29 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पश्चिम बंगाल में 'एक कक्षा, एक शिक्षक' नीति: अगले सत्र से प्राथमिक स्कूलों में लागू होने की तैयारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पश्चिम बंगाल में 'एक कक्षा, एक शिक्षक' नीति: अगले सत्र से प्राथमिक स्कूलों में लागू होने की तैयारी

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार प्राथमिक शिक्षा में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है — 'एक कक्षा, एक शिक्षक' नीति के तहत अब शिक्षक की वेतन वृद्धि सीधे उसके छात्रों की प्रगति से जुड़ेगी। साथ ही 13,000 नई भर्तियों से शिक्षक-छात्र अनुपात 1:26 से सुधारकर 1:20 करने का लक्ष्य है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने 29 अक्टूबर 2026 को 'एक कक्षा, एक शिक्षक' नीति की घोषणा की।
प्रस्ताव के तहत एक शिक्षक अपनी निर्धारित कक्षा के सभी विषय पढ़ाएगा और उसकी वार्षिक वेतन वृद्धि छात्रों की प्रगति से जुड़ेगी।
प्राथमिक स्तर पर वर्तमान शिक्षक-छात्र अनुपात 1:26 ; 13,000 नई भर्तियों से इसे 1:20 करने का लक्ष्य।
माध्यमिक स्तर पर शिक्षक-छात्र अनुपात 1:50 है, जिसमें भी सुधार की योजना।
ऑल-बंगाल प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने 29 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि राज्य का स्कूल शिक्षा विभाग अगले शैक्षणिक सत्र से प्राथमिक विद्यालयों में 'एक कक्षा, एक शिक्षक' नीति लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक शिक्षक को उसकी निर्धारित कक्षा के सभी विषय पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी और उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि उसी कक्षा के छात्रों की शैक्षिक प्रगति से जोड़ी जाएगी।

नीति का मूल स्वरूप

मंत्री बर्मन के अनुसार, इस नई व्यवस्था में प्रत्येक शिक्षक को पूरे शैक्षणिक वर्ष के लिए एक ही कक्षा की संपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा, 'इस नीति के तहत, एक शिक्षक को उस कक्षा के सभी विषय पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी जो उसे सौंपी गई है। साथ ही, यह भी विचार है कि संबंधित शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) को उस कक्षा के छात्रों की प्रगति से जोड़ा जाएगा।' यह प्रदर्शन-आधारित जवाबदेही का एक महत्त्वपूर्ण प्रयोग है, जो भारतीय प्राथमिक शिक्षा में अभी तक कम ही देखा गया है।

नीति के पीछे की सोच

बर्मन ने बताया कि यह निर्णय शिक्षाविदों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उनके शब्दों में, 'अगर हर किसी के पास एक निश्चित जिम्मेदारी हो, तो उस काम के प्रति समर्पण भी बढ़ जाता है। जब कोई शिक्षक पूरे साल के लिए एक कक्षा की जिम्मेदारी लेता है, तो उसे छात्रों की खूबियों और कमियों की स्पष्ट समझ हो जाती है, जिससे उनके सर्वांगीण विकास में मदद मिलती है।' गौरतलब है कि यह नीति शिक्षक-छात्र संबंध को मज़बूत करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के दोहरे उद्देश्य से प्रेरित है।

शिक्षक-छात्र अनुपात की चुनौती

राज्य सरकार ने शिक्षक-छात्र अनुपात (टीचर-स्टूडेंट रेशियो) में सुधार के लिए भी एक रणनीति तैयार की है। वर्तमान में प्राथमिक स्तर पर यह अनुपात 1:26 है, जबकि माध्यमिक स्तर पर यह 1:50 तक पहुँच जाता है। बर्मन ने स्पष्ट किया कि यदि प्राथमिक स्तर पर 13,000 शिक्षकों की नई भर्ती की जाती है, तो अनुपात को सुधारकर 1:20 तक लाया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी अध्यापन गुणवत्ता और जवाबदेही पर ज़ोर देती है।

शिक्षक संगठन की प्रतिक्रिया

ऑल-बंगाल प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। एसोसिएशन के महासचिव ध्रुबशेखर मंडल ने कहा, 'हर कक्षा के लिए एक ही शिक्षक को जिम्मेदारी देना जरूरी है। अगर एक शिक्षक को कई कक्षाओं की जिम्मेदारी दे दी जाए, तो छात्रों की सर्वांगीण प्रगति सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है।' शिक्षक संगठन के इस समर्थन से नीति के क्रियान्वयन की राह अपेक्षाकृत सुगम हो सकती है।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार अभी इस नीति पर विचार के चरण में है और अंतिम निर्णय की घोषणा होनी शेष है। शिक्षण पद्धति में बदलाव के साथ-साथ शिक्षकों के मूल्यांकन की प्रक्रिया में भी आमूल परिवर्तन की योजना है। यदि यह नीति अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होती है, तो पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा में जवाबदेही आधारित सुधार लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सफलता कुछ बुनियादी सवालों के जवाब पर निर्भर है — क्या एक शिक्षक के लिए सभी विषयों में पारंगत होना व्यावहारिक है, और क्या वेतन वृद्धि को छात्र प्रगति से जोड़ना उचित मूल्यांकन पद्धति के बिना शिक्षकों पर अनुचित दबाव नहीं डालेगा? माध्यमिक स्तर पर 1:50 का अनुपात एक गंभीर संकट का संकेत है जिसे महज नीतिगत घोषणाओं से नहीं सुलझाया जा सकता — 13,000 भर्तियाँ सही दिशा में कदम हैं, पर पर्याप्त नहीं। शिक्षक संगठन का समर्थन एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन जब तक क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा, प्रशिक्षण योजना और पारदर्शी मूल्यांकन ढाँचा सामने नहीं आता, यह नीति सुर्खियों तक ही सीमित रहने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल की 'एक कक्षा, एक शिक्षक' नीति क्या है?
यह एक प्रस्तावित शिक्षा सुधार है जिसके तहत प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक शिक्षक को पूरे शैक्षणिक वर्ष के लिए एक निर्धारित कक्षा के सभी विषय पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। साथ ही उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि उसी कक्षा के छात्रों की शैक्षिक प्रगति से जोड़ी जाएगी।
यह नीति कब से लागू होगी?
स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन के अनुसार यह नीति अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होने की संभावना है, हालाँकि अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
पश्चिम बंगाल में वर्तमान शिक्षक-छात्र अनुपात क्या है?
प्राथमिक स्तर पर वर्तमान शिक्षक-छात्र अनुपात 1:26 है, जबकि माध्यमिक स्तर पर यह लगभग 1:50 है। सरकार की योजना 13,000 नई भर्तियों के ज़रिए प्राथमिक स्तर पर इसे 1:20 तक लाने की है।
शिक्षक संगठन ने इस नीति पर क्या रुख अपनाया है?
ऑल-बंगाल प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। महासचिव ध्रुबशेखर मंडल ने कहा कि एक शिक्षक पर कई कक्षाओं की जिम्मेदारी होने से छात्रों की सर्वांगीण प्रगति सुनिश्चित करना मुश्किल होता है।
इस नीति से छात्रों और शिक्षकों को क्या फायदा होगा?
मंत्री बर्मन के अनुसार जब एक शिक्षक पूरे साल एक ही कक्षा की जिम्मेदारी संभालता है तो उसे छात्रों की खूबियों और कमियों की गहरी समझ होती है, जिससे उनके सर्वांगीण विकास में मदद मिलती है। इससे शिक्षक-छात्र संबंध मजबूत होता है और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले