25 सितंबर 2026
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जमुई नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने पर CMO स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ FIR की मांग

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जमुई नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने पर CMO स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ FIR की मांग

सारांश

जमुई में नाबालिग पीड़िता की तस्वीर एक्स पर अपलोड करने का आरोप CMO कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद पर है। पटना सचिवालय थाने में FIR की मांग को लेकर दायर शिकायत में POCSO, IT अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई माँगी गई है — मामले को प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर संवेदनशील बना रहा है।

मुख्य बातें

19 सितंबर 2026 को जमुई में नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की घटना हुई थी।
25 सितंबर 2026 को पटना सचिवालय थाने में CMO स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ FIR दर्ज करने का आवेदन दिया गया।
आरोप है कि पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर एक्स (X) पर अपलोड की गई, जो बाद में अन्य प्लेटफॉर्म पर भी वायरल हुई।
शिकायत पुलिस अवर निरीक्षक अमिता कुमारी की ओर से दर्ज कराई गई।
POCSO अधिनियम 2012 , भारतीय न्याय संहिता 2023 और IT अधिनियम 2000 के तहत FIR की मांग की गई है।
पोस्ट को आगे प्रसारित करने वाले अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं पर भी कार्रवाई की मांग की गई है।

पटना में 25 सितंबर 2026 को सचिवालय थाने में एक अहम शिकायत पत्र दाखिल किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। आरोप है कि जमुई में एक नाबालिग पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपलोड की गई, जिससे पीड़िता की पहचान उजागर होने का गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ।

मूल घटना: 19 सितंबर को जमुई में क्या हुआ

19 सितंबर 2026 को जमुई जिले में एक नाबालिग लड़की और उसके साथी के साथ छेड़छाड़, अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट की घटना हुई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जमुई प्रशासन द्वारा विधिसम्मत कार्रवाई की गई थी। यह मामला पहले से ही संवेदनशील था, क्योंकि इसमें एक नाबालिग पीड़िता की सुरक्षा और गोपनीयता का सवाल था।

शिकायत में क्या आरोप लगाए गए

सचिवालय थाने में पदस्थापित पुलिस अवर निरीक्षक अमिता कुमारी की ओर से 25 सितंबर को आवेदन दायर किया गया। आवेदन में कहा गया कि सत्यापन के दौरान एक्स पर पीड़िता की तस्वीर अपलोड करने का संबंध CMO कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद से पाया गया। इसके बाद वह तस्वीर अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित और वायरल होती रही, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

कानूनी आधार: कौन-कौन सी धाराएँ लगाई जा सकती हैं

शिकायत पत्र में भारतीय न्याय संहिता, 2023, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज करने का अनुरोध किया गया है। आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना POCSO अधिनियम का सीधा उल्लंघन है, जो ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान गुप्त रखना अनिवार्य बनाता है।

अन्य प्रसारकों पर भी कार्रवाई की मांग

आवेदन केवल सागर प्रसाद तक सीमित नहीं है। पुलिस अधिकारी ने उन सभी व्यक्तियों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है जिन्होंने संबंधित पोस्ट को आगे साझा या वायरल किया। गौरतलब है कि नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामलों में पीड़ित की पहचान उजागर करना अपराध है और इसमें जानकारी फैलाने वाले हर व्यक्ति पर कार्रवाई हो सकती है।

आगे क्या होगा

सचिवालय थाने में आवेदन दाखिल होने के बाद अब पुलिस उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की जाँच करेगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या सरकारी कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज होती है, जो इस मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमुई नाबालिग मामले में CMO स्टेनोग्राफर पर क्या आरोप है?
CMO कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद पर आरोप है कि उन्होंने जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपलोड की। सत्यापन के दौरान पुलिस ने इस पोस्ट का संबंध उनसे पाया, जिसके बाद FIR दर्ज करने का आवेदन सचिवालय थाने में दिया गया।
जमुई में 19 सितंबर को क्या घटना हुई थी?
19 सितंबर 2026 को जमुई जिले में एक नाबालिग लड़की और उसके साथी के साथ छेड़छाड़, अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट की घटना हुई थी। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद जमुई प्रशासन ने विधिसम्मत कार्रवाई की थी।
इस मामले में कौन-कौन से कानून लागू होते हैं?
शिकायत में भारतीय न्याय संहिता 2023, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) 2012 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज करने की माँग की गई है। POCSO के तहत नाबालिग पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करना स्वयं एक दंडनीय अपराध है।
क्या केवल सागर प्रसाद के खिलाफ कार्रवाई की माँग है?
नहीं, शिकायत में सागर प्रसाद के अलावा उन सभी व्यक्तियों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग की गई है जिन्होंने संबंधित पोस्ट को आगे साझा या वायरल किया। पुलिस उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर जाँच करेगी।
शिकायत किसने और कहाँ दर्ज कराई?
शिकायत पत्र सचिवालय थाने में पदस्थापित पुलिस अवर निरीक्षक अमिता कुमारी की ओर से 25 सितंबर 2026 को पटना के सचिवालय थाने में दिया गया। इसमें FIR दर्ज कर मामले में कानूनी कार्रवाई की माँग की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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