पश्चिम बंगाल में 2028 से लागू होगा नया स्कूल पाठ्यक्रम, शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य के स्कूलों में नया पाठ्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2028 से लागू किया जाएगा। नई पाठ्यक्रम समिति की पहली बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि यह समिति राज्य की वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के समग्र विकास के लिए एक दीर्घकालिक शैक्षिक रोडमैप तैयार करने में जुट गई है।
समिति की संरचना और पहली बैठक
नई पाठ्यक्रम समिति की अध्यक्षता प्रो. कल्याण चक्रवर्ती कर रहे हैं। पहली बैठक में स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री कौशिक चौधरी और राज्य के शिक्षा सचिव विनोद कुमार भी उपस्थित रहे। बर्मन ने बताया कि समिति की सिफारिशों के आधार पर ही सरकार अंतिम फैसला करेगी।
2027 तक मौजूदा पाठ्यपुस्तकें जारी रहेंगी
मंत्री ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक सत्र 2027 में मौजूदा पाठ्यपुस्तकें ही चलती रहेंगी और उनकी समीक्षा की जाएगी। समय की कमी के कारण 2027 के पाठ्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं है। परंपरा के अनुसार 2 जनवरी 2027 को पश्चिम बंगाल के 'बुक डे' से पहले छात्रों को पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएंगी। 2028 के लिए नए पाठ्यक्रम और सिलेबस का मसौदा तैयार होने के बाद उसे सार्वजनिक किया जाएगा और राजनीतिक तथा छात्र संगठनों से राय माँगी जाएगी।
NEP 2020 के दिशानिर्देश और संवेदनशील मुद्दे
बर्मन ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दिशानिर्देशों के अनुरूप नए पाठ्यक्रम में सेमेस्टर प्रणाली और पास-फेल प्रणाली की वापसी जैसे संवेदनशील विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि नए पाठ्यक्रम को राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रखने की हरसंभव कोशिश की जाएगी।
सिंगूर अध्याय और राजनीतिक तटस्थता
2007 में हुगली जिले के सिंगूर में हुए भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े अध्याय को पाठ्यपुस्तकों में शामिल किए जाने का संदर्भ देते हुए बर्मन ने कहा कि शिक्षा का माहौल भयमुक्त और वैज्ञानिक सोच पर आधारित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंगूर या हालिया इतिहास से जुड़े विषयों को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करना उचित है या नहीं, यह निर्णय शिक्षाविद करेंगे — न कि राजनेता।
अंग्रेजी माध्यम स्कूल और संस्कृत
मंत्री ने यह भी बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में शुरू किए गए अंग्रेजी माध्यम के स्कूल जारी रहेंगे और उनकी गुणवत्ता तथा शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने के प्रस्तावों पर विचार चल रहा है। इसके अलावा संस्कृत को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए भी चर्चा जारी है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में शिक्षा सुधार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEP 2020 के क्रियान्वयन को लेकर राज्यों में अलग-अलग रुख देखा जा रहा है।