भारत-मोरक्को व्यापार 2015 से अब तक ₹35,000 करोड़ पार, राजदूत मलिकी बोले- 47 भारतीय कंपनियाँ मोरक्को में सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
भारत में मोरक्को के राजदूत मोहम्मद मलिकी ने 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में भारत-मोरक्को द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत बातचीत में कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार 2015 के 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर अब 4.2 अरब डॉलर तक पहुँच गया है — यानी एक दशक से भी कम समय में तीन गुना से अधिक की वृद्धि। उन्होंने यह भी बताया कि मोरक्को में सक्रिय भारतीय कंपनियों की संख्या 13 से बढ़कर 47 हो गई है और 200 से अधिक भारतीय कंपनियों की अप्रत्यक्ष उपस्थिति भी दर्ज है।
द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद
राजदूत मलिकी के अनुसार, 2001 में राजा मोहम्मद VI की एशिया की पहली यात्रा भारत की थी, जिसने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग की नींव रखी। उन्होंने कहा कि तभी से मोरक्को के सर्वोच्च नेतृत्व ने भारत के साथ संबंधों को प्राथमिकता दी है। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब भारत वैश्विक दक्षिण में अपनी आर्थिक और कूटनीतिक उपस्थिति लगातार बढ़ा रहा है।
मोरक्को: अफ्रीका और यूरोप का प्रवेशद्वार
राजदूत मलिकी ने मोरक्को की भौगोलिक रणनीतिक स्थिति पर जोर देते हुए कहा कि कासाब्लांका अफ्रीका से न्यूयॉर्क और कनाडा के सबसे निकटतम प्रमुख शहरों में से एक है। उन्होंने टैंजियर मेड बंदरगाह को अफ्रीका और भूमध्यसागर का अग्रणी बंदरगाह बताया, जो भारतीय कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक हब का काम कर सकता है। मोरक्को के विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते भारतीय निर्माताओं को यूरोपीय और अफ्रीकी बाज़ारों तक सुगम पहुँच दे सकते हैं।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
मलिकी ने बताया कि मोरक्को ऑटोमोबाइल उद्योग में अफ्रीका और अरब जगत में अग्रणी स्थान रखता है और एयरोनॉटिक्स तथा रक्षा क्षेत्र में भी उसकी महत्वपूर्ण उपस्थिति है। उन्होंने कार के पुर्जों, स्पेयर पार्ट्स, दवाइयों और कृषि उत्पादों को दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार के प्रमुख स्तंभ बताया। गौरतलब है कि भारत पश्चिमी और फ्रांसीसी भाषा-भाषी अफ्रीकी देशों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए मोरक्को को एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है।
मध्य पूर्व तनाव का व्यापार पर असर
राजदूत मलिकी ने स्वीकार किया कि मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे व्यापार में अस्थायी कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि अफ्रीका के दक्षिणी मार्ग से जहाजों का आवागमन अधिक महंगा और समय लेने वाला है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई संरचनात्मक गिरावट नहीं है और दोनों देशों में व्यापार विस्तार की पूरी क्षमता बरकरार है।
शांति प्रयासों में भारत की भूमिका
मलिकी ने कहा कि किसी भी समस्या का स्थायी समाधान हथियारों से नहीं निकलता और सभी पक्षों को राजनीतिक समाधान के लिए बातचीत की मेज पर आना होगा। उनके अनुसार, भारत वैश्विक दक्षिण में अपनी विश्वसनीयता और सभी प्रमुख पक्षों के साथ सकारात्मक संबंधों के कारण मध्य पूर्व में संवाद को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने मध्य पूर्व में भारतीय समुदाय की बड़ी उपस्थिति का भी उल्लेख किया, जो इस क्षेत्र में भारत के हितों को और रेखांकित करती है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संयुक्त उपक्रमों और साझेदारियों के ज़रिये वैश्विक दक्षिण के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।