कर्नाटक सामाजिक-आर्थिक सर्वे लागू करने पर अडिग: मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का ओबीसी अधिवेशन में ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 7 अगस्त 2026 को बेंगलुरु के ज्ञान ज्योति ऑडिटोरियम में स्पष्ट किया कि राज्य की कांग्रेस सरकार सामाजिक-आर्थिक सर्वे को ज़मीन पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के 11वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि यह सर्वे सामाजिक न्याय की दिशा में एक ठोस कदम है।
अधिवेशन में क्या बोले मुख्यमंत्री
शिवकुमार ने कहा, 'हम सभी के लिए समान जीवन और हिस्सेदारी के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहे हैं।' उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1931 के आसपास ब्रिटिश शासनकाल में भी जाति जनगणना कराई गई थी, और आज भी यह ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता राहुल गांधी भी जाति जनगणना के लिए प्रतिबद्ध हैं।
ओबीसी और पिछड़े वर्गों के लिए सरकार का रुख
मुख्यमंत्री ने बताया कि देश में पिछड़ा वर्ग लगभग 52 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, 'आपने अपनी कला, ज्ञान और मेहनत से देश का निर्माण किया है — आप ही देश के असल निर्माता हैं।' कर्नाटक में पिछड़ा वर्ग विभाग अलग से कार्यरत है और उसके लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने की बात भी उन्होंने कही। राज्य मंत्रिमंडल में दो-तिहाई मंत्री पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति-जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों से आते हैं, यह तथ्य भी उन्होंने रेखांकित किया।
ऐतिहासिक संदर्भ और राजनीतिक विरासत
शिवकुमार ने याद दिलाया कि मैसूर के शासक नलवाड़ी कृष्णराज वोडेयार के कार्यकाल में ओबीसी आरक्षण की शुरुआत हुई थी, जो कर्नाटक की प्रगतिशील परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने 73वें और 74वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का मानना था कि पंचायत से लेकर संसद तक नेतृत्व तैयार होना चाहिए। गौरतलब है कि स्थानीय निकायों में भी आरक्षण देने की प्रक्रिया जारी है।
जाति जनगणना और सामाजिक असमानता
शिवकुमार ने कहा कि जाति जनगणना के ज़रिए समाज में मौजूद असमानताओं को कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने घर-घर जाकर जनगणना की प्रक्रिया शुरू की है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में जाति जनगणना को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में लागू शिक्षा सुधार, खाद्य सुरक्षा कानून और रोज़गार गारंटी जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
आगे क्या
मुख्यमंत्री ने ओबीसी महासंघ की मांगों को समर्थन देने और पूरे देश में यह संदेश पहुँचाने की अपील की कि कर्नाटक में पिछड़े वर्गों की आवाज़ सुनी जाती है। बाबनराव के नेतृत्व में राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ की गतिविधियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संगठन बिना किसी राजनीतिक उद्देश्य के काम कर रहा है। सामाजिक-आर्थिक सर्वे को लागू करने की समयसीमा और रूपरेखा पर सरकार जल्द विस्तृत योजना सार्वजनिक कर सकती है।