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महाराष्ट्र में मानसून का कहर: 1 जून से 8 जुलाई के बीच 63 मौतें, 78 घायल

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महाराष्ट्र में मानसून का कहर: 1 जून से 8 जुलाई के बीच 63 मौतें, 78 घायल

सारांश

महाराष्ट्र में मानसून ने 38 दिनों में 63 जिंदगियाँ लील लीं — दीवारें गिरीं, बिजली कड़की, ज़मीन खिसकी। पुणे में 47 साल पुराना कचरे का पहाड़ एक इमारत पर गिरा, 23 लोग अब भी मलबे में हैं। सरकार राहत में जुटी है, पर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र में 1 जून से 8 जुलाई 2026 के बीच मानसून से जुड़ी घटनाओं में 63 मौतें और 78 घायल ।
दीवार गिरने से 25 , बिजली गिरने से 23 , भूस्खलन और पेड़ गिरने से 6-6 और बाढ़ में डूबने से 3 मौतें।
मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख प्रति परिवार की वित्तीय सहायता वितरित।
पुणे के कचरा डिपो में 635 मिमी बारिश के बाद 47 साल पुराना कचरा ढेर गिरा; 23 लोग मलबे में फंसे, बचाव जारी।
पालघर में 1,000 नागरिकों को राहत सामग्री; विस्थापितों को 15 दिन के राशन किट उपलब्ध।
200 मवेशियों की भी मौत, 10 घायल ।

महाराष्ट्र में 1 जून से 8 जुलाई 2026 के बीच भारी बारिश और मानसून से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में कम से कम 63 लोगों की मौत हो गई और 78 अन्य घायल हुए। आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने यह जानकारी महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के संक्षिप्त प्रश्न के उत्तर में दी।

मौतों का विस्तृत विवरण

मंत्री महाजन द्वारा सदन में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, दीवार गिरने से सबसे अधिक 25 मौतें हुईं। इसके बाद बिजली गिरने से 23, भूस्खलन से 6, पेड़ गिरने से 6 और बाढ़ में डूबने से 3 लोगों की जान गई। इसके अतिरिक्त इस अवधि में 200 मवेशियों की मौत हुई और 10 घायल हुए।

सरकार ने आधिकारिक मानदंडों के अनुसार मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख प्रति परिवार की वित्तीय सहायता वितरित की है।

पुणे कचरा डिपो त्रासदी

मंत्री महाजन ने पुणे के एक कचरा डिपो में हुई हालिया त्रासदी का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार यह हादसा 47 साल पुराने जमा कचरे के विशाल ढेर के कारण हुआ। उस क्षेत्र में मात्र डेढ़ दिन में 635 मिमी भारी बारिश दर्ज की गई, जिसके कारण लगभग एक साल पहले बनी एक इमारत पर कचरे का ढेर गिर गया। मंत्री ने सदन को बताया कि मलबे के नीचे 23 लोग फंसे हुए हैं और बचाव अभियान तेज़ गति से जारी है।

सरकार की प्रतिक्रिया और राहत कार्य

मंत्री महाजन ने राज्य सरकार की आपदा प्रतिक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में कोई चूक नहीं हुई है। उन्होंने विपक्ष से एकजुटता की अपील करते हुए कहा, 'मैं पिछले पाँच दिनों से व्यक्तिगत रूप से विभिन्न प्रभावित जिलों का दौरा कर रहा हूँ। जब राज्य संकट में होता है, तो हमें एकजुट होना चाहिए। जनता संकट में हो, तब राजनीति को एक तरफ रखना बेहद ज़रूरी है।'

राज्य सरकार ने विस्थापितों की सहायता के लिए 15 दिनों के लिए पर्याप्त राशन किट उपलब्ध कराए हैं। केवल पालघर जिले में ही 1,000 नागरिकों को राहत सामग्री वितरित की जा चुकी है।

असामान्य मौसम का प्रकोप

मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र में इस समय असामान्य मौसम की स्थिति है, जहाँ एक महीने के बराबर बारिश कुछ ही दिनों में हो रही है। इसके चलते कई शहरों में सड़कें जलमग्न हो गई हैं, घरों में पानी भर गया है और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मानसून की तीव्रता सामान्य से अधिक दर्ज की जा रही है। आने वाले दिनों में राहत और पुनर्वास कार्यों की गति पर सरकार की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जवाबदेही और राजनीति दो अलग चीज़ें हैं। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार हर साल मुआवज़ा बाँटने से आगे बढ़कर बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरियों को दूर करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगी।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में मानसून से कितनी मौतें हुई हैं?
आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन के अनुसार, 1 जून से 8 जुलाई 2026 के बीच मानसून से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 63 लोगों की मौत हुई और 78 घायल हुए। इनमें दीवार गिरने से 25, बिजली गिरने से 23, भूस्खलन और पेड़ गिरने से 6-6 और बाढ़ में डूबने से 3 मौतें शामिल हैं।
मृतकों के परिवारों को क्या मुआवज़ा मिलेगा?
राज्य सरकार ने आधिकारिक मानदंडों के अनुसार मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख प्रति परिवार की वित्तीय सहायता वितरित की है। यह मुआवज़ा आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने विधानसभा में स्वीकार किया।
पुणे के कचरा डिपो में क्या हुआ?
पुणे के एक कचरा डिपो में 47 साल पुराने जमा कचरे का विशाल ढेर एक इमारत पर गिर गया। उस क्षेत्र में मात्र डेढ़ दिन में 635 मिमी बारिश हुई थी, जिससे यह हादसा हुआ। मलबे के नीचे 23 लोग फंसे हुए हैं और बचाव अभियान जारी है।
महाराष्ट्र सरकार ने राहत के लिए क्या कदम उठाए हैं?
राज्य सरकार ने विस्थापितों को 15 दिनों के राशन किट उपलब्ध कराए हैं और पालघर जिले में 1,000 नागरिकों को राहत सामग्री वितरित की जा चुकी है। मंत्री महाजन ने स्वयं पाँच दिनों में कई प्रभावित जिलों का दौरा किया।
महाराष्ट्र में मानसून इस बार इतना खतरनाक क्यों है?
मंत्री महाजन के अनुसार, राज्य में असामान्य मौसम का प्रकोप है जहाँ एक महीने के बराबर बारिश कुछ ही दिनों में हो रही है। इससे सड़कें जलमग्न हो रही हैं, घरों में पानी भर रहा है और बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना पड़ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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