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कर्नाटक आदिवासी कल्याण: करजोल ने संसदीय समिति में उठाए वन धन केंद्र और वनाधिकार के अहम मुद्दे

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कर्नाटक आदिवासी कल्याण: करजोल ने संसदीय समिति में उठाए वन धन केंद्र और वनाधिकार के अहम मुद्दे

सारांश

कर्नाटक में 140 में से 71 वन धन विकास केंद्र बंद, ₹9.01 करोड़ की राशि अटकी और 2,62,626 वनाधिकार आवेदन खारिज — BJP सांसद गोविंद करजोल ने संसदीय समिति में इन मुद्दों को उठाकर मंत्रालय से जवाब माँगा।

मुख्य बातें

करजोल ने 21 अगस्त 2026 को अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण संसदीय समिति की बैठक में कर्नाटक के आदिवासी मुद्दे उठाए।
कर्नाटक में स्वीकृत 140 वन धन विकास केंद्रों में से केवल 69 चालू; 71 केंद्र अभी तक शुरू नहीं।
कर्नाटक के लिए स्वीकृत ₹20.87 करोड़ में से केवल ₹11.86 करोड़ जारी; ₹9.01 करोड़ लंबित।
वनाधिकार अधिनियम के तहत कुल 2,95,176 आवेदनों में से 2,62,626 खारिज ; केवल 16,700 को अधिकार पत्र मिले।
पीएम-जनमन योजना के 33 स्वीकृत केंद्रों में से 12 अभी तक निष्क्रिय।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा का आश्वासन दिया।

चित्रदुर्ग से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री गोविंद एम. करजोल ने 21 अगस्त 2026 को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति की बैठक में कर्नाटक के आदिवासी समुदायों से जुड़े कई गंभीर मुद्दे केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखे। वन धन विकास केंद्रों की अधूरी स्थापना, लंबित अनुदान राशि और वनाधिकार अधिनियम के तहत बड़े पैमाने पर आवेदनों की अस्वीकृति — ये तीन मुद्दे बैठक में केंद्र में रहे।

वन धन विकास केंद्रों की स्थिति

करजोल ने बताया कि कर्नाटक में 140 वन धन विकास केंद्रों को स्वीकृति दी गई है, परंतु इनमें से केवल 69 केंद्र ही वर्तमान में संचालित हो रहे हैं। शेष 71 केंद्र अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं। उन्होंने मंत्रालय से देरी के कारण स्पष्ट करने और शेष केंद्रों के संचालन की समय-सीमा बताने की माँग की।

इसके अतिरिक्त, पीएम-जनमन योजना के तहत कर्नाटक के लिए 33 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 21 केंद्र चालू हैं जबकि 12 केंद्र अभी भी निष्क्रिय हैं। करजोल ने इन केंद्रों को शीघ्र प्रारंभ करने की अपील की।

लंबित अनुदान राशि का मुद्दा

करजोल ने सदन को अवगत कराया कि कर्नाटक के लिए ₹20.87 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी, किंतु अब तक केवल ₹11.86 करोड़ ही जारी किए गए हैं। इस प्रकार ₹9.01 करोड़ की राशि अभी भी लंबित है। उन्होंने मंत्रालय से यह राशि प्राथमिकता के आधार पर जल्द जारी करने का आग्रह किया, ताकि आदिवासी हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सके।

वनाधिकार आवेदनों की बड़े पैमाने पर अस्वीकृति

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में वनाधिकार अधिनियम के तहत कुल 2,95,176 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 2,62,626 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं — यानी कुल आवेदनों का लगभग 89%। केवल 16,700 आवेदनों को मंजूरी मिली है और अधिकार पत्र जारी किए गए हैं, जबकि 15,850 आवेदन अभी भी लंबित हैं।

करजोल ने इतने बड़े पैमाने पर अस्वीकृति के कारणों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने जिला-वार विस्तृत रिपोर्ट माँगी, जिसमें प्राप्त, स्वीकृत, अस्वीकृत और लंबित आवेदनों के साथ-साथ वितरित वनाधिकार पट्टों का ब्यौरा शामिल हो।

प्रदर्शन रिपोर्ट की माँग

करजोल ने संचालित 69 वन धन विकास केंद्रों की जिला-वार प्रदर्शन रिपोर्ट भी माँगी। इस रिपोर्ट में लाभार्थियों की संख्या, स्वीकृत एवं जारी राशि, व्यय का विवरण, केंद्रों की कार्य स्थिति, निर्मित उत्पाद, बिक्री का विवरण और आदिवासी समुदायों की आय संबंधी जानकारी शामिल करने की माँग रखी।

मंत्रालय का आश्वासन

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने करजोल को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई शीघ्र की जाएगी। यह देखना बाकी है कि मंत्रालय की प्रतिबद्धता ज़मीन पर कितनी जल्दी साकार होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरी संरचनात्मक विफलता का संकेत है — जहाँ कानून बना, पर क्रियान्वयन नहीं। वन धन केंद्रों की आधी से ज़्यादा क्षमता ज़मीन पर उतरने से पहले ही ठप है, और ₹9 करोड़ से अधिक की राशि नौकरशाही की देरी में फँसी है। मंत्रालय का 'प्राथमिकता समीक्षा' का आश्वासन परिचित लगता है — असली जवाबदेही तब होगी जब समिति इन आश्वासनों की समय-सीमाबद्ध अनुपालन रिपोर्ट माँगे।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोविंद करजोल ने संसदीय समिति में कर्नाटक के आदिवासियों से जुड़े कौन से मुद्दे उठाए?
करजोल ने वन धन विकास केंद्रों की अधूरी स्थापना, ₹9.01 करोड़ की लंबित अनुदान राशि, पीएम-जनमन योजना के निष्क्रिय केंद्र और वनाधिकार अधिनियम के तहत बड़े पैमाने पर आवेदनों की अस्वीकृति के मुद्दे उठाए। उन्होंने मंत्रालय से जिला-वार विस्तृत रिपोर्ट और शीघ्र कार्रवाई की माँग की।
कर्नाटक में वनाधिकार अधिनियम के तहत कितने आवेदन खारिज हुए हैं?
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कुल 2,95,176 आवेदनों में से 2,62,626 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। केवल 16,700 आवेदनों को मंजूरी मिली है और 15,850 आवेदन अभी भी लंबित हैं।
कर्नाटक में वन धन विकास केंद्रों की क्या स्थिति है?
कर्नाटक में 140 वन धन विकास केंद्रों को स्वीकृति मिली है, लेकिन केवल 69 ही चालू हैं और 71 केंद्र अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं। पीएम-जनमन योजना के तहत स्वीकृत 33 केंद्रों में से भी 12 अभी निष्क्रिय हैं।
कर्नाटक के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय की कितनी राशि लंबित है?
कर्नाटक के लिए ₹20.87 करोड़ स्वीकृत थे, जिनमें से ₹11.86 करोड़ जारी किए गए हैं। शेष ₹9.01 करोड़ की राशि अभी भी लंबित है।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने करजोल के सवालों पर क्या कहा?
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उठाए गए सभी मुद्दों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई शीघ्र की जाएगी। हालाँकि, किसी ठोस समय-सीमा का उल्लेख नहीं किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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