कर्नाटक आदिवासी कल्याण: करजोल ने संसदीय समिति में उठाए वन धन केंद्र और वनाधिकार के अहम मुद्दे
सारांश
मुख्य बातें
चित्रदुर्ग से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री गोविंद एम. करजोल ने 21 अगस्त 2026 को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति की बैठक में कर्नाटक के आदिवासी समुदायों से जुड़े कई गंभीर मुद्दे केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखे। वन धन विकास केंद्रों की अधूरी स्थापना, लंबित अनुदान राशि और वनाधिकार अधिनियम के तहत बड़े पैमाने पर आवेदनों की अस्वीकृति — ये तीन मुद्दे बैठक में केंद्र में रहे।
वन धन विकास केंद्रों की स्थिति
करजोल ने बताया कि कर्नाटक में 140 वन धन विकास केंद्रों को स्वीकृति दी गई है, परंतु इनमें से केवल 69 केंद्र ही वर्तमान में संचालित हो रहे हैं। शेष 71 केंद्र अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं। उन्होंने मंत्रालय से देरी के कारण स्पष्ट करने और शेष केंद्रों के संचालन की समय-सीमा बताने की माँग की।
इसके अतिरिक्त, पीएम-जनमन योजना के तहत कर्नाटक के लिए 33 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 21 केंद्र चालू हैं जबकि 12 केंद्र अभी भी निष्क्रिय हैं। करजोल ने इन केंद्रों को शीघ्र प्रारंभ करने की अपील की।
लंबित अनुदान राशि का मुद्दा
करजोल ने सदन को अवगत कराया कि कर्नाटक के लिए ₹20.87 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी, किंतु अब तक केवल ₹11.86 करोड़ ही जारी किए गए हैं। इस प्रकार ₹9.01 करोड़ की राशि अभी भी लंबित है। उन्होंने मंत्रालय से यह राशि प्राथमिकता के आधार पर जल्द जारी करने का आग्रह किया, ताकि आदिवासी हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सके।
वनाधिकार आवेदनों की बड़े पैमाने पर अस्वीकृति
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में वनाधिकार अधिनियम के तहत कुल 2,95,176 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 2,62,626 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं — यानी कुल आवेदनों का लगभग 89%। केवल 16,700 आवेदनों को मंजूरी मिली है और अधिकार पत्र जारी किए गए हैं, जबकि 15,850 आवेदन अभी भी लंबित हैं।
करजोल ने इतने बड़े पैमाने पर अस्वीकृति के कारणों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने जिला-वार विस्तृत रिपोर्ट माँगी, जिसमें प्राप्त, स्वीकृत, अस्वीकृत और लंबित आवेदनों के साथ-साथ वितरित वनाधिकार पट्टों का ब्यौरा शामिल हो।
प्रदर्शन रिपोर्ट की माँग
करजोल ने संचालित 69 वन धन विकास केंद्रों की जिला-वार प्रदर्शन रिपोर्ट भी माँगी। इस रिपोर्ट में लाभार्थियों की संख्या, स्वीकृत एवं जारी राशि, व्यय का विवरण, केंद्रों की कार्य स्थिति, निर्मित उत्पाद, बिक्री का विवरण और आदिवासी समुदायों की आय संबंधी जानकारी शामिल करने की माँग रखी।
मंत्रालय का आश्वासन
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने करजोल को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई शीघ्र की जाएगी। यह देखना बाकी है कि मंत्रालय की प्रतिबद्धता ज़मीन पर कितनी जल्दी साकार होती है।