त्रिपुरा ग्लोबल पाइनएप्पल फेस्टिवल 2026: दिल्ली में उद्घाटन, मोदी ने 'एक्ट ईस्ट' नीति को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में 27 जून 2026 को तीन दिवसीय त्रिपुरा ग्लोबल पाइनएप्पल फेस्टिवल एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ, जिसका उद्देश्य त्रिपुरा के प्रसिद्ध क्वीन पाइनएप्पल (रानी अनानास) को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में नई पहचान दिलाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में पिछले 12 वर्षों में एनडीए सरकार की 'एक्ट ईस्ट, एक्ट फास्ट और एक्ट फर्स्ट' नीति के तहत पूर्वोत्तर के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही।
महोत्सव का उद्देश्य और स्वरूप
यह महोत्सव 27 से 29 जून 2026 तक चलेगा। इसमें किसान, उद्यमी, निर्यातक, शोधकर्ता, उद्योगपति और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच पर लाया गया है, ताकि अनानास की मूल्य श्रृंखला को मज़बूत किया जा सके और नए बाज़ारों तक पहुँच बनाई जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस तरह के सहयोग से नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा और किसानों के लिए अधिक अवसर उत्पन्न होंगे।
क्वीन पाइनएप्पल और जीआई टैग की अहमियत
त्रिपुरा का 'क्वीन पाइनएप्पल' अपनी विशिष्ट सुगंध और मिठास के लिए देशभर में जाना जाता है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में रेखांकित किया कि इस उत्पाद को मिला जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग त्रिपुरा की समृद्ध कृषि विरासत की महत्वपूर्ण स्वीकृति है। गौरतलब है कि जीआई टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक विशिष्टता को कानूनी संरक्षण देता है, जिससे उसकी ब्रांड वैल्यू और निर्यात क्षमता दोनों बढ़ती हैं।
उद्घाटन समारोह में प्रमुख उपस्थिति
उद्घाटन समारोह में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) के राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार शामिल हुए। मुख्यमंत्री साहा ने प्रधानमंत्री मोदी का संदेश अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर साझा किया।
पूर्वोत्तर विकास की व्यापक तस्वीर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एनडीए सरकार ने पूर्वोत्तर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा का उपयोग कर इस क्षेत्र की अपार क्षमता को उजागर करने का प्रयास किया है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि-आधारित निर्यात को बढ़ावा देना केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मोदी ने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से त्रिपुरा प्रीमियम अनानास का एक प्रमुख वैश्विक स्रोत बनकर उभरेगा और स्थानीय किसानों की आजीविका में सुधार होगा।
आगे की राह
महोत्सव के दौरान अनानास आधारित प्रसंस्करण उद्योग, निर्यात नीति और किसान-उद्यमी साझेदारी पर विशेष सत्र आयोजित किए जाने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस महोत्सव के बाद ठोस नीतिगत और बाज़ार-संपर्क कदम उठाए जाएँ, तो त्रिपुरा का अनानास क्षेत्र अगले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय निर्यात वृद्धि दर्ज कर सकता है।