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भारत पारंपरिक चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बनने की राह पर: BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी

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भारत पारंपरिक चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बनने की राह पर: BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी

सारांश

BJP राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि WHO का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र जामनगर में स्थापित होने के साथ भारत इस क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करने की स्थिति में है। उन्होंने 2016 के नोबेल पुरस्कार और भारत की उपवास परंपरा का हवाला देते हुए पारंपरिक ज्ञान के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण की जरूरत पर बल दिया।

मुख्य बातें

WHO के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र का मुख्यालय गुजरात के जामनगर में स्थापित किया गया है।
BJP राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 7 जुलाई को भारत को पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की वकालत की।
जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओसुमी को 2016 में ऑटोफैगी शोध के लिए नोबेल पुरस्कार मिला; त्रिवेदी ने इसे भारत की उपवास परंपरा से जोड़ा।
भारत आज अमेरिका में उपयोग होने वाली लगभग 40% जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है।
चीन के अलावा भारत एकमात्र देश है जो बड़े पैमाने पर उच्च-स्तरीय आईफोन का उत्पादन कर रहा है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 7 जुलाई को नई दिल्ली में कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने देश की सदियों पुरानी चिकित्सा परंपराओं को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कर विश्व के सामने प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

WHO का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र और भारत की भूमिका

त्रिवेदी ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र का मुख्यालय गुजरात के जामनगर में स्थापित किया गया है। उनके अनुसार, भारत अब पारंपरिक चिकित्सा के ज्ञान को प्रमाणित करने, दस्तावेज़ीकरण करने और विश्व के साथ साझा करने के एक प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार के इस दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने इस अवसर को समय रहते पहचाना।

नोबेल पुरस्कार और भारतीय उपवास परंपरा का संदर्भ

2016 के चिकित्सा एवं शरीरक्रिया विज्ञान के नोबेल पुरस्कार का उदाहरण देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओसुमी को यह सम्मान ऑटोफैगी पर उनके शोध के लिए मिला — एक ऐसी जैविक प्रक्रिया जिसके द्वारा कोशिकाएँ स्वयं को शुद्ध करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति 12 से 14 घंटे उपवास करता है, तो शरीर की कोशिकाएँ अपशिष्ट तत्वों को बाहर निकालती हैं और नई कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया में सुधार होता है।

BJP सांसद ने तर्क दिया कि भारत में सदियों से उपवास की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि यदि इस पारंपरिक ज्ञान को समय पर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कर विश्व के सामने प्रस्तुत किया जाता, तो इस प्रकार की खोज का श्रेय संभवतः भारत को ही मिलता। उन्होंने पिछली सरकारों पर देश की अंतर्निहित क्षमता के प्रति 'अज्ञानता' बरतने और पर्याप्त प्रयास न करने का आरोप भी लगाया।

वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में भारत का उभार

त्रिवेदी ने इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन निर्माण और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में भारत की प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज की नई वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में केवल तीन राष्ट्र — संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और भारत — प्रमुख शक्तियों के रूप में उभर रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि चीन के अलावा भारत आज एकमात्र ऐसा देश है जो बड़े पैमाने पर उच्च-स्तरीय आईफोन का उत्पादन कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत आज अमेरिका में उपयोग होने वाली लगभग 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है, और वैश्विक स्तर पर भारत की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

त्रिवेदी के वक्तव्य ऐसे समय में आए हैं जब वैश्विक स्तर पर पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों में रुचि तेज़ी से बढ़ रही है। गौरतलब है कि WHO के जामनगर केंद्र की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम मानी जा रही है, जो भारत को आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक पद्धतियों के वैश्विक मानक-निर्धारण में अग्रणी भूमिका दे सकती है।

आगे की राह

BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी के अनुसार, अब समय आ गया है कि भारत अपनी पारंपरिक चिकित्सा विरासत को वैज्ञानिक अनुसंधान, दस्तावेज़ीकरण और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से एक ठोस आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति में बदले। इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा के बाद, पारंपरिक चिकित्सा भारत की अगली बड़ी वैश्विक पहचान बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक वास्तविक नीतिगत प्रश्न छुपा है — WHO केंद्र की स्थापना के बाद भारत सरकार पारंपरिक चिकित्सा के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण के लिए कितना शोध बजट और संस्थागत ढाँचा खड़ा कर रही है? ऑटोफैगी और उपवास का सादृश्य भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन नोबेल-स्तरीय शोध के लिए दशकों की peer-reviewed वैज्ञानिक प्रक्रिया चाहिए, न केवल परंपरा का दावा। भारत का फार्मा क्षेत्र वाकई वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय है, परंतु पारंपरिक चिकित्सा को उसी कसौटी पर खरा उतारने की ज़िम्मेदारी केवल नीति-घोषणाओं से नहीं, ठोस शोध निवेश से पूरी होगी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

WHO का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र कहाँ स्थापित किया गया है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र का मुख्यालय गुजरात के जामनगर में स्थापित किया गया है। यह केंद्र पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के प्रमाणीकरण, दस्तावेज़ीकरण और वैश्विक साझेदारी का काम करेगा।
सुधांशु त्रिवेदी ने 2016 के नोबेल पुरस्कार का ज़िक्र क्यों किया?
BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने तर्क दिया कि जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओसुमी को ऑटोफैगी — कोशिका स्व-शुद्धि की प्रक्रिया — पर शोध के लिए 2016 का नोबेल पुरस्कार मिला, जो भारत की सदियों पुरानी उपवास परंपरा से जुड़ी है। उनका कहना है कि यदि यह ज्ञान समय पर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित होता, तो श्रेय भारत को मिल सकता था।
भारत अमेरिका को कितनी जेनेरिक दवाएँ आपूर्ति करता है?
सुधांशु त्रिवेदी के अनुसार, भारत आज अमेरिका में उपयोग होने वाली लगभग 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
क्या भारत आईफोन का उत्पादन करता है?
त्रिवेदी के अनुसार, चीन के अलावा भारत एकमात्र ऐसा देश है जो बड़े पैमाने पर उच्च-स्तरीय आईफोन का उत्पादन कर रहा है। यह भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन विनिर्माण में बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है।
भारत को पारंपरिक चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बनाने में क्या चुनौतियाँ हैं?
पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए कठोर वैज्ञानिक शोध, दस्तावेज़ीकरण और अंतरराष्ट्रीय peer-review प्रक्रिया आवश्यक है। WHO केंद्र की स्थापना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके लिए दीर्घकालिक शोध निवेश और संस्थागत ढाँचे की भी जरूरत होगी।
राष्ट्र प्रेस
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