मिजोरम जिंजर मिशन: ₹189.79 करोड़ की योजना से 20,000 किसान परिवारों को मिलेगा वैश्विक बाज़ार

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मिजोरम जिंजर मिशन: ₹189.79 करोड़ की योजना से 20,000 किसान परिवारों को मिलेगा वैश्विक बाज़ार

सारांश

मिजो अदरक खेत पर ₹15 प्रति किलो बिकती है, लेकिन वैश्विक बाज़ार में उसकी वैल्यू ₹500 से ऊपर है — यही खाई पाटने के लिए केंद्र ने ₹189.79 करोड़ का मिजोरम जिंजर मिशन लॉन्च किया, जो 20,000 किसान परिवारों को प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात से सीधे जोड़ेगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 'मिजोरम जिंजर मिशन' की शुरुआत की, कुल लागत ₹189.79 करोड़ ।
मिजो अदरक में 6-8% ओलियोरेसिन — वैश्विक औसत 3% से दोगुना — फिर भी किसानों को मिलते हैं केवल ₹8-15 प्रति किलोग्राम ।
मिशन लगभग 20,000 किसान परिवारों को एकीकृत वैल्यू-चेन इकोसिस्टम से जोड़ेगा।
एक एकीकृत प्रसंस्करण केंद्र , तीन सहायक केंद्र और 30 से अधिक रणनीतिक हस्तक्षेप प्रस्तावित।
लक्षित बाज़ार: दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य-पूर्व और यूरोप ।
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने समयबद्ध क्रियान्वयन का आश्वासन दिया।

केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 14 मई 2025 को 'मिजोरम जिंजर मिशन' की औपचारिक शुरुआत की — यह मिजोरम में अदरक की खेती और वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए ₹189.79 करोड़ की कन्वर्जेंस-आधारित पहल है। इस मिशन का लक्ष्य लगभग 20,000 किसान परिवारों को एक एकीकृत मूल्य-श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ना है।

मूल्य अंतर की बड़ी खाई

सिंधिया ने इस मिशन की ज़रूरत को एक चौंकाने वाले आँकड़े से रेखांकित किया। जीआई (Geographical Indication) प्रमाणित मिजो अदरक में 6-8 प्रतिशत ओलियोरेसिन की मात्रा होती है, जो वैश्विक औसत लगभग 3 प्रतिशत से दोगुनी से भी अधिक है। इसके बावजूद, मिजोरम के किसानों को इस फसल के लिए फिलहाल केवल ₹8-15 प्रति किलोग्राम मिलते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में इसी अदरक की वैल्यू चेन ₹500 प्रति किलोग्राम से भी अधिक तक पहुँच जाती है।

यह अंतर — खेत पर ₹15 और वैश्विक बाज़ार में ₹500 — इस मिशन की पूरी रणनीति का केंद्र है। मंत्री ने कहा कि बिचौलियों को हटाकर और सहकारी तथा किसान उत्पादक संगठन (FPO) ढाँचों को सुदृढ़ करके इस खाई को पाटा जाएगा।

मिशन के चार रणनीतिक स्तंभ

सिंधिया ने इस ₹190 करोड़ की पहल को 'मिजो अदरक आंदोलन' की संज्ञा दी, जो चार प्रमुख स्तंभों पर खड़ा है: अभिसरण (Convergence), मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और बाज़ार एकीकरण। मिशन के तहत एक एकीकृत प्रसंस्करण केंद्र और तीन सहायक केंद्र स्थापित किए जाएंगे, साथ ही 30 से अधिक रणनीतिक हस्तक्षेप किए जाएंगे।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस मिशन का उद्देश्य केवल अदरक की खेती बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों को प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात-आधारित मूल्य संवर्धन में सक्रिय भागीदार बनाना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया जिसके तहत किसानों को 'खेत से थाली तक' की पूरी कृषि वैल्यू चेन में वास्तविक हितधारक बनाया जाएगा।

