मंगलुरु में भारी बारिश के दौरान मलबे में दबा मकान, दो बच्चियों समेत तीन की मौत; तीन घायल
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मंगलुरु में 1 जुलाई 2026 की सुबह करीब 4.30 बजे भारी बारिश के बीच एक ऊँचाई पर बने घर की कंपाउंड वॉल ढहने से नीचे बने टाइल-छत वाले मकान का पिछला हिस्सा पूरी तरह से बैठ गया, जिसमें एक महिला और दो बच्चियों की मौके पर ही मौत हो गई। तीन अन्य लोग — एक पुरुष और दो लड़कियाँ — घायल अवस्था में मलबे से जीवित निकाले गए और अस्पताल में उनका उपचार जारी है; अधिकारियों के अनुसार वे खतरे से बाहर हैं।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
यह दुर्घटना मंगलुरु के नागोरी इलाके में कंकनाडी पुलिस स्टेशन के पीछे हुई। रात भर हो रही मूसलाधार बारिश के कारण ऊँचाई पर स्थित एक मकान की कंपाउंड वॉल कमज़ोर पड़ गई और भोर में अचानक ढह गई। इसका मलबा नीचे बनी चार अलग-अलग इमारतों पर जा गिरा, जिनमें से एक टाइल-छत वाले घर का पिछला हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया।
घर में सो रहे परिवार के सदस्य मलबे में दब गए। एक स्थानीय निवासी ने बताया, 'सुबह लगभग 4.30 बजे का समय था और लोग घरों में सो रहे थे। अचानक मैंने एक तेज़ आवाज़ सुनी। उठकर देखा तो बच्चे मलबे में दबे हुए थे। बाहर आकर देखा तो कोई नज़र नहीं आया — सभी लोग अंदर मलबे में दबे थे।'
बचाव अभियान
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय निवासी और कंकनाडी पुलिस मौके पर पहुँचे। इसके बाद अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा के कर्मी भी तैनात किए गए। स्थानीय निवासी के अनुसार, घटना के लगभग एक घंटे बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम मौके पर पहुँची, जिसके बाद बचाव कार्य में तेज़ी आई।
लगातार चले बचाव अभियान में एक पुरुष और दो लड़कियों को जीवित मलबे से बाहर निकाला गया और उन्हें तत्काल अस्पताल भेजा गया। हालाँकि, एक महिला और दो बच्चियों को मलबे से जीवित नहीं निकाला जा सका — उनके शव बरामद किए गए। अधिकारियों ने पुष्टि की कि मलबे में दबे सभी लोगों का पता लगा लिया गया है और अभियान आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया गया।
आम जनता पर असर
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब कर्नाटक के तटीय ज़िलों में मानसून की भारी बारिश जारी है और मंगलुरु समेत कई इलाकों में जलभराव तथा भूस्खलन की चेतावनियाँ जारी की गई हैं। गौरतलब है कि पुरानी और कमज़ोर इमारतें, खासकर टाइल-छत वाले पारंपरिक घर, भारी बारिश में अतिरिक्त जोखिम में रहते हैं।
स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक मुआवज़े या पुनर्वास की कोई घोषणा नहीं की गई है। प्रभावित परिवारों के लिए राहत की माँग उठ रही है।
क्या होगा आगे
पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि कंपाउंड वॉल की संरचनात्मक स्थिति पहले से कमज़ोर थी या नहीं। अधिकारियों के अनुसार, आसपास की इमारतों का सर्वेक्षण भी किया जाएगा ताकि आगे किसी और हादसे से बचा जा सके। मानसून के मौसम में ऐसी जर्जर संरचनाओं की पहचान और उन्हें खाली कराने की प्रक्रिया तेज़ किए जाने की संभावना है।