26 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ज्ञानेश कुमार विवाद: बिहार BJP अध्यक्ष सरावगी बोले — चुनाव आयोग पर सवाल विपक्ष की पुरानी आदत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ज्ञानेश कुमार विवाद: बिहार BJP अध्यक्ष सरावगी बोले — चुनाव आयोग पर सवाल विपक्ष की पुरानी आदत

सारांश

सीईसी ज्ञानेश कुमार विवाद पर बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने विपक्ष को घेरा — कांग्रेस-राजद पर आरोप लगाया कि एसआईआर विरोध राजनीतिक जमीन खिसकने का डर है। जमुई मामले पर कहा — 24 घंटे में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, दोषी कर्मचारी पर पोक्सो दर्ज।

मुख्य बातें

बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने 26 सितंबर 2026 को कहा कि चुनाव आयोग पर सवाल उठाना विपक्ष की पुरानी राजनीतिक आदत है।
सरावगी के अनुसार कांग्रेस और राजद एसआईआर का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनकी राजनीतिक जमीन खिसक रही है।
जमुई छेड़छाड़ मामले में 8 घंटे के भीतर 3 आरोपी और 24 घंटे में मुख्य आरोपी गिरफ्तार; जिम्मेदार कर्मचारी पर पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज।
जदयू नेता राजीव रंजन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका का हवाला देते हुए न्यायालय के निर्देश का इंतजार करने की सलाह दी।
UP मंत्री संजय निषाद ने कहा — जाँच से पहले बयान या आंदोलन उचित नहीं, देश-दुनिया में नकारात्मक संदेश न जाए।

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने 26 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को लेकर उठे विवाद पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया और कहा कि चुनाव आयोग पर प्रश्न खड़े करना कांग्रेस और राजद की पुरानी राजनीतिक आदत है। सरावगी की यह प्रतिक्रिया तब आई जब विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और सीईसी की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे।

सरावगी का विपक्ष पर तीखा हमला

संजय सरावगी ने कहा, 'कांग्रेस और राजद, एसआईआर का विरोध इसलिए कर रही है, क्योंकि उनकी राजनीतिक जमीन खिसक रही है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना आवश्यक है।

सरावगी ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा, 'जिन जगहों पर एसआईआर में विपक्षी उम्मीदवार जीते, वहां के बारे में उनका क्या कहना है?' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विपक्ष शुरू से ही चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाता रहा है, जो उनके अनुसार हार की राजनीति को छिपाने का प्रयास है।

जमुई छेड़छाड़ मामले पर सरावगी की सफाई

जमुई में छेड़छाड़ की पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने को लेकर उठे विवाद पर सरावगी ने कहा कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि जैसे ही मामले की जानकारी मिली, आठ घंटे के भीतर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और मुख्य आरोपी को 24 घंटे के भीतर पकड़ा गया।

मुख्यमंत्री के कार्यालय द्वारा पीड़िता की तस्वीर पोस्ट किए जाने की लापरवाही पर सरावगी ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है और उस पर पोक्सो एक्ट के तहत मामला भी दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को कार्रवाई की पूरी छूट दी गई है।

जदयू नेता ने न्यायपालिका का दिया हवाला

जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन ने सीईसी विवाद पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मसले पर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। उन्होंने कहा, 'इसलिए कोई भी प्रतिक्रिया देने से पहले न्यायपालिका की सर्वोच्च अदालत के निर्देशों का इंतजार करना उचित होगा।' यह टिप्पणी बताती है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी इस मुद्दे पर सतर्कता बरती जा रही है।

उत्तर प्रदेश के मंत्री निषाद ने की संस्था की तारीफ

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए कहा कि यह 'विश्वास पात्र संस्था' है और देश-दुनिया में इसके प्रति नकारात्मक संदेश नहीं जाना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि किसी के कहने या मान लेने मात्र से अपराध तय नहीं होता — यह जाँच का विषय है और जाँच के बाद ही बयान या आंदोलन होना चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों ने हाल के हफ्तों में तीखे सवाल उठाए हैं, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता और उनकी नियुक्ति की वैधानिकता प्रमुख मुद्दे रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में आगामी चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया राजनीतिक दलों के बीच तनाव का केंद्र बन गई है। सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका के फैसले का इंतजार अब सभी पक्षों को है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्ता पक्ष विपक्ष की 'पुरानी आदत' को ढाल बना लेता है। लेकिन असली सवाल यह है कि एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता और सीईसी नियुक्ति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका क्यों पहुँची? जमुई मामले में पुलिस की तत्परता की तारीफ जायज है, पर पीड़िता की तस्वीर मुख्यमंत्री कार्यालय से वायरल होने की जवाबदेही महज एक कर्मचारी पर डालकर नहीं टाली जा सकती। संस्थागत विश्वसनीयता बचाने का सबसे कारगर तरीका पारदर्शी जाँच है, न कि विपक्ष पर आरोप।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीईसी ज्ञानेश कुमार विवाद क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं और सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति करार दिया है।
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
सरावगी ने कहा कि कांग्रेस और राजद एसआईआर का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनकी राजनीतिक जमीन खिसक रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष शुरू से ही चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाता रहा है।
जमुई छेड़छाड़ मामले में क्या कार्रवाई हुई?
सरावगी के अनुसार पुलिस को मामले की जानकारी मिलने के 8 घंटे के भीतर तीन आरोपियों को और 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जदयू ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
जदयू नेता राजीव रंजन ने सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर है, इसलिए न्यायालय के निर्देश का इंतजार करना उचित होगा। उन्होंने सीधे तौर पर किसी का पक्ष लेने से परहेज किया।
UP मंत्री संजय निषाद ने चुनाव आयोग विवाद पर क्या कहा?
संजय निषाद ने चुनाव आयोग को 'विश्वास पात्र संस्था' बताते हुए कहा कि जाँच से पहले बयानबाजी या आंदोलन उचित नहीं है। उन्होंने चेताया कि देश और दुनिया में संस्था के बारे में नकारात्मक संदेश नहीं जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 22 घंटे पहले
  2. कल
  3. 3 दिन पहले
  4. 4 दिन पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले