30 अक्टूबर 2026
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मोरक्को राजदूत मोहम्मद मलिकी ने मोदी को बताया वैश्विक नेता, भारत-मोरक्को रक्षा सहयोग पर दिया बड़ा बयान

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मोरक्को राजदूत मोहम्मद मलिकी ने मोदी को बताया वैश्विक नेता, भारत-मोरक्को रक्षा सहयोग पर दिया बड़ा बयान

सारांश

मोरक्को के राजदूत मोहम्मद मलिकी ने मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक छवि बदलने की तारीफ की और रक्षा, AI व G-20 में दोनों देशों के गहरे सहयोग को रेखांकित किया। मोरक्को में टाटा रक्षा इकाई और 42+ मंत्रिस्तरीय दौरे इस साझेदारी की गहराई दर्शाते हैं।

मुख्य बातें

मोरक्को राजदूत मोहम्मद मलिकी ने 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में साक्षात्कार में PM मोदी को वैश्विक नेता बताया।
मोरक्को में टाटा रक्षा उत्पादन इकाई भारत की विदेश में रक्षा उपकरण उत्पादन की पहली इकाइयों में से एक है।
दोनों देशों के बीच पिछले वर्ष रक्षा समझौता हुआ; कार्यसमूह की बैठक सितंबर 2025 में हुई।
मोरक्को ने UN सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन की पुष्टि की।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच 42 से अधिक मंत्रिस्तरीय दौरे हो चुके हैं।
मोरक्को की पहली महिला प्रधानमंत्री फातिमा अल मंसूरी के नेतृत्व में नई सरकार गठित हुई है।

भारत में मोरक्को के राजदूत मोहम्मद मलिकी ने 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक विशेष साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वैश्विक नेता बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व से पहले और आज के भारत की तुलना करने पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का बढ़ता प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। मलिकी ने यह भी कहा कि एक विशाल, विविधतापूर्ण और बहु-धार्मिक समाज वाले देश को चलाने के लिए विशेष क्षमता और दूरदृष्टि आवश्यक होती है।

रक्षा सहयोग: 'दुनिया के लिए भारत द्वारा मोरक्को में निर्मित'

राजदूत मलिकी ने भारत-मोरक्को रक्षा सहयोग को दोनों देशों के बीच विश्वास के सर्वोच्च स्तर का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि मोरक्को में स्थापित भारतीय रक्षा उत्पादन इकाई भारत के लिए विदेश में रक्षा उपकरण उत्पादन की पहली इकाइयों में से एक है, जबकि मोरक्को के लिए यह उसकी रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मलिकी के अनुसार, पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें संयुक्त कार्यसमूह के गठन का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इस कार्यसमूह की बैठक पिछले सितंबर में हुई थी। हाल के मराकेश एयर शो में भी यह सहयोग प्रमुखता से दिखाई दिया। मलिकी ने कहा, 'दुनिया के लिए भारत द्वारा मोरक्को में निर्मित' का विचार आज पहले से कहीं अधिक वास्तविक प्रतीत होता है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि टाटा इकाई के उद्घाटन के बाद भारतीय उद्योग जगत को यह संदेश गया है कि मोरक्को निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है और अन्य कंपनियों की भी इस दिशा में बढ़ती रुचि देखी गई है।

वैश्विक दक्षिण में भारत की भूमिका

मलिकी ने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण की एक महत्वपूर्ण आवाज है और अफ्रीकी देशों के साथ उसके ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने जी-20 में अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे अफ्रीका को वैश्विक आर्थिक निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में अधिक सशक्त मंच मिला।

राजदूत ने बताया कि मोरक्को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है। उनके अनुसार, 'सुरक्षा परिषद को आज की वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए।' गौरतलब है कि भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना के साथ उसका अंतरराष्ट्रीय प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

AI और नई तकनीक: अफ्रीका को पीछे न छोड़ें

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नई तकनीकों पर बात करते हुए मलिकी ने कहा कि भारत को अफ्रीकी देशों की मदद करनी चाहिए ताकि वे इस तकनीकी क्रांति से पीछे न रह जाएं। उन्होंने एक महत्वपूर्ण विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया — अफ्रीका और भारत दुनिया को दुर्लभ खनिज उपलब्ध कराते हैं जो नई तकनीकों के लिए आवश्यक हैं, लेकिन ये देश अक्सर उन्हीं तकनीकों को बाद में कहीं अधिक कीमत पर खरीदते हैं।

