त्रिपुरा की क्वीन पाइनएप्पल को वैश्विक पहचान: सिंधिया ने ₹236 करोड़ के मिशन की शुरुआत की
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 27 मई 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन पूर्वोत्तर भारत को उच्च मूल्य वाले कृषि और बागवानी उत्पादों के एक बड़े वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसी दिशा में उन्होंने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मणिक साहा और राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ के साथ मिलकर ₹236 करोड़ की महत्वाकांक्षी 'मिशन क्वीन पाइनएप्पल, त्रिपुरा' योजना का औपचारिक शुभारंभ किया।
मिशन का उद्देश्य और कार्यक्षेत्र
सिंधिया ने स्पष्ट किया कि यह मिशन केवल फसल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, 'मिशन क्वीन पाइनएप्पल' का असली लक्ष्य किसानों को उत्पादन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और निर्यात सहित पूरी वैल्यू चेन का सक्रिय हिस्सेदार बनाना है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत त्रिपुरा की कृषि क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ब्रांड में बदला जा रहा है।"
यह मिशन वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही से वित्त वर्ष 2028 की चौथी तिमाही तक — यानी तीन वर्षों की कार्ययोजना के अंतर्गत लागू किया जाएगा। इसका केंद्रीय लक्ष्य जीआई टैग प्राप्त त्रिपुरा की प्रसिद्ध 'क्वीन पाइनएप्पल' को वैश्विक पहचान और बाज़ार तक पहुँच दिलाना है।
बुनियादी ढाँचा और तकनीकी सुविधाएँ
मिशन के तहत अगरतला एयरपोर्ट के निकट एक केंद्रीय हब स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त पश्चिम त्रिपुरा, खोवाई और सिपाहीजला जिलों में आठ संग्रह केंद्र विकसित होंगे। इन केंद्रों पर ग्रेडिंग, कोल्ड स्टोरेज, रीफर लॉजिस्टिक्स, सोलर कोल्ड स्टोरेज, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित फार्म मॉनिटरिंग और डिजिटल ट्रेसेबिलिटी जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
सिंधिया ने यह भी बताया कि नलकाटा पाइनएप्पल प्रोसेसिंग यूनिट को पुनर्जीवित किया जाएगा, जिसे नेरामैक और निजी भागीदारों के सहयोग से संचालित किया जाएगा। यह यूनिट पाइनएप्पल आधारित उत्पादों के बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन का काम संभालेगी।
अपशिष्ट से आय: नया आर्थिक मॉडल
मिशन का एक उल्लेखनीय पहलू यह है कि पाइनएप्पल पौधे के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से को — जिसे अभी तक बेकार फेंक दिया जाता है — अब ब्रोमेलिन निष्कर्षण, पाइनएप्पल लीफ फाइबर (PALF) और जीआई ब्रांडेड उत्पादों के माध्यम से उपयोग में लाया जाएगा। इससे महिला स्वयं सहायता समूहों, जनजातीय समुदायों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए नए रोज़गार के अवसर खुलेंगे।
गौरतलब है कि त्रिपुरा की क्वीन पाइनएप्पल अपनी विशिष्ट खुशबू, कम रेशेदार बनावट और जीआई पहचान के बावजूद किसानों को अभी तक सामान्य फसल जैसा ही मूल्य दिला पा रही है। मिशन का लक्ष्य बाज़ार से जुड़ाव और आधुनिक बुनियादी ढाँचे के ज़रिये इस स्थिति को बदलना है।
बहु-मंत्रालयी समन्वय
यह मिशन पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के नेतृत्व में चलाया जाएगा। इसमें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, एपीडा, डीपीआईआईटी, आईसीएआर, सीएसआईआर, ट्राइफेड, नेरामैक और त्रिपुरा सरकार की विभिन्न योजनाओं का समन्वय किया जाएगा। यह बहु-मंत्रालयी ढाँचा पूर्वोत्तर की कृषि नीति में एक नई संस्थागत परिपक्वता का संकेत देता है।
आगे की राह
यह मिशन ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के किसान लंबे समय से अपनी विशेष उपज के लिए उचित मूल्य और बाज़ार तक पहुँच की माँग कर रहे हैं। तीन वर्षीय कार्ययोजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल त्रिपुरा, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक दोहराने योग्य कृषि-निर्यात मॉडल तैयार हो सकता है।