जमुई पीड़िता की पहचान उजागर: तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी के खिलाफ पॉक्सो कार्रवाई की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने 25 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट से साझा की गई एक तस्वीर में जमुई की नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर हो गई — जो बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के तहत गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने बिहार पुलिस से मुख्यमंत्री के विरुद्ध वही कानूनी कार्रवाई करने की माँग की जो अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले से की जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना स्थित अपने आधिकारिक आवास पर पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की। इस दौरान एक तस्वीर के साथ परिवार को शीघ्र न्याय का आश्वासन देते हुए एक संदेश सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार त्वरित सुनवाई के ज़रिये दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलवाएगी।
बाद में वह पोस्ट हटा लिया गया, परंतु उसका स्क्रीनशॉट तब तक ऑनलाइन व्यापक रूप से प्रसारित हो चुका था। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार पुलिस ने हमले के वीडियो के प्रसार के संबंध में 120 सोशल मीडिया खातों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं और नाबालिग की पहचान उजागर करने वाली सामग्री साझा करने के विरुद्ध सार्वजनिक चेतावनी जारी की है।
तेजस्वी की कानूनी चुनौती
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने तर्क दिया कि जब आम नागरिकों पर पॉक्सो के तहत कार्रवाई हो रही है, तो मुख्यमंत्री के अकाउंट से की गई पोस्ट पर भी वही कानूनी मानक लागू होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो वे न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएँगे और बिहार पुलिस को भी कार्यवाही में पक्षकार बनाने की माँग करेंगे।
गौरतलब है कि हटाए गए सोशल मीडिया पोस्ट पर पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध बनता है या नहीं, यह अंततः तथ्यों की जाँच और सक्षम अधिकारियों अथवा न्यायालय के विवेक पर निर्भर करेगा।
चिराग पासवान की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया
तेजस्वी यादव ने केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी-राम विलास के प्रमुख चिराग पासवान की जमुई छेड़छाड़ घटना पर की गई टिप्पणी का भी जवाब दिया, हालाँकि उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया का मुख्य केंद्र मुख्यमंत्री के कथित पॉक्सो उल्लंघन को ही रखा।
कानूनी और राजनीतिक संदर्भ
पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान उजागर करना — चाहे वह किसी भी माध्यम से हो — दंडनीय अपराध है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकरण ने राजनीतिक दलों के बीच 'पीड़ित के साथ एकजुटता' दिखाने की होड़ में कानूनी संवेदनशीलता के प्रति लापरवाही को उजागर किया है।
यह पूरा विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जमुई घटना पहले से ही बिहार में राजनीतिक तनाव का केंद्र बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि बिहार पुलिस और न्यायपालिका इस मामले में किस दिशा में कदम उठाते हैं।