मलिकी ने कहा कि यदि AI का जिम्मेदारी और समावेशी दृष्टिकोण के साथ उपयोग किया जाए, तो यह रोजगार सृजन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार में कमी लाने में सहायक हो सकता है।

गाजा संकट और उच्चस्तरीय दौरे

गाजा की स्थिति पर राजदूत मलिकी ने कहा कि हालात को इस स्तर तक नहीं पहुंचने देना चाहिए था। उन्होंने मोरक्को के राजा मोहम्मद VI के उस कथन को उद्धृत किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'ऐसा लगता है मानो मानवता की नैतिकता समाप्त हो गई हो।' मलिकी ने आशा व्यक्त की कि वह नैतिकता फिर लौटेगी।

आगामी मंत्रिस्तरीय दौरों के संबंध में मलिकी ने बताया कि मोरक्को में फातिमा अल मंसूरी के नेतृत्व में नई सरकार — जो मोरक्को की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं — का हाल ही में गठन हुआ है और वह अभी बजट तैयारियों में व्यस्त है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच 42 से अधिक मंत्रिस्तरीय दौरे हो चुके हैं। मलिकी ने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी उच्चस्तरीय संवाद जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न केवल भावनात्मक। गौरतलब है कि भारत यूरोप-अफ्रीका के रक्षा बाज़ार में प्रवेश के लिए मोरक्को को एक प्रवेशद्वार के रूप में देख रहा है — और मोरक्को भारतीय पूंजी और तकनीक की ज़रूरत में है। 'दुनिया के लिए भारत द्वारा मोरक्को में निर्मित' की अवधारणा महत्वाकांक्षी है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज इस सवाल को नज़रअंदाज़ करती है कि इस इकाई की उत्पादन क्षमता और निर्यात आँकड़े अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोरक्को के राजदूत मोहम्मद मलिकी ने PM मोदी के बारे में क्या कहा?
मोरक्को के राजदूत मोहम्मद मलिकी ने PM मोदी को एक वैश्विक नेता बताया और कहा कि मोदी के नेतृत्व से पहले और आज के भारत की तुलना करने पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का बढ़ता प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि विशाल और विविधतापूर्ण भारत को चलाने के लिए विशेष क्षमता और दूरदृष्टि चाहिए।
भारत और मोरक्को के बीच रक्षा सहयोग की क्या स्थिति है?
दोनों देशों के बीच पिछले वर्ष एक रक्षा समझौता हुआ, जिसमें संयुक्त कार्यसमूह का गठन किया गया। मोरक्को में एक भारतीय रक्षा उत्पादन इकाई (टाटा) पहले से चालू है, जो भारत की विदेश में रक्षा उपकरण उत्पादन की पहली इकाइयों में से एक मानी जाती है।
मोरक्को ने UN सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता पर क्या रुख अपनाया है?
मोरक्को ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करने की पुष्टि की है। राजदूत मलिकी ने कहा कि सुरक्षा परिषद को आज की वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए जो उसके गठन के समय की परिस्थितियों से भिन्न हैं।
AI के संदर्भ में भारत-अफ्रीका सहयोग पर राजदूत का क्या नज़रिया है?
राजदूत मलिकी ने कहा कि भारत को अफ्रीकी देशों की मदद करनी चाहिए ताकि वे AI क्रांति से पीछे न रह जाएं। उन्होंने यह विरोधाभास रेखांकित किया कि अफ्रीका और भारत दुर्लभ खनिज उपलब्ध कराते हैं जो नई तकनीकों के लिए ज़रूरी हैं, लेकिन बाद में उन्हें वही तकनीकें अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ती हैं।
मोरक्को में नई सरकार के गठन का भारत-मोरक्को संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
मोरक्को में फातिमा अल मंसूरी के नेतृत्व में नई सरकार बनी है, जो देश की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। राजदूत मलिकी ने कहा कि नई सरकार अभी बजट तैयारियों में व्यस्त है, इसलिए किसी विशेष यात्रा की पुष्टि अभी नहीं की जा सकती, लेकिन दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय दौरे पहले की तरह जारी रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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