महाराष्ट्र मानसून: 1 जून से 62 मौतें, तटीय जिलों में रेड अलर्ट; ठाणे में 196.9 मिमी बारिश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में मानसून का प्रकोप 8 जुलाई को और गहरा गया, जब पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश ने तटीय और पश्चिमी जिलों में अचानक बाढ़, नदियों के उफान और इमारतों के ढहने जैसे हालात पैदा कर दिए। महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की बुधवार को जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से अब तक राज्य में 62 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 पशुओं की भी जान जा चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम: कहाँ कितनी बारिश
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के आँकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में ठाणे में सर्वाधिक 196.9 मिमी, पालघर में 185.4 मिमी, रायगढ़ में 134.1 मिमी, मुंबई उपनगर में 125.0 मिमी और पुणे में 69.4 मिमी बारिश दर्ज की गई।
संचयी वर्षा के लिहाज़ से स्थिति और चिंताजनक है — 1 जून से अब तक लगभग सभी जिले 'लार्ज एक्सेस' श्रेणी में पहुँच चुके हैं। पालघर में सामान्य से 457.3 प्रतिशत और पुणे में 435.4 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
मौतों का ब्यौरा: कारण और प्रभावित क्षेत्र
SDMA के अनुसार, पिछले पाँच हफ्तों में हुई 62 मौतों में सबसे अधिक जानें इमारतों और दीवारों के ढहने तथा आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में गई हैं। संरचनाओं के ढहने से 25 लोगों की मौत हुई और 41 लोग घायल हुए — ये घटनाएँ मुख्यतः नासिक, ठाणे और मुंबई उपनगर में हुईं।
बिजली गिरने की घटनाओं में 23 लोगों की जान गई और 17 लोग घायल हुए। राज्य में मारे गए 200 पशुओं में से 181 की मौत भी बिजली गिरने के कारण हुई। भूस्खलन और मलबा खिसकने की घटनाओं में 6 मौतें और 4 घायल हुए — इन घटनाओं का केंद्र सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी, रायगढ़, सतारा और पुणे के पहाड़ी इलाके रहे। पेड़ गिरने से 6 लोगों की मौत हुई, जबकि बाढ़ के कारण 2 लोगों की जान गई।
नदियाँ उफान पर, निकासी जारी
लगातार भारी वर्षा के चलते राज्य की कई प्रमुख नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन ने निचले इलाकों के गाँवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का काम शुरू कर दिया है। हाल की घटनाओं में मुंबई उपनगर में दीवार गिरने से एक व्यक्ति घायल हुआ, जबकि रत्नागिरी में पेड़ गिरने से दो लोग घायल हो गए।
समुद्री तट के लिए रेड अलर्ट
भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) ने महाराष्ट्र के पूरे समुद्री तट के लिए मध्यरात्रि तक रेड अलर्ट जारी किया है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने समुद्र तट के पास सभी मनोरंजक गतिविधियाँ पूरी तरह बंद रखने की सलाह दी है। छोटी मछली पकड़ने वाली नौकाओं और व्यावसायिक जहाज़ों को समुद्र में न उतरने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून अभी अपने चरम की ओर बढ़ रहा है और जुलाई-अगस्त महाराष्ट्र में सर्वाधिक वर्षा वाले महीने होते हैं। गौरतलब है कि पालघर और पुणे में सामान्य से चार गुना से भी अधिक बारिश हो चुकी है, जो आने वाले हफ्तों में राहत एवं बचाव कार्यों पर और दबाव बढ़ा सकती है। प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी रखा है और स्थिति पर निरंतर नज़र रखी जा रही है।