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जमुई छेड़छाड़ कांड: 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR, मुख्य आरोपी नंदन यादव गिरफ्तार

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जमुई छेड़छाड़ कांड: 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR, मुख्य आरोपी नंदन यादव गिरफ्तार

सारांश

बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ का वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने सिर्फ आरोपियों को नहीं, वीडियो शेयर करने वाले 120 सोशल मीडिया प्रोफाइलों पर भी FIR दर्ज कर दी। मुख्य आरोपी गिरफ्तार, एक फरार; SIT जांच शुरू।

मुख्य बातें

जमुई-लखीसराय मार्ग के मड़वा पहाड़ क्षेत्र में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ की घटना शनिवार देर शाम हुई।
मुख्य आरोपी नंदन यादव और रामआशीष चौधरी गिरफ्तार; आरोपी हरे राम यादव अभी फरार।
विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 120 प्रोफाइलों के विरुद्ध FIR दर्ज, पॉक्सो एक्ट , IT अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत।
तीन किशोर हिरासत में; कुल 7-8 युवकों और 2 अन्य संदिग्धों की पहचान।
मामले की जांच के लिए SIT गठित; ADG (कानून-व्यवस्था) के.एस.
अनुपम ने सभी आरोपियों को पकड़ने के निर्देश दिए।

बिहार के जमुई ज़िले में जमुई-लखीसराय मार्ग के मड़वा पहाड़ क्षेत्र में दो नाबालिग छात्राओं से छेड़छाड़ और उत्पीड़न के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी नंदन यादव सहित रामआशीष चौधरी को गिरफ्तार किया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और अब तक विभिन्न प्लेटफॉर्म पर 120 सोशल मीडिया प्रोफाइलों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम

यह घटना शनिवार देर शाम मड़वा पहाड़ क्षेत्र में घटित हुई, जब कुछ युवकों ने एक नाबालिग छात्रा को रोककर उसके साथ छेड़छाड़ की और उसके साथ मौजूद एक छात्र के साथ मारपीट की। रविवार शाम सोशल मीडिया पर वीडियो फैलने के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद जमुई प्रशासन ने पीड़िता के परिवार से संपर्क कर एफआईआर दर्ज की।

वायरल वीडियो में सिर पर नारंगी गमछा बांधे दिखाई दे रहे मुख्य आरोपी नंदन यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, एक अन्य आरोपी हरे राम यादव अभी फरार है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस ने बताया कि अब तक सात से आठ युवकों की पहचान की जा चुकी है और तीन किशोरों को कानून के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR — क्यों?

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो शेयर करने वालों ने नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर की, जो कानूनी रूप से गंभीर अपराध है। जमुई के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने कहा कि किसी नाबालिग की पहचान उजागर करने वाली सामग्री को दिखाना या प्रसारित करना गंभीर अपराध है। इसके लिए पॉक्सो एक्ट, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत जमुई सदर थाना में मामले दर्ज किए गए हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बिहार पुलिस ने वायरल वीडियो शेयर करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा हो, लेकिन 120 प्रोफाइलों के विरुद्ध एकसाथ FIR एक असामान्य रूप से बड़ी कार्रवाई है। यह ऐसे समय में आई है जब देशभर में नाबालिगों से जुड़े वीडियो के प्रसार को लेकर न्यायालयों और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से कड़े दिशानिर्देश जारी हो चुके हैं।

SIT गठन और जांच की दिशा

मामले की विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस घटना की परिस्थितियों, चिन्हित आरोपियों की भूमिका और वीडियो रिकॉर्ड तथा प्रसारित किए जाने के स्रोत की जांच कर रही है। अपर महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) के.एस. अनुपम ने कहा कि अपराध में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।

पुलिस सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए वीडियो को हटवाने के प्रयास भी कर रही है। एसपी दयाल ने जांच निष्पक्ष रूप से जारी रहने की पुष्टि की है।

आम जनता से अपील

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे नाबालिग पीड़िता की पहचान या निजी जानकारी उजागर करने वाली कोई भी फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर साझा न करें। अधिकारियों ने चेताया कि ऐसा करना न केवल पीड़िता के लिए आघातजनक है, बल्कि FIR और गिरफ्तारी का कारण भी बन सकता है।

फरार आरोपी हरे राम यादव की गिरफ्तारी के बाद SIT की जांच अगले निर्णायक चरण में प्रवेश करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर दर्ज मामलों में अभियोजन कितना आगे बढ़ेगा — बिहार में ऐसे साइबर मामलों में सज़ा की दर ऐतिहासिक रूप से कम रही है। वायरल वीडियो शेयर करने वालों पर कानूनी कार्रवाई का संदेश सही है, पर इसकी विश्वसनीयता तभी बनेगी जब इनमें से कुछ मामले सज़ा तक पहुँचें। इसके साथ ही यह प्रश्न भी उठता है कि प्रशासन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर वीडियो हटवाने में कितना प्रभावी रहेगा, जहाँ टेकडाउन की प्रक्रिया अक्सर धीमी होती है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमुई नाबालिग छेड़छाड़ मामला क्या है?
बिहार के जमुई-लखीसराय मार्ग पर मड़वा पहाड़ क्षेत्र में शनिवार देर शाम कुछ युवकों ने एक नाबालिग छात्रा को रोककर उसके साथ छेड़छाड़ की और साथ मौजूद छात्र से मारपीट की। रविवार को वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने FIR दर्ज की और गिरफ्तारियाँ शुरू हुईं।
120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR क्यों दर्ज की गई?
इन प्रोफाइलों ने घटना का वीडियो शेयर किया, जिससे नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक हो गई। पॉक्सो एक्ट, IT अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत नाबालिग की पहचान उजागर करना दंडनीय अपराध है।
इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
अब तक मुख्य आरोपी नंदन यादव और रामआशीष चौधरी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि हरे राम यादव फरार है। इसके अलावा तीन किशोरों को हिरासत में लिया गया है और 7-8 युवकों की पहचान की जा चुकी है।
SIT का गठन क्यों किया गया और वह क्या जांच कर रही है?
मामले की संवेदनशीलता और व्यापकता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। SIT घटना की परिस्थितियाँ, आरोपियों की भूमिका और वीडियो रिकॉर्ड तथा प्रसारित किए जाने के स्रोत की जांच कर रही है।
क्या नागरिक इस वीडियो को शेयर कर सकते हैं?
नहीं। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली कोई भी फोटो, वीडियो या सामग्री शेयर करना पॉक्सो एक्ट और IT अधिनियम के तहत दंडनीय है, जिसके लिए FIR और गिरफ्तारी हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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