त्रिपुरा बनेगा दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेशद्वार, सिंधिया ने निवेशकों को दिया आमंत्रण
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 9 जुलाई 2026 को वर्चुअल माध्यम से 'डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026' को संबोधित करते हुए देश-विदेश के उद्योग जगत से त्रिपुरा में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा आज पूर्वोत्तर के सबसे संभावनाशील निवेश गंतव्यों में से एक बनकर उभर रहा है और 67 करोड़ से अधिक आबादी वाले आसियान बाज़ार तक भारत की पहुँच का रणनीतिक द्वार बन रहा है।
एक्ट ईस्ट नीति और त्रिपुरा की बदलती भूमिका
सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक्ट ईस्ट' नीति ने पूर्वोत्तर को देश की सीमांत भूमि से बदलकर दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेशद्वार के रूप में स्थापित किया है। उनके अनुसार, इस नीति से व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय संपर्क के अभूतपूर्व अवसर सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक समय भू-आवेष्ठित माना जाने वाला त्रिपुरा आज बंगाल की खाड़ी तक पहुँच का प्रमुख द्वार बन रहा है।
प्रमुख अवसंरचना परियोजनाएँ
केंद्रीय मंत्री ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उल्लेख किया जो त्रिपुरा को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत के निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं। इनमें भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग, कालादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना, सबरूम विशेष आर्थिक क्षेत्र, मैत्री सेतु और एकीकृत चेक पोस्ट प्रमुख हैं। सिंधिया ने कहा, "निवेश विश्वास का अनुसरण करता है, विश्वास अधोसंरचना का और अधोसंरचना दूरदृष्टि का परिणाम होती है।"
त्रिपुरा के प्राकृतिक संसाधन और औद्योगिक संभावनाएँ
मंत्री ने बताया कि त्रिपुरा प्राकृतिक गैस, बांस, अगरवुड, रबर, चाय, मसालों और बागवानी उत्पादों जैसे संसाधनों से समृद्ध है। देश का सबसे बड़ा बांस उत्पादक और प्राकृतिक रबर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने के कारण राज्य में विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, लॉजिस्टिक्स, निर्यात और तकनीक-आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में भारत का तीसरा अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट गेटवे भी स्थित है।
मुख्यमंत्री साहा के नेतृत्व में विकास की रफ़्तार
सिंधिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा के नेतृत्व में त्रिपुरा बेहतर संपर्क, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल वातावरण वाले राज्य के रूप में तेज़ी से विकसित हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अष्टलक्ष्मी राज्य भारत की अगली आर्थिक विकास यात्रा का नेतृत्व करेंगे और त्रिपुरा इस परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यह कॉन्क्लेव इस बात का प्रमाण है कि राज्य दीर्घकालिक निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है।