग्राम ₹18,000 से ₹21,000 तक मिलते हैं। मिशन का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय बाजार के माध्यम से इस आय को ₹50,000 प्रति किलोग्राम तक पहुँचाने का है।
मिशन के तहत कौन-सी सुविधाएँ विकसित होंगी?
योजना के तहत एक स्पिनिंग मिल पुनः चालू की जाएगी, चार कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जाएँगे, और एक आधुनिक डिजिटल टेस्टिंग लैब, इनोवेशन लैब तथा टूरिज्म पार्क भी विकसित होगा।
मूगा रेशम क्यों खास है?
मूगा रेशम अपनी सुनहरी प्राकृतिक चमक, मजबूती और पर्यावरण-अनुकूल गुणों के कारण विश्व-प्रसिद्ध है। यह दुनिया में केवल असम में उत्पादित होता है और इसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त है।
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