पश्चिम बंगाल में NEP 2020 और पीएम-श्री योजना लागू, केंद्र-राज्य के बीच ऐतिहासिक एमओयू
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में शिक्षा सुधार की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और पश्चिम बंगाल सरकार ने 15 मई 2025 को नई दिल्ली में एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रावधानों को लागू किया जाएगा और चुनिंदा सरकारी स्कूलों को पीएम-श्री योजना के अंतर्गत आधुनिक मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित किया जाएगा। यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में सत्ता परिवर्तन से पहले लंबे समय तक इन केंद्रीय योजनाओं को लागू करने से परहेज किया जाता रहा था।
एमओयू पर हस्ताक्षर: मुख्य घटनाक्रम
यह समझौता शिक्षा मंत्रालय के सचिव संजय कुमार की उपस्थिति में संपन्न हुआ। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अतिरिक्त सचिव धीरज साहू और अतिरिक्त मुख्य सचिव बिनोद कुमार ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर राज्य परियोजना निदेशक विभु गोयल, संयुक्त सचिव डॉ. अमरप्रीत दुग्गल और निदेशक यूपी सिंह भी मौजूद रहे। मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से यह समझौता केंद्र और राज्य के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।
पीएम-श्री योजना: स्कूलों में क्या बदलेगा
पीएम-श्री योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल सोच पर आधारित है। इस योजना के तहत पश्चिम बंगाल के चुनिंदा सरकारी स्कूलों को उत्कृष्ट मॉडल संस्थानों के रूप में तैयार किया जाएगा। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल शिक्षण प्रणाली, आधुनिक प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय, खेल सुविधाएँ और कौशल विकास कार्यक्रम उपलब्ध कराए जाएंगे। विद्यार्थियों के समग्र विकास, रचनात्मक सोच और अनुभव-आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया जाएगा।
योजना का दीर्घकालिक उद्देश्य केवल बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना नहीं, बल्कि इन स्कूलों को ऐसे केंद्रों में बदलना है जो आसपास के अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणास्रोत बनें और पूरे क्षेत्र की शिक्षा गुणवत्ता को ऊपर उठाएँ।
NEP 2020 के तहत शिक्षण पद्धति में बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार पश्चिम बंगाल के स्कूलों में मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा, तकनीक-आधारित शिक्षण, व्यावहारिक ज्ञान और कौशल-आधारित पाठ्यक्रम को प्राथमिकता दी जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब देश के अधिकांश राज्य NEP 2020 को पहले ही अपना चुके हैं और पश्चिम बंगाल इस राष्ट्रीय ढाँचे से जुड़ने वाले अंतिम बड़े राज्यों में से एक है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और सत्ता परिवर्तन का असर
गौरतलब है कि पूर्ववर्ती ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने NEP 2020 के कई प्रावधानों और पीएम-श्री योजना को राज्य में लागू करने से लंबे समय तक परहेज किया था। केंद्र और राज्य के बीच इस विषय पर लंबे समय तक टकराव की स्थिति बनी रही। सत्ता परिवर्तन के बाद नई राज्य सरकार ने केंद्र के साथ सहयोग बढ़ाते हुए शिक्षा सुधारों को प्राथमिकता सूची में ऊपर रखा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर की संरचना से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य के लाखों विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा। हालाँकि, क्रियान्वयन की गति और ज़मीनी स्तर पर बदलाव की वास्तविकता आने वाले महीनों में ही स्पष्ट होगी।