वैश्विक बाज़ार में प्रवेश की रणनीति

मिशन के अंतर्गत दक्षिण-पूर्व एशियाई, मध्य-पूर्वी और यूरोपीय बाज़ारों में मिजो अदरक के लक्षित प्रवेश की योजना है। सिंधिया ने कहा कि सफलता का पैमाना तब तय होगा जब वैश्विक बाज़ारों की अलमारियों पर मिजो अदरक उपलब्ध हो, उसकी पहचान व्यक्तिगत किसान तक हो सके, और उससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिले। पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में ट्रेसेबिलिटी (Traceability), विशिष्टता और गुणवत्ता आश्वासन को केंद्र में रखा गया है।

मिजोरम सरकार की प्रतिक्रिया

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस मिशन की परिकल्पना और क्रियान्वयन के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के प्रति गहरी सराहना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह मिशन मिजोरम की फार्मा-ग्रेड अदरक में मौजूद अद्वितीय क्षमता को पहचानता है और इसे किसानों की समृद्धि तथा वैश्विक बाज़ार एकीकरण के लिए एक सुव्यवस्थित मार्ग में बदलता है। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि राज्य सरकार जमीनी स्तर पर इस मिशन का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

आगे की राह

यह मिशन ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं। गौरतलब है कि मिजो अदरक पहले से ही जीआई टैग प्राप्त है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में एक विशिष्ट पहचान देता है। अब देखना यह होगा कि प्रसंस्करण केंद्रों की स्थापना और FPO ढाँचे को मजबूत करने की समयसीमा किस गति से पूरी होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा FPO ढाँचे की ज़मीनी मज़बूती और प्रसंस्करण केंद्रों की समयबद्ध स्थापना में होगी। पूर्वोत्तर में ऐसी कई योजनाएँ अवसंरचना की कमी और बाज़ार संपर्क के अभाव में कागज़ों तक सिमट कर रह गई हैं। मिशन की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या किसान की पहचान वाकई वैश्विक अलमारी तक पहुँचती है — या यह भी 'खेत से थाली तक' जैसा एक आकर्षक नारा बनकर रह जाता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिजोरम जिंजर मिशन क्या है?
मिजोरम जिंजर मिशन केंद्र सरकार की ₹189.79 करोड़ की कन्वर्जेंस-आधारित पहल है, जिसे मिजोरम में अदरक की खेती, प्रसंस्करण और वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया है। इसका लक्ष्य लगभग 20,000 किसान परिवारों को वैश्विक बाज़ार से सीधे जोड़ना है।
मिजो अदरक इतनी खास क्यों है?
जीआई प्रमाणित मिजो अदरक में 6-8% ओलियोरेसिन होता है, जबकि वैश्विक औसत केवल 3% है। यह उच्च गुणवत्ता इसे फार्मा, फूड और कॉस्मेटिक उद्योगों के लिए अत्यंत मूल्यवान बनाती है, लेकिन अब तक किसानों को इसका उचित मूल्य नहीं मिल पाया।
इस मिशन से किसानों को क्या फायदा होगा?
मिशन बिचौलियों को हटाकर किसानों को प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और निर्यात में सीधा हिस्सेदार बनाएगा। फिलहाल किसानों को ₹8-15 प्रति किलोग्राम मिलते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में वैल्यू ₹500 प्रति किलोग्राम से अधिक है।
मिशन के तहत कौन-सी बुनियादी सुविधाएँ बनेंगी?
मिशन के अंतर्गत एक एकीकृत प्रसंस्करण केंद्र और तीन सहायक केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा 30 से अधिक रणनीतिक हस्तक्षेप किए जाएंगे, जिनमें ट्रेसेबिलिटी, गुणवत्ता आश्वासन और FPO सशक्तिकरण शामिल हैं।
मिजोरम सरकार इस मिशन में क्या भूमिका निभाएगी?
मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार जमीनी स्तर पर इस मिशन का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य और केंद्र की साझेदारी में यह योजना मिजोरम की कृषि और आर्थिक यात्रा में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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